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चाय से जुड़ी कुछ ख़ास बातें जिनका हर किसी के जीवन में बहुत महत्त्व है

भारत के राष्ट्रीय पदार्थ को ज़रूर जानिए। 

चाय से जुड़ी कुछ ख़ास बातें जिनका हर किसी के जीवन में बहुत महत्त्व है
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"चाय पीने का बहाना चाहिए, या कि जीने का बहाना चाहिए " अब चूँकि मैं चाय का ज़िक्र छेड़ ही चुकी हूँ तो आपको बताती चलूँ  की चाय की वैसे तो शुरुआत चीन से हुई थी मगर हम भारतियों का पेय-पदार्थ भी चाय ही हैं। 

और चूँकि मैं तो ठहरी बचपन से ही चाय कि चटोरी तो एक बार history कि टीचर से पूछ बैठी कि "मैडम ये चाय आई कहाँ से" तो जवाब ये मिला कि "2737 ई .पू  में यकायक चाय की कुछ पत्तियाँ उबलते हुए पानी में आ गिरी और इस तरह चाय ईजाद हो गई।"
ख़ैर ये भी कोई कम गर्व की बात नहीं हैं की हमारा भारत चाय के उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। हमारे असामी भाइयों का बहुत बहुत शुक्रिया क्यूँकि चाय का उत्पादन वहीं से होता है, चलिए अब मैं और ज़्यादा गप-शप नहीं करती कुछ चाय से जुड़ी बातें हैं जो की हर आम आदमी से जुड़ी हैं, तो बताए देती हूँ।

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"Morning" वाली चाय। 

हम भारतियों में एक बात तो सामान्य हैं कि सुबह की शुरुआत चाय के बिना अधूरी हैं, आप मध्यम वर्गीय तपके से हों या हाई क्लास सोसाइटी से, चाय के जादू से कोई नहीं बच पाया हैं। 

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नुक्कड़ वाली चाय।

नुक्कड़ वाली चाय।

किसी मोहल्ले में घुसते ही चाय का ठेला तो नज़र आ ही जाएगा और चाय वाले भैया का, उबलती हुई चाय को हाथ उठाकर ऊपर ले जाना आप नज़र अंदाज़ नहीं कर सकते। 

रिश्ते वाली चाय। 

हाथ में चाय की ट्रे लाती हुई लड़की, और हॉल में बैठे कुछ मेहमान, लड़की की शर्मीली सी मुस्कान और चाय की चुस्कियाँ, ये तो आम सी बात हैं हम भारतीयों के लए, और अगर वास्तविक जीवन में ना भी हुआ हो तो मूवीज़ में तो देखा ही होगा।

छोटू एक "cut" लाना।

छोटू एक
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बीतें दिनों की बात है, मैं अपने ऑफिस की एक मेमसाब के साथ चाय पीने गई तो मैंने भैया को कहा "2 कट " साथ वाली मेमसाब पूछ बैठी "कट" मतलब और जवाब मेरा भी यही था "आधे से ज़्यादा और पूरे से कम"।

"Office" वाली चाय।  

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और ये तो जैसे हमारा जन्म सिद्ध अधिकार हो, जहाँ दफ़्तर में सुस्ती महसूस की नहीं कि एक भरपूर अंगड़ाई के साथ आस पास के टेबल पर लगाई आवाज़ "चलो यार tea-break लेते हैं " 

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"Train" वाली चाय। 

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अगर आप जनरल या स्लीपर कोच में हैं तो ये आवाज़ कानो में गूँजती रहेगी "चाय चाय चाय चाय चाय, लो गरमा गरम चाय" और दिल को हज़ार बार मना करने के बावजूद निकल ही जाता है मुँह से "भैया एक इधर भी"।

सुट्टे वाली चाय। 

सुट्टे वाली चाय। 

"भैया 2 mild और  2  कटिंग देना" और चाय की टपरी के पास से गुज़रते वक़्त ये आवाज़ तो जैसे लाज़मी है, मुझे तो लगता है, चाय और सुट्टा उर्फ़ सिगरेट का कॉम्बिनेशन जैसे शोले के जय और वीरू..हा हा हा.. 

मेरी चाय। 

मेरी चाय। 

और चाय के प्रति अपनी इस मोहब्बत को क़ायम रखते हुए ये एक तस्वीर जो मैंने मेरे ही शहर कि एक जानी मानी जगह पर ली थी तो सोचा कि आपको भी बताती चलूँ, आख़िर चाय के स्वाद से वाकिफ़ तो आप भी होंगे ही। 

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