भारत के सीरियल किलर्स: जिनके बारे में जानकर काँप उठेगी आपकी रूह

कोई सायनाइड से तो कोई हथौड़े से लेता था जान 

भारत के सीरियल किलर्स: जिनके बारे में जानकर काँप उठेगी आपकी रूह
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इंसान किस हद तक निर्दयी या क्रूर हो सकता है इस बात का शायद आप और हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं। कई ऐसे लोग रहे हैं जिन्होनें मानवता को शर्मसार करते हुए कई ज़िंदगियाँ तबाह की हैं। परंतु हम यहाँ बात कर रहे हैं उन बेरहम लोगों की जिन्होनें 1 या 2 नहीं बल्कि कई लोगों की ज़िन्दगी अपने हाथों से ख़त्म की है। भारत में भी इस तरह के कई मामले सामने आये हैं।
किसी ने पत्थर से कुचल कर दर्जनों को सुला दिया तो कोई हथौड़े से लोगों की जान लेता फिर रहा था। आइये जानते हैं भारत के ऐसे ही कुछ खतरनाक व निर्दयी हत्यारों के बारे में।

1. ठग बेहराम 

1. ठग बेहराम 

ठग बेहराम को दुनिया के सबसे खतरनाक सीरियल किलर्स में से एक माना जाता है। 'लुटेरों का सरदार' के नाम से पहचाने जाने वाले इस शख्स नें 1790 से 1840 के दरमियान 100 या 200 नहीं बल्कि 931 हत्याएं की है। दरिंदगी को एक नए आयाम में लेकर जाने वाले बेहराम को 1840 में फांसी दे दी गई।

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2. सायनाइड मोहन

2. सायनाइड मोहन
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मोहन कुमार उर्फ़ सायनाइड मोहन नें सन 2005 से 2009 के बीच 20 महिलाओ की सायनाइड गोली देकर हत्या कर दी। हत्या करने के अपने इस तरीके की वजह से इसे सायनाइड के नाम से जाना जाता है। यह उन महिलाओं को अपना शिकार बनाता था जो दहेज़ या किसी अन्य वजह से अपने लिए पति नहीं ढूंढ पाती थी।

# सायनाइड मोहन की शिकार महिलाएं

# सायनाइड मोहन की शिकार महिलाएं
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अपने प्यार के झांसे में फंसा कर मोहन महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध बनाता और फिर गर्भनिरोधक गोली के नाम पर सायनाइड देकर उन्हें मार देता था। दिसम्बर 2013 में अपने इस घिनौने कृत्य के लिए 'सायनाइड मोहन' को मौत की सजा सुनाई गई।

3. रमन राघव

3. रमन राघव
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रमन राघव को 'साइको रमन' के नाम से भी जाना जाता है। इस शख्स नें सन 1965 से 1968 के बीच मुम्बई की सड़कों पर मौत का तांडव कर रखा था। रमन राघव का असली नाम सिंधी दलवाई बताया जाता है। रमन नें कुल कितनी हत्याएं की है यह पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं है। परंतु अंदाज़तन रमन को लगभग 40 हत्याओं का दोषी बताया जाता है। रमन राघव को न्यायालय के द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। परंतु सन 1995 में किडनी की समस्या से जूझ रहे रमन की मौत हो गई। रमन राघव के ऊपर हाल ही में बॉलीवुड फिल्म भी बनाई गई है जिसमें अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी नें यह किरदार निभाया है।

4. ऑटो शंकर

4. ऑटो शंकर
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शंकर उर्फ़ ऑटो शंकर नें चेन्नई शहर में सन 1988-89 के दौरान 9 मासूम लड़कियों की हत्याएं की थी। इस जुर्म में ऑटो चालक शंकर के साथ उसका भाई मोहन व कुछ अन्य लोग भी शामिल थे। ऑटो शंकर लड़कियों को अगवा कर उन्हें मौत के घाट उतारता था और फिर शव को जला कर उसकी राख समुद्र में बहा देता था। एक के बाद एक लड़कियों के गायब होने पर चेन्नई पुलिस हरकत में आई एवम इस मामले की खोजबीन शुरू की गई। ऑटो शंकर को पकड़ने के लिए पुलिस के द्वारा एक अंडरकवर अभियान भी चलाया गया था। ऑटो शंकर को 1991 में मौत की सजा सुनाई गई एवं सालेम सेंट्रल जेल में उसे फांसी के फंदे में लटका दिया गया।

5. कंपटीमार शंकरिया

5. कंपटीमार शंकरिया
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जयपुर शहर के रहने वाले शंकरिया को एक क्रूर हत्यारे के रूप में देखा जाता है। कंपटीमार शंकरिया नें 1977-78 के दौरान लगभग 70 लोगों की हत्या हथौड़ा मार कर की थी। सन 1979 की शुरुआत में इसे इन हत्याओं के लिए फांसी की सजा दे दी गई। फांसी के तख्ते में लटकाये जाने से पहले शंकरिया के आखिरी शब्द थे 'मैंने ये हत्याएं व्यर्थ में ही की है' एवं 'किसी और को मेरे जैसा नहीं बनना चाहिए'।

6. चार्ल्स शोभराज - 'बिकिनी किलर'

6. चार्ल्स शोभराज - 'बिकिनी किलर'
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चार्ल्स शोभराज फ्रांस-वियतनाम मूल का व्यक्ति था। शोभराज के ऊपर वियतनाम व भारत में कई हत्याएं करने करने का आरोप है। 1970 के दशक में शोभराज नें दक्षिण-पूर्व भारत में लगभग दर्जन भर हत्याएं की हैं। चार्ल्स शोभराज विदेशी पर्यटकों खासकर महिलाओं से दोस्ती कर पहले उनका विश्वास जीतता और फिर उन्हें मौत की नींद सुला देता था। इसकी शिकार बनी कई महिलाओं के शव 'बिकिनी' में पाए जाने से इसे 'बिकिनी किलर' के नाम से भी जाना जाता है। पकडे जाने के बाद भी शोभराज की अदालत में पेशी काफी चर्चा का विषय रही। शोभराज को मौत की सजा मिलने का अनुमान लगाया जा रहा था, परंतु न्यायालय के द्वारा सिर्फ 12 वर्ष जेल की सजा सुनाई गई। अपनी सजा काट कर शोभराज वापस अपने देश फ्रांस चला गया परंतु 2003 में उसे दोबारा नेपाल में गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल शोभराज आज भी नेपाल की जेल में उम्र कैद की सजा काट रहा है।

7. स्टोनमैन किलर

7. स्टोनमैन किलर
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भारत के दो बड़े शहरों मुम्बई व कोलकाता की सड़कों पर 1985 से 1989 के बीच दहशत के साये को चरम पर ले जाने वाली शख्सियत को 'स्टोनमैन किलर' का नाम दिया गया था। यह नाम इसके द्वारा हत्या करने के तरीके की वजह से दिया गया। 'स्टोनमैन किलर' रात के अँधेरे में सड़क किनारे फुटपाथ पर अकेले सो रहे लोगों को निशाना बना भारी पत्थर से उनका सर कुचल कर उन्हें हमेशा के लिए सुला दिया करता था। 1985-86 के दौरान एक वर्ष में इसने मुम्बई के सड़कों पर 13 लोगों की हत्याएं की। पुलिस इस हत्यारे को पकड़ने में नाकाम रही और यह हत्याएं कुछ समय बाद रुक गई। परंतु 1989 में यह सिलसिला दोबारा शुरू हुआ, इस बार शहर था कोलकाता। इस बार महज 6 महीने में 13 हत्याओं से कोलकाता का दिल दहल उठा था। यह हत्यारा कौन था यह आज भी एक पहेली है। 'स्टोनमैन किलर' कभी पकड़ा नहीं जा सका।