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विश्व खाद्य दिवस: आदतें बदलें उनके लिए जिन्हें दो वक्त की रोटी तक नसीब नहीं होती

जलवायु बदल रहा है तो कृषि और खाद्य सामग्रियों में भी बदलाव जरूरी है।

विश्व खाद्य दिवस: आदतें बदलें उनके लिए जिन्हें दो वक्त की रोटी तक नसीब नहीं होती
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पर्यावरण में तेजी से हो रहे बदलाव से पूरी दुनिया में खाद्य सुरक्षा एक बड़ी समस्या के रुप में उभरी है। पूरी दुनिया में कुपोषण और भुखमरी के करोड़ों लोग शिकार हो रहे हैं। आपको बता दें कि भुखमरी के कुल पीड़ितों में एक चौथाई तो भारत में ही हैं। ऐसे में पूरी दुनिया और हमारी जिम्मेदारी है कि ऐसे बदलते जलवायु में हम अपने खेती के तरीकों और भोजन की आदतों में बदलाव लाए।

ऐसे बदलाव जो सतत पोषण पर टिके हों, जिससे हम अपनी जरुरतों को तो पूरा करें लेकिन अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी इतना कुछ छोड़ जायें जिससे वो भुखमरी का शिकार ना हों।

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कृषि और खाद्य सामग्रियों में भी बदलाव जरूरी

कृषि और खाद्य सामग्रियों में भी बदलाव जरूरी

ऐसे में आज का दिन हमारे लिए बहुत ही मायने रखता है, आज विश्व खाद्य दिवस है, संयुक्त राष्ट्र हर साल यह दिवस मनाता है और हर साल थीम अलग होती है। इस बार थीम है- बदलते जलवायु के साथ कृषि और खाद्य में भी बदलाव जरूरी है। आइये जानते हैं हम विश्व खाद्य दिवस के दिन क्या योगदान दे सकते हैं।

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1. खाना फेंकने की आदत खत्म करने का संकल्प

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दुनिया ने तय किया है कि 2030 तक कोई भी शख्स भूखा ना सोए, ऐसे में भोजन को खराब करने की आदत को हमें खत्म करना होगा। एक तरफ जहाँ कई करोड़ बच्चे भुखमरी के शिकार हैं तो दूसरी तरफ सच्चाई यह है कि दुनिया में जितना खाने का सामान पैदा होता है उसमें एक तिहाई बेकार हो जाता है या फेंक दिया जाता है।

2. घरों, शादियों और होटलों में खाना बर्बाद नही करें

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हम अपने आस-पास ही देखें तो तमाम घरों में शादियों और होटलों में खाना बर्बाद होता ही रहता है। ये घर, होटल हमारे ही तो हैं। खाना फेंकने से पहले अगर उन बच्चों को याद कर लें जिनको दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती तो शायद हम आगे से खाना बर्बाद नही कर पाएंगे।

3. 'अग्ली वेजिटेबल्स' के नाम पर खेत में हीं सब्जियों को बर्बाद करने से रोकना

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आपको जानकर हैरानी होगी कि महज सब्जियों के रंग और बनावट के चक्कर में ताजी सब्जियां खेत में ही नष्ट कर दी जाती हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यहां तक भारत में भी परफेक्शन के आदि हो चुके लोग सब्जियों को खेत में ही नष्ट कर देते हैं। सब्जियों के कुल पैदावर का एक तिहाई हिस्सा फेंक देना कहाँ तक सही है आप ही बताइए, अपनी आदत में हमें सुधार लाना ही होगा।

4. खाने की आदतों में सुधार कर पर्यावरण प्रदूषण कम करें

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खेत में फसल उगने से लेकर खाना बनाकर खाने तक हमारी कमियों की वजह से कई गुना ज्यादा कॉर्बनडाई ऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। जैसे कोयले से खाना बनाना, साथ ही खाने को बार-बार गर्म करने और पानी के ज्यादा इस्तेमाल से प्रदूषण फैलता है, जिसे जरा सी सावधानी से हम रोक सकते हैं।

5. सोलर एनर्जी और ऊर्जा के दूसरे स्त्रोतों का इस्तेमाल करें

5. सोलर एनर्जी और ऊर्जा के दूसरे स्त्रोतों का इस्तेमाल करें
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आप सिर्फ भारत की ही बात करें तो लाखों लोग ऐसे हैं जो आज भी बिजली की आस में तरसते हैं। ऐसे में अगर बिजली का इस्तेमाल कम से कम किया जाए, या सौलर पैनल जैसे बिजली के स्त्रोतों का इस्तेमाल खेती में भी किया जाए, हम आसानी से बिजली बचा सकते हैं जिससे हमारी आने वाली पीढ़ियां इसके लिए ना तरसे।

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6. खाने की आदतों में विविधता लाएं

6. खाने की आदतों में विविधता लाएं
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कभी-कभी हम अपने आदतों की वजह से एक ही तरह का खाना खाने लगते हैं। ऐसे में सोचिए भारत के लोग अगर हर रोज सिर्फ दाल ही खाते रहे तो दाल कितने दिन में खत्म हो जाएगी। मतलब यह है कि सब्जियां, दाल, नॉन वेज हर तरह की चीजों को बदल-बदल कर खाएं। खाना भी अच्छा लगेगा साथ ही खाद्य सुरक्षा में आपका योगदान भी हो जाएगा।

7. जल है तो कल है, जीवन का हर पल है

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बिना जल, जंगल, जमीन के भोजन की कल्पना भी बेईमान है। ऐसे में पानी बचाना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। नहाने, ब्रश करने और बर्तन धुलने जैसी चीजों में कभी-कभी हमारी लापरवाही  से काफी पानी बर्बाद हो जाता है। हमारी ये लापरवाही, फिर खेतों में दिखाई पड़ती है जब खेत सूख जाते हैं औऱ कुछ लोगों को दाने-दाने का मोहताज होना पड़ता है।

8. हमारी जमीन, हमारी जिंदगी

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खेती वाली जमीन पर कभी घर, कभी मॉल बनाकर हम तो खुश हो जाते हैं। लेकिन ये भूल जाते हैं कि इन हरकतों से फसलों के लिए जमीन की कमी हो जाती है।

खाद्य सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी

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और सबसे अंत में, इस खाद्य दिवस पर हम सब की जिम्मेदारी है कि हम उन करोड़ों लोगों के बारे में सोचें जो आज दुनिया के किसी कोने में भूखे सो रहे होंगे। और ये सोच हमें जिम्मेदारी का एहसास दिलाएगी, जिससे हम दूसरों को भी जागरुक कर पाएंगे।

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