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'अमूल गर्ल' ने पूरे किए 50 साल, इन धुरंधरों की थी कल्पना

'अमूल गर्ल' हुई 50 वर्ष की। 

'अमूल गर्ल' ने पूरे किए 50 साल, इन धुरंधरों की थी कल्पना
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अमूल भारतीय डेयरी प्रोडक्ट्स की बहुत बड़ी सहकारी कंपनी है। आपने अमूल के उत्पाद तो यकीनन इस्तेमाल किए ही होंगे और उसके विज्ञापन भी देखे होंगे। विज्ञापन से याद आया आप अमूल बटर के विज्ञापनों में हमेशा दिखने वाली 'अमूल गर्ल' को तो जानते ही होंगे। यह गर्ल विज्ञापनों में तो अब भी गर्ल ही है, पर असल में अब वो 50 बरस की हो चुकी है। 

आइये आपको बताते हैं 'अमूल गर्ल' से जुड़ी कुछ रोचक बातें। 

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यह है 'अमूल गर्ल'

यह है 'अमूल गर्ल'

'अमूल गर्ल' अमूल बटर के विज्ञापनों में नज़र आती है। अमूल गर्ल नीले बाल, व लाल गालों वाली लड़की है। इसकी नाक नहीं है और यह पोल्का डॉट वाला सुन्दर सा फ्रॉक पहने होती है।

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करती है गंभीर मुद्दों पर कटाक्ष

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कंपनी अमूल गर्ल को केंद्र में रखकर कई गंभीर सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर कटाक्ष करती नज़र आती है। यह कटाक्ष व्यंग्य के रूप में होते हैं। इसने भारत में आपातकाल से लेकर नसबंदी तक कई मुद्दों पर कटाक्ष किये हैं।

अच्छे दिन

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देश में जब मोदी सरकार आई तो अमूल ने 'अच्छा दिन-नर' (din-ner) टैग लाइन के साथ एक विज्ञापन बनाया था।

मोदी के जन्मदिन पर यूँ दी थी बधाई

मोदी के जन्मदिन पर यूँ दी थी बधाई
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अमूल ने पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर जब उन्हें बधाई दी तो उन्होंने यह कहते हुए धन्यवाद दिया कि उन्हें अमूल के मज़ाक करने का तरीका हमेशा से पसंद है।

इस तिकड़ी का दिमाग है 'अमूल गर्ल' के पीछे

इस तिकड़ी का दिमाग है 'अमूल गर्ल' के पीछे
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अमूल बटर के विज्ञापन बनाने का काम डाकुन्‍हा कम्युनिकेशन्स कंपनी के हाथ में है। इस कंपनी के मुख्य तीन दिमाग इन विज्ञापनों के पीछे हैं। वो तीन लोग हैं कंपनी के क्रिएटिव हैड राहुल डाकुन्हा, कॉपी राइटर मनीष झावेरी और करीब ढाई दशकों से अमूल गर्ल को बनाने वाले कार्टूनिस्ट जयंत राणे

हर सप्ताह 6 कार्टून्स

हर सप्ताह 6 कार्टून्स
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यह तिकड़ी हर सप्ताह 6 कार्टून्स बनाती है। इनके कार्टून्स अधिकतर आक्रामक ही होते हैं।

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इस तरह लाते हैं आईडिया

इस तरह लाते हैं आईडिया
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यह लोग अखबारों की मदद से विज्ञापन के लिए मुद्दे ढूँढते हैं। इन अखबारों में छोटे-बड़े घोटाले, मजदूरों का आंदोलन, खेलों का विवाद, भ्रष्टाचार प्रदर्शन, इमारतों का ढह जाना और अन्य तरह के विवादित और चर्चित मुद्दे ढूँढकर उन पर काम करते हैं।

इस तरह काम होता है आईडिया पर काम

इस तरह काम होता है आईडिया पर काम
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आईडिया फाइनल हो जाने पर उसकी पटकथा पर चर्चा होती है। इस पटकथा के आधार पर जयंत राणे अमूल गर्ल को केंद्र में रखकर लगभग आधे घण्टे के समय में ही कार्टून बनाकर दे देते हैं। फिर डाकुन्हा इसे एडिट कर और फाइनल टच देकर विज्ञापन को फाइनल करते हैं।

वर्गीज कुरियन है इसकी प्रेरणा

वर्गीज कुरियन है इसकी प्रेरणा
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अपने आक्रामक रवैये के कारण इसके विज्ञापन कंपनी को विवादों में फंसा देते हैं। लेकिन कंपनी को इससे फर्क नहीं पड़ता है। कंपनी अपनी निडरता को अमूल के संस्थापक वर्गीज कुरियन की प्रेरणा मानती है। वे भी किसी से नहीं डरते थे। उन्होंने ही डाकुन्हा कम्यूनिकेशंस को ज्वलंत मुद्दों पर अपना पक्ष रखने की पूरी आज़ादी दी थी। वे अब इस दुनिया में नहीं है पर उनका नाम अब भी जिन्दा है।

इस तरह शुरुआत हुई थी अमूल विज्ञापन की

इस तरह शुरुआत हुई थी अमूल विज्ञापन की
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अमूल विज्ञापन की शुरुआत 1966 में हुई थी। तब इसकी कमान एडवरटाइजिंग सेल्‍स एंड प्रमोशन के मैनेजिंग डायरेक्‍टर सिल्‍वेस्‍टर डाकुन्‍हा के हाथों में थी। शुरुआती दिनों में इसके विज्ञापन इतने आकर्षक नहीं थे। उन्होंने इसे यहाँ तक लाने के लिए काफी प्रयास किए हैं। उस समय अमूल की टक्कर पॉल्‍सन नामक कंपनी से थी। पॉल्‍सन अपने विज्ञापन के लिए एक बटर गर्ल का इस्तेमाल करता था। इस बटर गर्ल को टक्कर देने के लिए डाकुन्‍हा ने अपने एजेंसी के आर्ट डायरेक्‍टर यूस्‍टेस पॉल फर्नांडिज के साथ मिलाकर लोगों के दिमाग में बस जाने वाली इस 'अमूल गर्ल' की कल्पना की और इसे साकार किया।

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