इंदौरी चच्चा: भिया कभी सोचा है ऑफिस में नींद क्यों आती है? 

कमबख़्त काम के वक्त ही यह नींद क्यों आती है? 

इंदौरी चच्चा: भिया कभी सोचा है ऑफिस में नींद क्यों आती है? 
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नमस्कार, सलाम, आदाब मैं आपका दोस्त लोकेन्द्र शर्मा अपनी एक दुःख भरी घटना सुनाने जा रहा हूँ। हुआ यह कि मैं ऑफिस से घर जा रहा था तभी रास्ते में एक इंदौरी चच्चा मिल गए, बुज़ूर्ग होने की वजह से मैंने उन्हें अपनी गाड़ी पर बैठा लिया और बातें शुरू हो गई। जब उन्हें बताया कि मैं WittyFeed में स्टोरी टेलर हूँ तो वह भी ज़िद करने लगे की उन्हें  भी लिखना है , तो भैया आज से अपन उनकी सीरीज़ शुरू कर रहे हैं। उनके लिए है उनकी "ज़िद" और आपके लिए है झन्नाटेदार इंदौरी तड़का..

भिया राम! मैं इंदौरी चच्चा आपके लिए एक नई चीज़ ले कर आ रिया हूँ।अपन तो क्या दिन भर फुरसत में रहते हैं और ऐबले तो अपन बचपन से ही हैं। चाए जो सोचते रहते हैं।अब देखो यह सवाल आपके दिमाग में भी कई बार आया ही होगा ना की ऑफिस में इत्ती नींद क्यों आती है? मगर आप ठेरे बीजी इंसान, इसलिए आपने इतना ध्यान नहीं दिया।अपने दिमाग में तो भिया एक दिन आया और अपन ने पूरा इन्टरनेट खंगाल मारा और आपके लिए एक दम झकास सी इन्फोर्मेशन ले के आ गया और ऐसी इन्फॉर्मेशन अब से अपन रोज़ पढेंगे।    

मुझे नींद सताए 

मुझे नींद सताए 

किस-किस को पूछिये, किस-किस को जानिये भिया आराम बढ़ी चीज़ है मुँह ढक कर सोइये। हाँ भिया! माना नींद बहुत जरुरी होती है। दुनिया की सारी दौलत एक तरफ और चैन की नींद एक तरफ, मगर भिया कई बार यह नींद आफत भी दे जाती है। खास कर जब ऑफिस के बीच में नींद आ जाए और आपका बॉस देख ले, तो भैया! सारे गृह नक्षत्र उलटे हो जाते हैं। 

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इस नींद का कुछ करो 

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नहीं भिया! मैं आपके आनंद से कतई नहीं जल रहा । और जलूं भी क्यों? अपन तो मस्त, जब मन पड़े तब चौड़े हो कर पड़ जाते हैं। मगर आपको जब आपका बॉस, नींद में गोते खाते हुए देख ले, तो सोचो क्या होगा? अरे मज़े नहीं ले रहा हूँ ,बचने के उपाय बता रिया हूँ। 

एक जगे बैठोगे तो उंगोगे 

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अब भिया दिक्कत क्या है, ज़्यादातर लोग एक जगह पर बैठ कर ही कम्प्युटर पर खटर-पटर करते रेते हैं।अपने को तो समझ नहीं आता, लोग एक जागो पर कैसे बैठ जाते हैं। मगर करें भी क्या पापी पेट का सवाल है।तो भिया चाहे जितना भी बैठने वाला काम क्यों ना हो, जब भी नींद आये थोड़ा घूम फिर लो, उससे क्या आपका पेट भी इन फोटू वाले अंकल जैसा नहीं बनेगा।

दिल पर रखें काबू तो भला कैसे 

दिल पर रखें काबू तो भला कैसे 
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एक शेर पेल रिया हूँ थोड़ा इरशाद-विरशाद कर देना कि अर्ज़ किया है दिल पर रखे काबू तो भला कैसे, इस आवारा को समझाएं तो भला कैसे। अरे बस भिया बस अब इतनी तारीफ़ भी मत करो, वो तो क्या है, अपन भी कभी-कभी पेल देते हैं। हाँ तो मैं कहाँ था, दिल पर काबू रखने पर, तो कई बार इतनी जोर से नींद आती है कि चाय पिलो या कुछ भी पिलो नींद उड़ती ही नहीं है। फिर तो ऐसा लगता है कोई हथोड़े से बड़ी जोर से माथे पर मारे और माथे की पूरी नस खुल जाए।

इस पर वैज्ञानिक क्या कहते हैं

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दिखता भले ही नहीं हूँ मगर भिया हूँ बड़ा होशियार और अभी से नहीं भिया बचपन से ही।अपन बिना तर्क वाली बात तो करते ही नहीं, सबूत जेब में ले के चलते हैं।इस मामले में वैज्ञानिक क्या कहते हैं उस पर भी रिसर्च किया है अपन ने। तो विज्ञानिकों ने एक शोध किया था भिया! ये वैज्ञानिक भी अपने ही जैसे हैं "फुरसती" दिन भर चाए जिस-जिस पर शोध करते रहते हैं। तो इस मामले में कैसे चूक सकते थे इस में भी शोध किया और उन्होंने इसका कारण यह बताया। 

देर तक सोना 

देर तक सोना 
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न भिया! इसमें आपकी गलती बिलकुल नहीं है। यह तो इस मुए इंटरनेट ने बिगाड़ी है सबकी आदत, शरीफ-शरीफ छोरे भी रात भर घुग्गु की तरह कम्प्युटर में देखा करते हैं।अब वह क्या देखते हैं, यह हमसे कहा नहीं जाएगा।अब रात भर ज्ञान वर्द्धक चीज़े देखेंगे तो दिन में नींद तो आएगी ना और ऐसा मैं नहीं वैज्ञानिक भाई लोग भी कहते हैं।

जो रात को बस सोते हैं 

जो रात को बस सोते हैं 
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अब आप में से कुछ महान हस्तियाँ बोलेंगी, "चच्चा अपने पास तो जिओ की सिम ही नहीं है फिर अपन क्यों? तो भियाओं इंदौरी चच्चा के पास उसका भी जवाब है। आप भले ही 7,8 घंटे की फुल-फाल नींद ले लो मगर फिर भी सुबह उठते वक्त आपके नखरे कटरीना से कम नहीं होते नहा धो लो, फिर भी आपकी आँखें नींद के नशे में एक दम फुल-फाल मिलेगी डूबी हुई 

ऐसे लोगों को थोडा ज्यादा चाइये होता है 

ऐसे लोगों को थोडा ज्यादा चाइये होता है 
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ऐसे लोगों को थोड़ा ज्यादा चाइये होता है, भिया पहले ही बता दूँ मेरा मतलब नींद से है अब आप अगर कुछ और समझो तो वो आपकी मर्ज़ी है। वैज्ञानिक लोग कहते हैं कि कुछ लोगों के शरीर की क्षमता दुसरे लोगों से ज़्यादा होती है। इसीलिए उनको ज्यादा चिये होता है। भिया! मैं अभी भी कह रिया हूँ मेरा मतलब खाली नींद से है। बाकी तुम भी भिया कमाल का सोचते हो।

उपाय 

उपाय 
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देखो भिया दर्द-ए-नींद की दवा सिर्फ योगासन है।रोज़ सूबे-सूबे बाबा रामदेव की "जय बोलो" और लंगोटी कस के मैदान में कूद जाओ।

ठिक है भिया अपन चलते हैं कल वापिस मिलेंगे एक और नई चीज़ के साथ, तो जाते-जाते एक और शेर पेल जाता हूँ "सुना है इश्क करने वालों की नींद उड़ जाती है, कम्बख्त कोई हमसे भी इश्क करे हमे नींद बहुत आती है"। भियाओं बताना जरुर आपको ये इंदौरी चच्चा कैसे लगे?