मज़े मत ले, इंजीनियर हूँ भाई

अगर आपने भी की है इंजीनियरिंग तो इन बातों को आपसे बेहतर कोई नहीं समझेगा। 

मज़े मत ले, इंजीनियर हूँ भाई
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35 की है चिंता और बैक-लॉग का है डर,

बाकी सब फर्स्ट क्लास, क्यूंकी हम हैं "Engineer"

इतनी फटी हुई लाइन्स लिखने के लिए माँफी लेकिन जब इंजीनियरिंग झेल ली तो ये लाइन्स क्या चीज़ हैं। ख़ैर तो मैं बता रही थी कि जब भी कोई कहता है कि इंजीनियरिंग करनी है, मोहल्ले कि एक आंटी कि आवाज़ ना चाहते हुए भी कानों से टकरा ही जाती है "ओह क्या करोगे बेटा इंजीनियर बनके, नौकरी तो है नहीं, मारे-मारे फिरते हैं, हर गली मोहल्ले।" 

दिल तो चाहता है कह दूँ- " जी आंटी बिल्कुल ठीक,ये जो मोबाइल, गाड़ियाँ, और बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी हैं, सब अपना राजू छोले वाला, ही तो बनाता है।" ख़ैर अगर आप इंजीनियर हैं तो लिखी हुई इन बातों में अपने आप को ज़रूर ढूंढ पाएंगे और अगर आप इंजीनियर नहीं भी हैं तो मज़ा ज़रूर आएगा आपको पढ़ कर- 

सिर्फ इंजीनियर ही जानता है कि वो कुछ नहीं जानता। 

सिर्फ इंजीनियर ही जानता है कि वो कुछ नहीं जानता। 

4 साल का कॉलेज करके, हॉस्टल की जली हुई रोटियाँ खाकर, ब्रेक-अप के बाद दारू चढ़ाकर, एग्ज़ाम की पहली रात जागकर, 5 यूनिट के नाम याद करके अगर आप किसी कॉलेज के स्टूडेंट से कोई तकनिकी सवाल कर लें तो मैं 95% गारंटी देती हूँ के जवाब आपको ऐसा मिलेगा कि आपके भी कॉन्सेप्ट हिल जाएंगे। क्यूँकि एक इंजिनियर ही जनता है कि वो कुछ नहीं जनता लेकिन अगर बता नहीं सकते तो कंफ्यूज़ तो कर सकते हैं ना। 

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35 आ जाएंगे, निकल गया मैं तो भाई। 

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एग्जाम हॉल से निकल कर किसको पड़ी है पेपर कैसा गया, सबका सवाल एक ही रहता है "भाई निकल रहा है क्या?" और अगर 35 नंबर पक्के हैं तो भाई बोतलें खुलेंगी, बोतलें...हा हा हा।

अबे उधर देख, जन्नत है जन्नत। 

अबे उधर देख, जन्नत है जन्नत। 

"भाई वो देख BMW, अबे राईट पे देख Audi है भाई " अगर आप इन्हें गाड़ियों के नाम समझ रहे हैं तो आप ग़लत हैं। कोई ठीक-ठाक लड़की गुज़री नहीं कि code-word  शुरू हो जाते हैं। और ऐसा सिर्फ लड़के ही नहीं करते हम लड़कियों के भी code-word कुछ कम ख़ास नहीं हैं जैसे- "बेहेन पिंक कलर अच्छा लग रहा, नहीं बेहेन ब्लैक अच्छा है " 

Ctrl "X", Ctrl "C", और मिशन पूरा  Ctrl "V"

Ctrl

"भाई अगर कहीं नौकरी ना लगी तो अपन भी एक फोटोकॉपी की दुकान खोल लेंगे कॉलेज के बाहर।" इंजीनियरिंग के 4 सालों में ऐसा विचार हर इंजीनियर को आता ही है। और तो और cut,copy, paste तो बनाए ही सिर्फ इंजिनियर के लिए गए हो जैसे। 

जब कोई पूछ बैठे " इंजीनियरिंग क्यूँ ?" 

जब कोई पूछ बैठे
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कॉलेज के बड़े से ऑडिटोरियम में एक अधेङ उम्र का आदमीं, अक्सर जिसके सर पर थोड़े कम बाल होते हैं, अपने भाषण के दौरान पूछता है "आपने इंजीनियरिंग क्यूँ चुना?" और वहां से ही शुरू हो जाती है जंग, पता तो कुछ होता नहीं लेकिन आंसर ऐसे के दुनियाँ हिला देंगे...सही है ना।  

पार्टी करना है, हम पार्टी करेंगे, किस के भी पप्पा से नहीं डरेंगे।

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वैसे आप समझ गए होंगे कि ये महज़ गाने की लाइन्स नहीं हैं, लेकिन वास्तविकता भी यही है, कि अगर आप इंजीनियरिंग के छात्र हैं तो अचानक आप अपने आपको किसी भी पार्टी में पा सकते हैं, बिना वजह जाने कि पार्टी क्युँ रखी गई है और किसने रखी है। और एक और बात, जब खाने से बहुत ज़्यादा त्रस्त हो गए होंगे तो किसी शादी में बिन बुलाए मेहमान बनके, तो गए ही होंगे..हा हा हा...

ऐ इंजीनियरिंग तेरा शुक्रिया, जीना सिख दिया तूने। 

ऐ इंजीनियरिंग तेरा शुक्रिया, जीना सिख दिया तूने। 
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या तो आप एक अच्छी सी नौकरी पाकर जीवन के आनंद ले रहे होंगे या आप भले ही जीवन में एक क़ामयाब इंजीनियर न बन पाए हो लेकिन इन चार सालों में आप अपने आप से तो परिचित हो ही जाते हैं कि आप ज़िन्दगी से क्या चाहते हैं। कई ऐसे उदहारण है जिन्होंने इंजीनियरिंग को एक नई उड़ान दी और कई ऐसे भी हैं जिन्होंने इंजीनियरिंग के दौरान खुद को जाना और अपने हुनर को पहचान दी, जैसे कुमार विश्वास को सुना ही होगा हि होगा आपने, "कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है...।"