'31st अक्टूबर': संवेदनशील मुद्दे पर बनी यह फिल्म कर देगी आपको सोचने के लिए मजबूर

फिल्म की रेटिंग- 3/5

'31st अक्टूबर': संवेदनशील मुद्दे पर बनी यह फिल्म कर देगी आपको सोचने के लिए मजबूर
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सोहा अली खान और वीर दास स्टारर '31st अक्टूबर' वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के दंगों पर आधारित है जिसमें सिक्ख समुदाय के करीब 2200 लोगों नें अपनी जानें गंवाईं थी। 

एक सत्य घटना पर आधारित इस फिल्म के जरिये सोहा की एक लंबे अरसे के बाद बड़े परदे पर वापसी हुई है, साथ ही दर्शकों को अभिनेता 'वीर दास' का अभिनय भी देखने को मिला है।

आइये, जानते हैं कैसी रही यह फिल्म!

एक अत्यंत संवेदनशील विषय को परदे पर ढालने   की सफल कोशिश 

एक अत्यंत संवेदनशील विषय को परदे पर ढालने   की सफल कोशिश 

फिल्म के माध्यम से नेशनल अवार्ड प्राप्त निर्देशक शिवाजी लोटन पाटिल नें आजाद भारत के एक अति संवेदनशील और अनछुए  विषय को दर्शाने की कोशिश की है। फिल्म 31 अक्टूबर 1984 की मनहूस रात में सिक्ख परिवारों के खिलाफ चली खून की आँधी के सच को सामने लाने का साहस करती दिखाई देती है।

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पर 'सत्य घटना' पर आधारित होने की वजह से न करें मसाले की उम्मीद

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फिल्म चूंकि सत्य घटनाओं पर आधारित है, इसमें अतिरिक्त मसाले की उम्मीद नहीं कर सकते। वैसे भी फिल्म के विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे मनोरंजक बनाने में कोई तुक भी नज़र नहीं आती।

सिक्खों के दर्द को दर्शाने की हुई है कोशिश, पर पटकथा और ज्यादा मजबूत हो सकती थी

सिक्खों के दर्द को दर्शाने की हुई है कोशिश, पर पटकथा और ज्यादा मजबूत हो सकती थी

फिल्म के जरिये सिक्ख समुदाय को मिले उन गहरे जख्मों को करीब से उभारने की कोशिश हुई है जो शायद आज भी भरे नहीं हैं। पर कहीं न कहीं इस फिल्म की कहानी 1984 के सिक्ख-विरोधी दंगों के पीछे का असली चेहरा दिखाने में शायद उतनी सफल नहीं रही।

सोहा अली खान का अभिनय रहा काबिल-ए-तारीफ़

सोहा अली खान का अभिनय रहा काबिल-ए-तारीफ़

इस फिल्म में वीर दास व सोहा नें एक सिक्ख पति-पत्नी का किरदार निभाया है। फिल्म में कुछ जगहों पर सोहा अली खान नें अपने अभिनय की छाप छोड़ी है। यदि अभिनेता वीर दास की बात की जाए तो उनका अभिनय मिला-जुला रहा। वीर दास एक सिक्ख के किरदार में लोगों से जुड़ने में कमजोर नज़र आते हैं।

सिक्ख परिवार की भावनाओं को खूबसूरती के साथ दर्शाया गया है

सिक्ख परिवार की भावनाओं को खूबसूरती के साथ दर्शाया गया है

दंगों के दौरान एक सिक्ख परिवार की मानसिक स्थिति, उसके डर व लाचारी को इस फिल्म में खूबसूरती से दर्शाया गया है। साथ ही फिल्म में हिंदुओं के द्वारा अपने सिक्ख दोस्तों को बचाने के लिए दी गई कुर्बानियाँ व संघर्ष भी शामिल है।

कर देगी यह फिल्म आपको सोचने पर मजबूर 

कर देगी यह फिल्म आपको सोचने पर मजबूर 

फिल्म में दर्शाये गए तथ्य, उनका चित्रण व अंत में बताई गई कुछ बातें आपको वाकई इस विषय के बारे में सोचने पर मजबूर कर देंगी। फिल्म देखने के बाद सिक्खों के दिल में बसे 32 साल पुराने जख्मों को आप भी महसूस करने लगेंगे। 

इस वजह से जा सकते हैं यह फिल्म देखने 

इस वजह से जा सकते हैं यह फिल्म देखने 

यदि आपको ऐसे संवेदनशील मुद्दे देखने पसंद हैं या फिर यदि आप केवल मनोरंजन के लिए फिल्में नहीं देखते हैं तो आप यह फिल्म देखने जा सकते हो। साथ ही सोहा अली खान व वीर दास के चाहने वालों को भी यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए। 

रेटिंग- 5 में से 3 स्टार 

रेटिंग- 5 में से 3 स्टार 

मैं इस फिल्म को 5 में से 3 स्टार ही दूंगा। काफी समय बाद ऐसे गम्भीर मुद्दे को बड़े परदे पर देखने का मौक़ा ना छोडें।