ये हैं हिंदी साहित्य की कुछ बेहतरीन रचनाएं, हर हिन्दी भाषी को इन्हें पढ़ना चाहिए

विश्व हिंदी दिवस विशेष। 

ये हैं हिंदी साहित्य की कुछ बेहतरीन रचनाएं, हर हिन्दी भाषी को इन्हें पढ़ना चाहिए
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हिंदी साहित्य हमेशा से ही भावनाओं से भरा हुआ रहा है। हिन्दी की रचनाएं, उपन्यास, लेख एवं कविताएं इस तरह से शब्दों और अर्थों के बीच पिरोई गई है कि पढ़ने वाला स्वतः ही इनके प्रति एक जुड़ाव महसूस करने में मजबूर हो जाता है। हरिवंश राय बच्चन, रबीन्द्रनाथ टैगोर, सुमित्रा नंदन पन्त सहित हिंदी के महानतम कवियों, लेखकों की फेहरिस्त काफी लम्बी है। यदि इनकी रचनाओं की बात करना शुरू करेंगे तो शायद वक्त ही हमसे शिकायत करना शुरू कर देगा। ऐसे में आज हम आपके लिए लेकर आए हैं हिंदी की कुछ चुनिंदा रचनाएं।

दरअसल ये वो रचनाएं हैं जो हर हिंदी भाषी को कम से कम एक बार तो पढ़ना ही चाहिए। तभी आप भी कह सकेंगे कि, "हाँ, मुझे गर्व है कि मैं हिन्दी हूँ।" आपको बता दें कि आज के दिन को दुनियाभर में 'विश्व हिंदी दिवस' के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में तो यह पढ़ना फायदे का सौदा है।

14. 'चंद्रकांता'- देवकीनंदन खत्री 

14. 'चंद्रकांता'- देवकीनंदन खत्री 

देवकीनंदन खत्री द्वारा रचित 'चंद्रकांता' भारत में लोकप्रिय उपन्यास रहा है। इसके ऊपर कई टीवी सीरियल और फिल्में बन चुकी हैं। आपको बता दें कि यह कहानी 7 भागों में प्रकाशित की गई थी, जिसे 'चंद्रकांता संतति' के नाम से जाना जाता है। 

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13. 'चिदंबरा'- सुमित्रानंदन पंत 

13. 'चिदंबरा'- सुमित्रानंदन पंत 
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कवि सुमित्रानंदन पन्त की हर कविता पढ़ने योग्य है। मगर 'चिदंबर' उनकी सर्वश्रेष्ठ एवं सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली कविता मानी जाती है। 

12. 'गुनाहों का देवता'- धर्मवीर भारती 

12. 'गुनाहों का देवता'- धर्मवीर भारती 
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'गुनाहों के देवता' को एक रोमांटिक उपन्यास भी कहा जा सकता है। इसके मुख्य किरदार बचपन से एक-दूसरे से प्रेम करते हैं। मगर किसी कारणवश उनकी शादी नहीं हो पाती है।

11. 'रश्मिरथी'- रामधारी सिंह दिनकर 

11. 'रश्मिरथी'- रामधारी सिंह दिनकर 
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'रश्मिरथी' एक काव्य संग्रह है जो कि 'महाभारत' पर आधारित है। इसमें कुंती के पुत्र कर्ण को मुख्य किरदार के रूप में दर्शाया गया है।

10. 'यामा'- महादेवी वर्मा 

10. 'यामा'- महादेवी वर्मा 
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हिंदी साहित्य के छायावाद दौर के 4 प्रमुख स्तंभों में से एक, कवियत्री महादेवी वर्मा की यह रचना कविताओं का एक ऐसा संग्रह है जिसमें उन्होनें एक पिछड़ी हुई कम उम्र की लड़की की कहानी बताई है।

9. 'निर्मला'- मुंशी प्रेमचंद 

9. 'निर्मला'- मुंशी प्रेमचंद 
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'निर्मला' में मुंशी प्रेमचंद ने भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति को चित्रित किया है। यह कहानी है एक ऐसी लड़की की जिसकी शादी तलाकशुदा पुरुष से की जाती है।

8. 'राग दरबारी'- श्रीलाल शुक्ल 

8. 'राग दरबारी'- श्रीलाल शुक्ल 
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'राग दरबारी' आधुनिक भारत के सबसे सशक्त उपन्यासों में से एक है। इनमें लेखक श्रीलाल शुक्ल ने बड़े ही प्रभावी ढंग से आजादी के बाद के भारत को चित्रांकित किया है। 

7. 'कितने पाकिस्तान'- कमलेश्वर 

7. 'कितने पाकिस्तान'- कमलेश्वर 
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हिंदी लेखक कमलेश्वर को 2003 में 'कितने पाकिस्तान' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इस किताब में कमलेश्वर ने एक काल्पनिक न्यायालय में  ऐतिहासिक किरदारों को कटघरे में खड़ा कर सवाल पूछे हैं। यह किताब हर किसी के पढ़ने योग्य है।

6. 'उर्वशी'- रामधारी सिंह दिनकर 

6. 'उर्वशी'- रामधारी सिंह दिनकर 
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रामधारी सिंह दिनकर की 'उर्वशी' के बारे में सिर्फ एक ही वाक्य कहा जा सकता है कि,''यह किताब साहित्य में फूलों की एक खूबसूरत माला की तरह है।" 

5. 'कामायनी'- जयशंकर प्रसाद

5. 'कामायनी'- जयशंकर प्रसाद
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'कामायनी' का नाम कविता के क्षेत्र में काफी अच्छी तरह से स्थापित है। इसे हिन्दी के महान कवि जयशंकर प्रसाद की अमर कृतियों में शामिल किया जाता है। इस कविता को 19वीं सदी के अंत से 20वीं सदी तक प्रसिद्धि मिली है।

4. 'मैला आँचल'- फणीश्वरनाथ रेणु 

4. 'मैला आँचल'- फणीश्वरनाथ रेणु 
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फणीश्वरनाथ रेणु के द्वारा लिखी गई यह कृति हिन्दी की श्रेष्ठ कृतियों में शुमार है। यह लेखक की पहली रचना ही थी। मगर इसकी क्षेत्रीय भाषा एवं सादगी ने इसे एक अद्वितीय रचना का दर्जा दिला दिया है। 

3. 'वोल्गा से गंगा' - राहुल सांकृतायन

3. 'वोल्गा से गंगा' - राहुल सांकृतायन
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राहुल सांकृतायन की लिखी इस किताब में आर्यों से जुड़ी 20 लघु कथाएं प्रकाशित की गई हैं। इस किताब में समाहित कथाएं असल जीवन में काफी कुछ सिखाने वाली हैं। 'वोल्गा से गंगा' को कई अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी अनुवादित कर प्रकाशित किया जा चुका है।

2. 'मधुशाला'- हरिवंशराय बच्चन 

2. 'मधुशाला'- हरिवंशराय बच्चन 
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यह महान हिंदी कवि एवं लेखक हरिवंशराय बच्चन की 135 कविताओं का बड़ा ही खूबसूरत संग्रह है। इसे हिंदी साहित्य में एक अहम योगदान के रूप में देखा जाता है। यह किताब दरअसल 3 किताबों के समूह का एक हिस्सा है। इस समूह की अन्य 2 किताबें हैं 'मधुबाला' एवं 'मधुकलश'।

1. 'गोदान'- मुंशी प्रेमचंद 

1. 'गोदान'- मुंशी प्रेमचंद 
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हिन्दी जगत के सबसे महान उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद के द्वारा 1956 में लिखी गई 'गोदान' हिन्दी साहित्य की सर्वोत्तम कृति है। उपन्यास की कहानी को कई टीवी कार्यक्रमों एवं फिल्मों में प्रेरणा के तौर पर इस्तेमाल किया जा चुका है। इसकी कहानी एक गरीब परिवार एवं उनकी जिंदगी में 'गाय' महत्ता के इर्द-गिर्द घूमती है।

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