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जानें क्यों अजीत डोभाल हैं देश के सबसे बड़े जासूस 

देश के सबसे बड़े जासूस का दिमाग है इस सबसे बड़े हमले में। 

जानें क्यों अजीत डोभाल हैं देश के सबसे बड़े जासूस 
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1. 1968 बैच आईएएस ऑफिसर, 1972 इंटेलिजेंस ब्यूरो

1. 1968 बैच आईएएस ऑफिसर, 1972 इंटेलिजेंस ब्यूरो

1945 में जन्में अजीत डोभाल, 23 साल की उम्र में आईएएस ऑफिसर बन गए। नियुक्ति के 4 साल बाद ही डोभाल इंटेलीजेंस ब्यूरों से जुड़ गए। पूरे करियर में डोभाल ने ज्यादातर समय खुफिया विभागों में बतौर जासूस बिताया है यानि रियल 'जेम्स बॉन्ड'।

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2. कीर्ति चक्र से सम्मानित, 1988

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अजीत डोभाल पहले ऐसे पुलिस अधिकारी हैं जिन्हें भारत के सर्वोच्च शांतिकाल वीरता पुरस्कार सैन्य कीर्ति चक्र से नवाजा गया है। साथ ही डोभाल सबसे कम उम्र में पुलिस पदक पाने वाले अधिकारी हैं।

3. 2005 में रिटायर, 2014 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार

3. 2005 में रिटायर, 2014 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
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डोभाल 2005 में बतौर आईबी निदेशक पद से रिटायर हुए। इसके बाद ये देश का सबसे बड़ा जासूस 31 मई 2014 को देश का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बना।

4. 7 साल पाकिस्तान में बतौर जासूस रहे

4. 7 साल पाकिस्तान में बतौर जासूस रहे
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देश की सबसे बड़ी इंटेलीजेंस एजेंसी रॉ के अंडरकवर एंजेट के तौर पर डोभाल 7 साल पाकिस्तान में रहे। बताया जाता है कि लाहौर में वो पाकिस्तानी मुस्लिम के तौर पर रहते थे। जो कि नाई का काम करता था! है ना, रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी!

5. मिजो नेशनल फ्रंट के उग्रवाद पर कामयाबी

5. मिजो नेशनल फ्रंट के उग्रवाद पर कामयाबी
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1980 के दशक में एक समय ऐसा था, जब लालडेंगा की अगुवाई में मिजो नेशनल फ्रंट का उग्रवाद चरम पर था। और ऐसे में इससे निजात दिलाने की जिम्मेदारी डोभाल को सौंपी गई। डोभाल ने फ्रंट के 7 में से 6 कमांडरों को अपने साथ मिला लिया।

6. ऑपरेशन ब्लू स्टार के हीरो

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अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में हुए आतंकी हमले के जवाब में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार में डोभाल ने बड़ी भूमिका निभाई। डोभाल रिक्शा वाले बनकर मंदिर के अंदर गए और आतंकियों से पूरी जानकारी हासिल की और सेना को दी। इसे कहते हैं असल जिंदगी का सुपरहीरो।

7. ऑपरेशन ब्लैक थंडर, 1999

7. ऑपरेशन ब्लैक थंडर, 1999
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कंधार प्लैन हाइजैक की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था, आतंकियों से बातचीत होनी थी तब तत्कालीन सरकार ने डोभाल पर पूरा भरोसा दिखाया और डोभाल आतंकियों से बात करने वाले मुख्य वार्ताकार के तौर पर गए।

8. मणिपुर सर्जिकल अटैक, 2015

8. मणिपुर सर्जिकल अटैक, 2015
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साल 2015 में नॉर्थ ईस्ट में उग्रवाद चरम पर था। मणिपुर में आर्मी काफिले पर हमला हुआ और कई जवान शहीद हुए। इसका बदला लेने की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी डोभाल को दी गई। फिर सेना ने म्यांमार की सीमा में घुसकर कई उग्रवादियों को खत्म कर दिया। इस पूरे ऑपरेशन के रणनीतिकार थे 'जेम्स बॉन्ड' अजीत डोभाल।

9. एलओसी सर्जिकल स्ट्राइक, 2016

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18 सितंबर को जम्मू कश्मीर के उरी बेस कैंप में आतंकी हमला हुआ, जिसमें 18 जवान शहीद हो गए। इस हमले का बदला लेने की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी भी डोभाल को दी गई। और महज 10 दिन बाद ही सेना ने आधी रात में सर्जिकल स्ट्राइक कर करीब 40 आतंकियों को मार गिराया, सात आतंकी कैंपों को तहस नहस कर दिया।

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