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आखिर क्यों करवाया जाता है बच्चों का मुंडन?

बच्चों के मुंडन के पीछे का कारण। 

आखिर क्यों करवाया जाता है बच्चों का मुंडन?
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भारत देश में हर इंसान जीवन से लेकर मृत्यु तक हजारों परंपरा निभाता है। किसी के घर अगर बच्चा पैदा होता है तो एक पंडित जी आकर उसकी कुंडली तैयार करते हैं और बच्चे के जीवन के बारे में बताते हैं। इन सब परंपराओं में से एक परंपरा है मुंडन की। आखिर क्या कारण है कि हिन्दू मुंडन संस्कार को इतना महत्व देते हैं। 

आज आपको बताते हैं कि जन्म के बाद बच्चों का मुंडन क्यों कराया जाता है। जानिये  इस परंपरा के पीछे क्या राज है। 

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कब कराया जाता है मुंडन?

कब कराया जाता है मुंडन?

हिन्दू धर्म में मुंडन का एक अलग ही महत्व है। बच्चे के पैदा होने के बाद उनका मुंडन करवाया जाता है और किसी नजदीकी रिश्तेदार की मृत्यु होने पर भी मुंडन का रिवाज है। 

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बहुत लोगों को नही है मालूम 

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बहुत से लोगों को ये नही मालूम कि मुंडन क्यों करवाया जाता है। कुछ लोग अपने बच्चों का मुंडन सिर्फ इसलिए करवाते हैं क्योंकि वे बस इस परंपरा को बहुत समय से देखते आ रहे हैं।

क्यों करवाया जाता है मुंडन ?

क्यों करवाया जाता है मुंडन ?
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बच्चों का मुंडन इसलिए करवाया जाता है कि बच्चा जब माँ के गर्भ में होता है तो उसके सिर के बालों पर काफी कीटाणु,बैक्टीरिया और जीवाणु लगे होते हैं। जो बच्चे को नहलाने से नही निकल पाते इसलिए 1 साल के अंदर बच्चे का मुंडन जरूर करवाया जाता है। 

बच्चे की उम्र 5 साल होने पर 

बच्चे की उम्र 5 साल होने पर 
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बच्चा जब 5 साल का हो जाता है तो उसके सर के बाल उतारे जातें हैं और एक यज्ञ किया जाता है जिसे मुंडन संस्कार कहा जाता है। इस से बच्चे का सिर मजबूत होता है और बुद्धि तेज होती है। 

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मृत्यु के बाद 

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जब किसी नजदीकी रिश्तेदार की मृत्यु हो जाती है तो भी मुंडन करवाया जाता है। जब पार्थिव देह को जलाया जाता है तो उसमे भी कुछ हानिकारक जीवाणु होते हैं। जो हमारे शरीर पर चिपक जाते हैं। सिर में चिपके जीवाणुओं को निकालने के लिए मुंडन करवाया जाता है। 

चोटी रखने का महत्व 

चोटी रखने का महत्व 
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मुंडन के बाद चोटी रखने का वैज्ञानिक महत्व है। सिर में सहस्र स्थान पर चोटी रखी जाती है। यह मस्तिष्क का केंद्र होता है। विज्ञान के अनुसार यह शरीर के अंगों, बुद्धि और मन को नियंत्रित करता है। 

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