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एक भारतीय ऑटो चालक की कहानी हुई 'ऑस्कर' में शामिल 

तमिल फ़िल्म "विसरनाई" को ऑस्कर तक ले जाने के पीछे है यह चेहरा।

एक भारतीय ऑटो चालक की कहानी हुई 'ऑस्कर' में शामिल 
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ऑस्कर में शामिल की जाने वाली तमिल फ़िल्म "विसरनाई" को दुनिया भर में काफ़ी प्रशंसा मिली और साथ ही साथ पुलिस द्वारा की गई कड़ी आलोचना से भी गुज़रना पड़ा। निर्माता धनुष और निर्देशक वेत्रीमारन के द्वारा बनी यह फ़िल्म,कोयम्बटूर के एक ऑटो चालक एम.चंद्रकुमार की नॉवेल "लॉक अप" पर आधारित है। 

2015 के नेशनल फिल्म अवॉर्ड में 'विसरनाई' को बेस्ट तमिल फिल्म समेत 3 अवॉर्ड्स मिल चुके हैं। 2006 में इस नॉवेल को बेस्ट डॉक्युमेंट ऑफ ह्यूमन राइट्स का अवॉर्ड भी मिल चुका है। इस फिल्म में पुलिस द्वारा की गई प्रताड़ना को दर्शाया गया है, फ़िल्म का काफी हिस्सा सत्य घटनाओं पर आधारित है। 

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ऑस्कर में बनाई जगह 

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यह फिल्म लॉस एंजिलिस में होने वाले 89वें एकेडमी अवॉर्ड में 'फॉरेन लैंग्वेज फिल्म' कैटेगरी में दिखाई जाने वाली है।

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सत्य घटना पर है आधारित 

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सन 1983 में कुमार को अपने तीन और मित्रों के साथ शक के आधार पर पुलिस हिरासत में लिया गया था। इस फिल्म में पंडी, मुरुगन, अफ़ज़ल और कुमार चार मजदूरों की कहानी है,जिन्हें पुलिस प्रताड़ना से गुज़रना पड़ा। कुमार के अनुसार उन्हें सिर्फ़ शक की बुनियाद पर पुलिस की प्रताड़ना सहनी पड़ी थी। 

इस फिल्म ने, इंसाफ के नाम पर होने वाले अत्याचारों पर प्रकाश डाला है। 

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यह फ़िल्म कुमार की आप बीती है और पुलिस अधिकारियों ने इसकी कड़ी निंदा की है। 

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'विसरनाई' बेस्ट एडिटिंग के लिए राष्ट्रिय फ़िल्म  पुरस्कार भी अपने नाम कर चुकी है। 

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यह लगातार तीसरी बार है कि भारत की तरफ से कोई हिंदी मूवी ऑस्कर में नहीं भेजी गई। 

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इससे पहले "कोर्ट" जो कि एक मराठी मूवी है, ऑस्कर में शामिल की गई थी। 

यह कहानी को ऑस्कर तक पहुँचाने वाला चेहरा.. 

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यह हैं एम.चन्द्रकुमार जिन्होंने साढ़े पाँच महीने जेल में बिताने के बाद यह नॉवेल लिखी थी। अब यह फ़िल्म फरवरी 2017  में होने वाले ऑस्कर में अपना नाम दर्ज कर चुकी है। 

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