मैं नादान थी जो छोड़कर चली गई, अब लौटकर आना चाहती हूँ

यह खत पढ़ते हुए आपकी आँखों में आंसू छलक जाएंगे। 

मैं नादान थी जो छोड़कर चली गई, अब लौटकर आना चाहती हूँ
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सामने हो तब हम कभी कुछ कह नहीं पाते हैं,

यह अपने दूर चले जाने पर बहुत याद आते हैं।।

हम जिन्हें प्यार करते हैं उनसे दूर जाना बहुत तकलीफ देता है। हमारे माँ-बाप, भाई-बहन हमसे इस तरह जुड़े होते हैं कि हम चाहकर भी खुद को इनसे जुदा नहीं कर सकते। फिर जब कभी हम नाराज़गी में ही सही, इनसे दूर चले जाते हैं तो इन्हें बहुत याद करते हैं।

यह एक ऐसी लड़की का खत है जो अपनों से दूर चली गई है और अब लौटकर आना चाहती है।

सबसे बहुत सारी बातें करनी हैं 

सबसे बहुत सारी बातें करनी हैं 

माँ... पापा... मुझे आपसे ढेर सारी बातें करनी हैं। आपसे माफ़ी भी मांगनी है कि बिना कुछ बताए आपको छोड़कर इतनी दूर आ गई। मैं आपके पास लौटकर वापस आना चाहती हूँ ।

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माँ तू बहुत याद आती है

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माँ मुझे तेरी बहुत याद आती है। तेरे हाथ का खाना, तेरी प्यारी सी डांट, तेरा गलती करने पर टोकना, थक कर घर आने पर त सर की मालिश करना। माँ यहाँ कोई नहीं बताता क्या गलत, क्या सही। कोई गरम-गरम खाना भी नहीं खिलाता।

पापा आपके बगैर कैसे रहूँ मैं

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पापा... आपसे मैं क्या बोलूं? मुझे लगता था मैं आपके बगैर नहीं रह सकती और सच में, आपसे इतनी दूर मैं नहीं रह पा रही हूँ।पापा, मुझे आपको गले लगाना है। आपकी गोद में सिर रखकर सोना है। मुझे यहाँ बहुत डर लगता है। मुझे आपके पास आना है, ताकि मुझे कोई न डरा सके।

मेरी बहन मुझे माफ़ कर दे

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बिन्नी, मेरी प्यारी बहन, हम तो हमेशा एक दूसरे का साथ देते थे न? और अब देख मैं तुझे छोड़कर इतनी दूर चली आई । मैं वापस आई तो तू मुझे माफ़ तो कर देगी न? तुझे पता है मेरा फेवरेट ब्लैक टॉप मुझसे ज्यादा तुझ पर अच्छा लगता है। मैं तो बस चिढ़ाने के लिए वह तुझे नहीं देती। मुझे आकर तुझसे छोटी-छोटी बातों पर बहस करना है, और फिर उन झगड़ों पर हँसकर तुझे गले लगाना है।

भाई कोई तंग नहीं करता अब

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बिट्टू मेरे नन्हें से भाई, तुझे बहुत गुस्सा आता था न जब भी मैं तुझे डांट लगाती थी। अब कोई इस तरह तुझे तंग नही करता होगा। पर यार मैं बहुत प्यार करती हूँ तुझसे। मुझे तेरे पास आकर, तुझे बताना है कि तू वर्ल्ड का बेस्ट भाई है।


मैं खुद से ही नाराज़ हूँ

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मुझे पता है कि आप सब मुझसे नाराज़ हो और बहुत गुस्सा भी। मैं आपको बिना कुछ बताए इतनी दूर चली आई। मैं भी नाराज़ हूँ, खुद से, बहुत ज्यादा, सबसे ज्यादा।

अकेली हो गई हूँ मैं

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मैं बहुत अकेली हूँ यहाँ। बहुत घुटन होती है। कोई दोस्त नहीं है कोई अपना भी नहीं है। बस मैं ही हूँ। आपको तो पता है न मैं कहाँ हूँ तो आ जाओ ना लेने। प्लीज!

नहीं आ सकती मैं लौटकर

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मुझे पता है मैं कितना भी बोलूं आप नहीं आओगे। कोई नहीं आएगा।क्योंकि मैं बिना सोचे समझे जहाँ आ गई हूँ वहां से कोई लौटकर वापस नहीं आता, मैं भी नहीं आ सकती। कभी भी नहीं।

काश मैं आ पाती

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क्या यह खत पढ़कर आपकी आँखें भी नम हो गई?