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इन लोगों से सीखो असल में ज़िन्दगी क्या कहती है

ज़िन्दगी के असल मायने बताती यह कहानी। 

इन लोगों से सीखो असल में ज़िन्दगी क्या कहती है
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इस दुनिया में रोज़ लाखों लोग पैदा होते हैं। रोज़ लाखों लोग मरते हैं। मगर दुनिया में चंद ही लोग अपना नाम अपनी पहचान बना पाते हैं। वो लोग कोई नया काम नहीं करते। हाँ, मगर वो हर काम को अलग ढंग से करना जानते हैं। किसी महान इंसान नें कहा है कि ज़िंदगी जीने के लिए तो सभी जीते हैं, अगर हमेशा ज़िंदा रहना चाहते हो तो मरने के बाद के लिए जियो। आज जिन 10 लोगों के बारे में हम बता रहे हैं वे ज़िंदा रहने के लिए नहीं मरने के बाद के लिए जिए हैं।

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1. जेसिका कॉक्स 

1. जेसिका कॉक्स 

यह प्लेन हाथों से नहीं हौसलों से उड़ाती हैं। बिना हाथों वाली वह दुनिया की पहली पायलट है, जो हाथों से नहीं, पैरों से प्लेन उड़ाती हैं। लेकिन यह कमजोरी ही उनकी ताकत बनी। आज जेसिका वो सभी काम कर सकती हैं और करती हैं, जो आम लोग भी नहीं कर पाते। उनके पास 'नो रेस्ट्रिक्शन' ड्राइविंग लाइसेंस हैं। जिस विमान को जेसिका उड़ाती है उसका नाम 'ऐयरकूप' है। जेसिका के पास 89 घंटे विमान उड़ाने का एक्सपीरियंस है।

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2. स्मीनू जिंदल 

2. स्मीनू जिंदल 
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एक एक्सीडेंट ने उनके पैर छीने मगर वह हादसा उन्हें उड़ने से नहीं रोक पाया, जिंदल फैमिली की स्मीनू उन दिव्यांगों के लिए आदर्श हैं जो जिंदगी अपनी तरह से जीना चाहते हैं। स्मीनू ने अपनी विकलांगता को अवसर माना और अपनी ऐसी पहचान बनाई कि आज उनकी व्हीलचेयर खुद को लाचार समझती है। आज स्मीनू जिंदल ग्रुप की कंपनी जिंदल सॉ लिमिटेड की एमडी हैं। उनका 'स्वयं' का एनजीओ भी है। स्मीनू जब 11 साल की थीं, तब जयपुर के महारानी गायत्री देवी स्कूल में पढ़ती थीं। छुट्टियों में दिल्ली वापस आ रही थीं, तभी कार एक्सीडेंट हुआ और वह गंभीर स्पाइनल इंजरी की शिकार हो गई। हादसे के बाद उनके पैरों ने काम करना बंद कर दिया और व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा।

3. ली जुहोंग

3. ली जुहोंग
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बचपन में पैर छिन गए, मगर वह रुकी नहीं, फिर भी डॉक्टर बनीं, अब इलाज करने रोज करती हैं पहाड़ पार।  चीन के चांगक्वींग की रहने वाली ली जुहोंग जब 4 साल की थीं तो एक रोड एक्सीडेंट में दोनों पैर गंवाने पड़े। बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पढ़ाई पूरी की और डॉक्टर बन कर आज पहाड़ी गांव में क्लीनिक खोलकर लोगों की सेवा कर रही हैं।

4. मुस्कान अहिरवार

4. मुस्कान अहिरवार
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कुछ बड़ा करना हो तब उम्र नहीं ज़ज्बा देखा जाता है। भोपाल में एक 9 साल की बच्ची मुस्कान अहिरवार गरीब बच्चों के लिए 'बाल पुस्तकालय' नाम से एक लाइब्रेरी चलाती हैं। तीसरी क्लास में पढ़ने वाली मुस्कान के पास फिलहाल 119 किताबें हैं। मुस्कान रोज़ाना इस लाइब्रेरी में बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। भोपाल के अरेरा हिल्स के पास बने स्लम एरिया में रहने वाली मुस्कान की मां हाउस वाइफ हैं और पिता बढ़ई। मुस्कान की बड़ी बहन 7वीं में पढ़ती हैं। लाइब्रेरी के लिए मुस्कान हर दिन 4 बजे शाम में स्कूल से घर आती हैं। फिर उसके बाद अपने घर के बाहर किताबें सजाती हैं और कहानियां सुनाकर बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।

5. रेखा 

5. रेखा 
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पति की असमय मौत के बाद मुरैना के जलालपुरा गाँव की एक महिला ने खेत में खुद हल चलाकर नेशनल रिकॉर्ड बना दिया। उसे समाज के लोग विधवा कहकर घर पर बैठने की हिदायत दे रहे थे लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी। आज रेखा अपने खेत में आधुनिक तौर-तरीके से खेती करती हैं और पैदावार भी काफी बढ़ा ली। महज 1 हेक्टेयर के खेत में 50 क्विंटल बाजरा पैदा कर नया रिकॉर्ड बनाया, क्योंकि अब तक नेशनल एवरेज 15 क्विंटल था।

6. रोमन सैनी 

6. रोमन सैनी 

राजस्थान के रोमन सैनी यूं तो IAS सिलेक्ट हुए थे, लेकिन गरीब बच्चों को पढ़ाने की इच्छा ने उन्हें लाल बत्ती में बैठने न दिया। ट्रेनिंग के दौरान मप्र के जबलपुर में सहायक कलेक्टर पदस्थ रहे रोमन ने इस्तीफा दे दिया और अब वे दिल्ली में गरीब व मध्यमवर्गीय बच्चों को पढ़ा रहे हैं। 2014 बैच के आईएएस रोमन राजस्थान के रायकरनपुरा गांव निवासी हैं और महज 23 साल के हैं।

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7. रंगोली 

7. रंगोली 
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कंगना रनौत को सब जानते हैं, लेकिन हाल ही में दुनिया उनकी बहन रंगोली से मिली। रंगोली 2006 में एसिड अटैक की शिकार हुईं, जिसके बाद उनकी एक-दो नहीं, 57 बार सर्जरी हुई। मंगेतर छोड़ गया, तीन महीने तक आईना नहीं देखा। बावजूद इसके रंगोली ने हिम्मत नहीं हारी और अब वह एक फेमस वुमन्स मैगजीन के कवर पर कंगना के साथ दिखेंगी। जिंदगी को फिर से जीने की ज़िद ही उन्हें यहां तक लेकर आई है।- रंगोली की आंखकी 90% रोशनी चली गई है। उनका ब्रेस्ट खराब हो चुका है। मगर ज़िद से ही वह आसमान छू रही हैं।

8. पहड़ा राजा सिमोन उरांव   

8. पहड़ा राजा सिमोन उरांव   
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दिखने में तो सामान्य है वह, मगर जिद ऐसी कि बना दिए तीन बांध, बदल दी 5 गांवों की किस्मत आप दशरथ मांझी के बारे में तो जानते ही होंगे। झारखंड में भी ऐसा ही कुछ हुआ। यहां एक व्यक्ति ने छोटी-छोटी नहरों को मिलाकर तीन बांध बना डाले। आज इन्हीं बांधों से करीब 5000 फीट लंबी नहर निकालकर खेतों तक पानी पहुंचाया जा रहा है। मैं बात कर रहा हूँ इसी साल पद्मश्री पाने वाले 83 वर्षीय पहड़ा राजा सिमोन उरांव की।

9. सुनील पटेल 

9. सुनील पटेल 
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जो लोग अक्सर कहते हैं हम अकेले क्या कर सकते हैं उनके सवालों का सुनील पटेल अकेला जवाब है।एक हादसे में निःशक्त होने के बाद 16 साल से बिस्तर पर ही जिंदगी गुजार रहे सुनील पटेल का हौसला आज भी काबिले-तारीफ है। सुनील बिस्तर पर लेटकर ही 10वीं और 12वीं के बच्चों को फ्री ट्यूशन दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के छोटे से विकासखंड नगरी के गांव सांकरा छिंदपारा में रहने वाले सुनील बीते 2 साल से गांव के बच्चों को ट्यूशन दे रहे हैं। वे कहते हैं, मैं खुश हूं कि ऐसा कर पा रहा हूं।  

10. चेन जिफेंग 

10. चेन जिफेंग 
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चेन जिफेंग के जन्म से ही हाथ नहीं हैं। उसके पेरेंट्स इस बात से परेशान थे कि वह आगे कैसे बढ़ेगा। लेकिन चेन आज सक्सेसफुल ई-कॉमर्स वेबसाइट का मालिक है और उसकी कमाई लाखों में हो रही है। यह सब उसके पैरों की उंगलियों का कमाल है। चीन में हुबेई प्रॉविन्स के बोडोंग काउंटी में 27 साल का चेन जिफेंग अपनी फैमिली के साथ रहते हैं।

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