Movie Review: फ़िल्म 'अन्ना' ने उड़ाई बायोपिक की धज्जियाँ

सुन-सान थिएटर में गूँजा फिल्म अन्ना का आन्दोलन। 

Movie Review: फ़िल्म 'अन्ना' ने उड़ाई बायोपिक की धज्जियाँ
SPONSORED

आज के दिन की सुबह मेरे लिए काफी देश भक्ति से ओत-प्रोत रही, जब से सोया था तब से उठने तक मेरे होंठो पर इंकलाबी गाने ही थे। अब हो भी क्यों ना, अन्ना मूवी देखने जा रहा था, तो एक अलग ही जोश रगो में दौड़ रहा था, सुबह-सुबह 9:50 का पहला शो था तो 9:30 बजे मोबाइल में देश भक्ति के गानों पर ईयर फोन को कानों में लगा कर  थिएटर की ओर चल दिया।  थिएटर थोड़ी दुरी पर है इसलिए पहुंचने में 25 मिनट लग गए। मैं 5 मिनट लेट हो गया था सोचा अभी तक तो मूवी चालू हो गई होगी मगर जब मैं वहाँ पहुँचा तब....   

पूरा ख़ाली था थिएटर 

पूरा ख़ाली था थिएटर 

जब मैं थिएटर पहुँचा वहाँ मेरे सिवा कोई ओर नहीं था मैंने सोचा, हो सकता है सुबह का शो है थोड़ी देर से लोग आएं। थोड़ी ही देर में फिल्म भी चालु हो गई मगर कोई नहीं आया कुछ देर बाद एक जोड़ा आया जिनके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था, वह फिल्म देखने तो आये नहीं है। कुछ देर बाद दो लड़के आये जो कुछ ही देर में फिल्म से बोर हो कर कैंडी क्रश खेलने लग गए, अब मेरा तो काम था मूवी देखना इसलिए न चाहते हुए भी मुझे मूवी देखनी पड़ी। 

RELATED STORIES

परदे पर आ नहीं पाए अन्ना 

परदे पर आ नहीं पाए अन्ना 
via

अन्ना का किरदार निभा रहे कलाकार ने कोशिश तो बहुत की मगर वे अन्ना को रुपहले परदे पर ला नहीं पाए उनकी एक्टिंग से ज़्यादा फिल्म में उनकी कोशिश दिख रही थी।

किरण बेदी तो दिखी मगर अरविन्द नज़र नहीं आए 

किरण बेदी तो दिखी मगर अरविन्द नज़र नहीं आए 
via

जनलोकपाल के मंच पर फिल्म में सिर्फ अन्ना का कब्ज़ा था और एक किरण बेदी जैसी दिखने वाली महिला थी हालाँकि उनका भी उन्होंने परिचय नहीं कारवाया ऐसे में सवाल यह उठता है। क्या उनके राजनीति दल में शामिल होने से उनसे कन्नी काटी गई? या फिर दर्शकों से कुछ छुपाया गया?

होली जला कर मनाई दिवाली 

होली जला कर मनाई दिवाली 
via

फिल्म के एक सीन में अन्ना कहते हैं धूम-धाम से दिवाली मनाएँगे और दुसरे ही सीन में पुरे गाँव वाले होली जलाते हुए दिखते हैं और उसके बाद वाले सीन में फटाके फोड़ते हुए दिखते हैं समझ में नहीं आया आखिर मना क्या रहे थे।

पंजाब में दिखाए बर्फ के पहाड़

पंजाब में दिखाए बर्फ के पहाड़

अन्ना की पहली तैनाती पंजाब में हुई थी मगर फिल्म में सेना का पहला सीन बर्फ की पहाड़ियों का शूट किया गया, ऐसे  में समझ में नहीं आया यह उसी वक्त की बात थी या भर्ती होने के बाद की।

बारिश हो रही थी मगर लोग नहीं भीग रहे थे 

बारिश हो रही थी मगर लोग नहीं भीग रहे थे 

फिल्म में जन लोकपाल के दौरान बारिश होती हुई दिखाई गई। मगर इस बारिश में लोग भीग नहीं रहे थे, साफ़ दिख रहा था की वह नकली बारिश है। 

कम समय में बहुत कुछ बताना चाहती थी मूवी 

कम समय में बहुत कुछ बताना चाहती थी मूवी 

फिल्म बहुत कम समय में बहुत कुछ बताना चाहती थी शायद इसी लिए वह हर घटना को ठीक से बुन नहीं पाए, दर्शक एक घटना को ठिक से समझने की कोशिश करता इतने में फिल्म दूसरी घटना की ओर चली जाती।  

आराम से एसी में सोने के लिए जा सकते हो 

आराम से एसी में सोने के लिए जा सकते हो 

अगर आप आराम से एसी की हवा में सोना चाहते हो तो इस फिल्म से अच्छी कोई जगह नहीं है आप यहाँ जा कर आराम से सो सकते हैं यहाँ आपको कोई डिस्टर्ब भी नहीं करेगा क्योंकि थिएटर में आपके अलावा ज़्यादा कोई होंगे भी नहीं।