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'प्रेम विवाह' होने के बावजूद आखिर कैसे बिखर जाता है यह रिश्ता

क्या पता आप इसे पढ़कर ऐसी सिचुएशन से बच जाएं?

'प्रेम विवाह' होने के बावजूद आखिर कैसे बिखर जाता है यह रिश्ता
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समीर और स्नेहा एक दूसरे से बहुत प्यार करते है. दोनों एक दूसरे पर जान लुटाते है और एक दूसरे के बिना एक पल भी नही रहना चाहते है. दोनों काफी लंबे समय से एक दूसरे के साथ है और एक दूसरे को बड़ी अच्छी तरह जानते है. लंबे समय तक रिश्ते में रहने के बाद यह शादी का फैसला करते है. शादी के बाद भी यह दोनों साथ में काफी खुश है. पर गुजरते वक्त के साथ न जाने ऐसा क्या होता है कि आख़िरकार दोनों एक दूसरे से शादी के तीन साल बाद ही अलग हो जाते है. दोनों ही एक दूसरे से वफादार थे फिर भी यह हुआ.

यह तो एक ही कहानी है पर ऐसा अंत कई प्रेम विवाहो का होता है. कोई किसी को धोखा नही दे रहा हो फिर भी यह होता है. आखिर क्या होती इस अलगाव के पीछे वजहे. आइये कोशिश करते है जानने की-

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तैयार न होना

तैयार न होना

यह एक बहुत बड़ा तथ्य है कि किसी के साथ रिलेशनशिप में होना और उससे शादी करना बहुत अलग बाते होती है. हो सकता है कि आप उस इंसान के साथ पूरी जिंदगी बिताना चाहते है पर इसका यह बिलकुल मतलब नहीं है कि आप अभी शादी के लिए तैयार है. हर चीज का एक सही वक़्त होता है. साथ ही अगर एक साथी तैयार हो तो दूसरा साथी उसकी ख़ुशी के लिए शादी के लिए राजी हो जाता है. यह निश्चित ही भविष्य में दिक्कत दे सकता है.

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अब 'हम-तुम' नहीं 'हम-सब' है

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शादी से पहले तो बस लड़का और लड़की ही होते है. वो दोनों एक दूसरे के लिए काफी होते है. हो सकता है वे एक दूसरे के परिजनों से न मिले हो या मिले भी हो तो कोई घनिष्ठता नहीं होती. पर अगर घरवालो की रजामंदी से शादी हुई है तो अब आपके साथी का परिवार भी आपका उतना ही अपना है जितना आपका साथी. आपको साथी के परिवार के साथ भी सामंजस्य बैठना होता है. यह लड़का और लड़की दोनों के लिए जरुरी होता है. नए लोगो को जानना, उनके साथ रिश्ता निभा पाना, उनके तौर तरीके अपना पाना जैसी कई बाते होती है जो दिक्कते पैदा करती है

नई जिम्मेदारियां

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शादी से पहले दो लोगो के लिए एक दूसरे का ख्याल रखना, एक दूसरे की फ़िक्र करना, एक दूसरे को खुश रखना जैसी कुछ ही जिम्मेदारियां होती है. पर शादी के बाद कई जिम्मेदारियां बढ़ती है. अब आप परिवार हो तो आपको बड़ी जिम्मेदारियां उठानी होती है. पुरुष साथी को अपने बढ़ते परिवार को ध्यान में रखते हुए कार्यस्थल पर ज्यादा जिम्मेदार
 होना पड़ता है. वही अगर महिला साथी कामकाजी है फिर भी घर की जिम्मेदारियां, परिवार की जिम्मेदारियां तो निभानी ही होती है. इन जिम्मेदारियों का बोझ कई दफा कुछ ज्यादा ही हावी हो जाता है.

वक़्त न दे पाना

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कोई भी युगल जो एक दूसरे से प्यार करते है अपना ज्यादा से ज्यादा वक़्त एक दूसरे के साथ बिताना चाहते है, वे इस दौरान अपने दोस्तों परिवार सबको नजरअंदाज करते है. पर जैसे ही इन दो लोगो की शादी होती है बात 'घर की मुर्गी दाल बराबर' वाली  हो जाती है. ऐसा कोई जानबूझकर नहीं करता पर मन में कही न कही यह बात आ ही जाती है कि हमारा साथी तो अब घर में ही रहने वाला है. साथ ही जिम्मेदारियां और पारिवारिक कारण भी एक दूसरे के साथ वक़्त नहीं बिताने देते है. जो अक्सर दम्पति में झगड़ो का कारण बनते है.

अपेक्षाओं में बदलाव

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जब दो लोग प्रेमी-प्रेमिका की भूमिका में होते है वे एक दूसरे से कुछ अपेक्षाएं रखते है. पर अक्सर ही यह दो लोग अपने पति या पत्नी से कुछ और अपेक्षाएं रखते है. यह बदलाव भी रिश्तो में खटास पैदा करता है. साथ ही इन बदली हुई अपेक्षाओं पर खरा न उतर पाना भी तनाव पैदा करता है.उदाहरण  के लिए कोई लड़का अपनी प्रेमिका से अपेक्षा रखता हो कि वह उससे प्यार की बाते करे, उसके साथ वक़्त बिताये आदि. परन्तु वही इंसान अपनी पत्नी से उम्मीद रखता हो कि वह उसका घर अच्छी तरह संभाले, उसके माँ बाप का अच्छी तरह ध्यान रखे व परिवार को बांध कर रखे आदि.

स्वभाव बदलना

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वक़्त और हालात के साथ तो हर इंसान बदलता है. पर कभी कभी एक साथी को अपने दूसरे साथी में आया बदलाव रास नहीं आता. जैसे कि एक पत्नी वक़्त के साथ एक अच्छी बहू बन रही है. वह वक़्त के साथ जिम्मेदार हो गयी है. हो सकता है कि पति को उसका पहले चुलबुला होना अब भी पसंद हो.

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नए मेहमान का आगमन

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एक नन्ही सी जान का जिंदगी में आना माँ और पिता दोनों की ही जिंदगी बदल देता है. यह नया मेहमान दोनों की जिम्मेदारियां भी बढ़ाता है. इन जिम्मेदारियों को लेकर ही अक्सर दोनों के बीच तनाव पैदा होता है.

आपसी समझ का अभाव

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किसी को प्यार करना और उसे समझना दो अलग बाते होती है. किसी भी रिश्ते में आपसी समझ होना बहुत जरुरी है. कुछ जोड़ो में प्यार तो बहुत होता है पर वो एक दूसरे के सपनो, इच्छओ, स्वभाव  को समझ नहीं पाते. यह नासमझी उनके रिश्ते को कमजोर करती है.

वक़्त के साथ न बदलना

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कुछ लोग वक़्त के साथ चलना सीख लेते है. वही कुछ लोग यह नहीं सीख पाते. जो नहीं सीख पाते वो पुरानी जिंदगी को याद करते रहते है और सोचते है कि आज भी सबकुछ वैसा ही हो . ऐसे लोग रिश्ते से खुश नहीं रह पाते.

शारीरिक परिवर्तन

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यह किसी से रिश्ता खत्म करने की एक बहुत ही घटिया वजह मानी जा सकती है, पर यह सच्चाई है. वक़्त के साथ उम्र बढ़ती है और व्यक्ति का रंग रूप भी. इसी वजह से कुछ लोग अपने साथी को सिर्फ इसलिए छोड़ देते है क्योकि अब वह पहले की तरह सुन्दर और आकर्षक नहीं लगता.

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