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मिलिए उस शख्स से जिसने 2 बार बेच दिया एफिल टॉवर को भी

पूरी दुनिया में ठगी की कई वारदातों को अंजाम देने वाले विक्टर की कहानी। 

मिलिए उस शख्स से जिसने 2 बार बेच दिया एफिल टॉवर को भी
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भारत में ताजमहल को भी बेच देने वाले महाठग मिथिलेश श्रीवास्तव उर्फ नटवरलाल को कौन नहीं जानता। हर सदी में ऐसे ठग पैदा नहीं होते जो किसी को भी चूना लगाने की कला जानते हों। ऐसा ही एक और महाठग है जिसने 20वीं सदी में पूरी दुनिया में ठगी के कुख्यात कारनामे किए, विक्टर लस्टिग।

बेहद स्मार्ट पर्सनालिटी और कई भाषाओं का जानकार था विक्टर, इसी प्रतिभा के बलबूते उसने कई विदेशी प्रयटकों, कारोबारियों को ठगा था। विक्टर ने एक बार नहीं बल्कि दो बार एफिल टॉवर को बेचकर पूरी दुनिया को चौंका दिया। आइए जानते हैं महाठग विक्टर लस्टिंग की पूरी कहानी। 

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1. ये है 'महाठग' विक्टर लस्टिग

1.	ये है 'महाठग' विक्टर लस्टिग

विक्टर लस्टिग को बचपन से ही स्मार्ट ट्रिक में महारत हासिल थी। कभी ताश के पत्तों से कमाल दिखाना तो कभी दूसरी ट्रिक के जरिए लोगों को बेवकूफ बनाना विक्टर की फितरत थी। युवा होने पर यही ट्रिक उसके अवैध कमाई का जरिया बन गई।

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2. क्रिमिनल रिकॉर्ड भी नहीं खोल पाए विक्टर का राज

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आपको जानकर हैरानी होगी कि विक्टर के 45 फर्जी नाम थे। जिनसे वो ठगी अंजाम देता था। जेल में एक इंटरव्यू के दौरान उसने बताया कि वो ऑस्ट्रिया-हंगरी के एक शहर हॉस्टिन में 1840 में पैदा हुआ था। लेकिन बाद में जब पुलिस ने विक्टर के शहर में जाकर पता किया तो हैरान करने वाली बात सामने आई, स्कूल रिकॉर्ड्स के मुताबिक वहां विक्टर नाम का कोई शख्स था ही नहीं।

3. विक्टर के माता-पिता गरीब किसान थे

3. विक्टर के माता-पिता गरीब किसान थे
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हालांकि विक्टर लोगों को बताता था कि उसके पिता एक बड़े शहर के मेयर हैं तो कभी कहता था कि उसके पिता बड़े कारोबारी हैं। लेकिन विक्टर को जानने वाले लोग बताते थे कि विक्टर के माता-पिता गरीब किसान थे।

4. और जब विक्टर ने एफिल टॉवर ही बेच दिया

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छोटी-मोटी ठगी से ऊब चुके विक्टर ने कुछ बड़ा कांड करने की ठानी। साल 1925 में पेरिस के एफिल टॉवर में मरम्मत का काम चल रहा था, और एक अखबार में मरम्मत से संबंधित खबर आई। ये विक्टर के लिए बड़ा मौका था। विक्टर ने अपने जानकार फर्जीवाड़ा करने वाले साथियों से एफिल टॉवर के के नकली कागजात बनवाए, फिर खुद बड़ा फ्रांसिसी अधिकारी बनकर कई बड़े कारोबारियों को 'होटल दी क्रिलॉन' में बुलाया, जो उस समय के सबसे महंगे होटलों में से एक था।

5.सरकारी अफसर बनकर बेच डाला एफिल टॉवर

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मीटिंग में विक्टर ने कारोबारियों से कहा- 'यह एक सरकारी मीटिंग है और सरकार अब एफिल टॉवर के मरम्मत पर और पैसा नहीं खर्च कर सकती, इसलिए एफिल टॉवर को बेचा जा रहा है, जिसके लिए आप लोग कल तक इसके कॉन्ट्रेक्ट के लिए बिड डाल सकते हैं' विक्टर ने शातिराना अंदाज में ये भी कहा कि इस मीटिंग की जानकारी बाहर नहीं आनी चाहिए, लोग एफिल टॉवर के बिकने से नाराज हो सकते हैं।

6. ठगी के शिकार कारोबारी ने रिपोर्ट तक नहीं लिखावाई

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इस पूरे वाकये के दौरान विक्टर ने अपना शिकार चुन लिया था। कुछ दिन बाद उसने एक व्यापारी को फोन कर कहा कि वो बिड जीत चुका है लेकिन कॉन्ट्रेक्ट हासिल करने के लिए उसे घूस देना ही होगा। कारोबारी अब विक्टर का शिकार बन चुका था, बिड और घूस दोनों के पैसे लेकर विक्टर तो रफूचक्कर हो गया। लेकिन शर्म के कारण उस कारोबारी ने पुलिस में रिपोर्ट नहीं दर्ज कराई।

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7. विक्टर ने नोट छापने वाली 'मशीन' भी बेच डाली

7. विक्टर ने नोट छापने वाली 'मशीन' भी बेच डाली
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एक अमेरिकी नागरिक को तो विक्टर ने नोट छापने वाली मशीन के नाम पर ठग लिया था। विक्टर ने एक लकड़ी का बॉक्स दिखाकर कहा इस मशीन में रेडियम के इस्तेमाल से 100 डॉलर का नोट बनाया जा सकता है। उस शख्स ने 30 हजार डॉलर में ये मशीन खरीद लीं, जिससे सिर्फ 2, सौ डॉलर के नोट निकले। जब तक उस शख्स को ठगी का पता चलता, विक्टर रफूचक्कर हो गया था।

8.और फिर पुलिस की गिरफ्त से भाग निकला विक्टर

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एक बार फिर विक्टर ने एफिल टॉवर को फ्रैंच कारोबारी से बेच दिया। लेकिन अब बात पुलिस तक पहुंच चुकी थी। 1934 में नकली करेंसी के साथ विक्टर को एफबीआई ने गिरफ्तार किया। ट्रायल के एक दिन पहले ही अपने बेडशीट को रस्सी बनाकर विक्टर भाग निकला।

9. इस तरह हुआ विक्टर का अंत

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जेल से भागने के एक महीने के बाद ही पुलिस ने उसे दोबारा पकड़ लिया। और 1947 में जेल में ही बीमारी से उसकी मौत हो गई।

10. डेथ सर्टिफिकेट में विक्टर के कारोबार के बारें में पढकर चौंंक जाएंगे आप

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तमाम ठगी के बावजूद डेथ सर्टिफिकेट में और इतिहास में उसका नाम एक 'एप्रेंटिस सेल्समैन' के तौर पर दर्ज हुआ। हैं ना चौंकाने वाली बात।

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