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मेडिकल साइंस भी है हैरान, 5 फ़ीट की महिला तीसरे बेटे को जन्म देने के बाद हो गई 3 फ़ीट की

60 साल की महिला तीसरे बेटे को जन्म देने के बाद 2 फ़ीट सिकुड़ गई। 

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60 5 - 5 2 3 , -

शांति देवी ने कहा उब चुकी हूँ मैं 

शांति देवी ने कहा उब चुकी हूँ मैं 

शान्ति देवी लगभग दो दशक से इसी तरह खटिया पर लेटी हुई है, वह अपने हाथों को खोल नहीं सकती पैरों को फैला नहीं सकती यहाँ तक की छोटी से छोटी बातों के लिए भी उन्हें अपने बेटों का सहारा लेना पड़ता है। जब शांति देवी से बात की तो उन्होंने कहा "मैं 25 सालों से ऐसे ही खटिया पर लेटी हूँ, मैं उब चुकी हूँ ऐसी जिंदगी से। मैं अपने दम पर कुछ नहीं कर सकती। मुझे अपने दोस्तों, अपने खेत, नदियों की बहुत याद आती है।"

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यह सब शुरू हुआ तीसरे बच्चे को जन्म देने के बाद 

यह सब शुरू हुआ तीसरे बच्चे को जन्म देने के बाद 
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यह सब उनके तीसरे बच्चे के पैदा होने के बाद हुआ। उनके पति गंगाचरण कुशवाह का कहना है वह "शादी के बाद 35 सालों तक एक स्वस्थ्य और हष्ट पुष्ट महिला थी। समस्या बस तीसरे बेटे को जन्म देने के बाद आई वह बेटे के जन्म के बाद कमजोर हो गई।"

तीन महीने बाद दर्द होने लगा 

तीन महीने बाद दर्द होने लगा 
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तीन महीने बाद उन्होंने अपनी हड्डियों में दर्द होने की शिकायत की और कुछ ही दिनों में उनके शरीर में भी अज़ीब किस्म का बदलाव आने लगा।

दूर-दूर से आते हैं लोग देखने के लिए 

दूर-दूर से आते हैं लोग देखने के लिए 
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उनकी इस दयनीय हालत ने उनके परिवार वालों को व्यथित करके रखा है। मगर उत्तर प्रदेश के कानपुर गाँव वालों के लिए वह एक आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। दूर-दूर से लोग उसको एक झलक देखने के लिए उसकी छोटी सी झोपड़ी में आते हैं।

नहीं दिखाया किसी डॉक्टर को 

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एक दशक से शांति देवी किसी डॉक्टर के पास नहीं गई शांति देवी के घर वालों के लिए उनकी यह हालत एक रहस्य है।  लेकिन एक स्थानीय डॉक्टर पंकज श्रीवास्तव के अनुसार यह लक्षण भंगुर हड्डी रोग के हैं।  

यह एक अनुवांशिक बीमारी है 

यह एक अनुवांशिक बीमारी है 
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डॉक्टर पंकज के अनुसार "मैं बिना जांच के तो कुछ भी नहीं कह सकता लेकिन देखने में यह एक अनुवांशिक बीमारी लग रही है, जहाँ हड्डी कमजोर हो जाती है और आसानी से सिकुड़ जाती है। लेकिन जब तक जांच न हो जाए कुछ भी कहना गलत होगा।"

यह सच मुच में एक चमत्कार है 

यह सच मुच में एक चमत्कार है 

यह सच मुच एक चमत्कार है। कई बार प्रकृति हमारे इस झूठे तकनीकी ज्ञान के गुरुर को मिट्टी में मिला कर हमारे सामने एक ऐसा सवाल खड़ा कर देती है जिसका जवाब हम सदियों तक नहीं दे पाते।

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