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जानिए नरक चतुर्दशी के दिन कहाँ मनती है दीपावली?

नरक चतुर्दशी के मत्वपूर्ण तथ्य। 

जानिए नरक चतुर्दशी के दिन कहाँ मनती है दीपावली?
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भगवान कृष्ण का है नाता

भगवान कृष्ण का है नाता

नरक चतुर्दशी हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की 14वी तारीख को मनाई जाती है।हिन्दू मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। उनकी इस विजय की ख़ुशी में यह त्यौहार मनाया जाता है।

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कौन था नरकासुर

कौन था नरकासुर
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नरकासुर एक बहुत ही अत्याचारी दैत्य था। वो भूदेवी (भूमि देवी) और वराह (विष्णु के तीसरे अवतार) का पुत्र था। उसे भगवान ब्रह्मा से आशिर्वाद प्राप्त था कि उसका वध केवल उसकी माँ ही कर सकती थी।जब नरकासुर का अत्याचार बढ़ गया तो देवताओं ने भगवान कृष्ण से उसका वध करने का अनुरोध किया।भगवान कृष्ण से इसमें नरकासुर की पत्नी सत्यभामा (जो भूदेवी का ही रूप थी) की सहायता ली।भगवान कृष्ण सत्यभामा को लेकर नरकासुर से लड़ने गए। जब वे नरकासुर के तीर से घायल होकर बेहोश हो गए तो सत्यभामा ने बाण का निशाना नरकासुर पर लगाकर उसका वध कर दिया।

भूदेवी चाहती थी कि इस दिन दुःख न मनाया जाए

भूदेवी चाहती थी कि इस दिन दुःख न मनाया जाए
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इस घटना से यहीं शिक्षा मिलती है कि अगर अपना खून भी गलती करे तो उसे भी सजा दी जानी चाहिए।साथ ही इस घटना के बारे में ख़ास बात यह भी है कि खुद नरकासुर की माँ भूदेवी ने ये बात कहीं थी कि इस दिन दुःख नहीं बल्कि खुशियाँ मनाई जानी चाहिए।

अभ्यंग स्नान

अभ्यंग स्नान
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ऐसा भी माना जाता है कि नरकासुर के वध के बाद भगवान कृष्ण ने तेल से नहाकर अपने शरीर से नरकासुर का खून साफ़ किया था।इसी वजह से इस दिन अभ्यंग स्नान का बहुत महत्व होता है।साथ ही नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान न करने से नरक में जाना पड़ता है।अभ्यंग स्नान में सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तेल (मुख्यतः तिल का तेल) लगाकर उबटन से नहाया जाता है।अभ्यंग स्नान नरक चतुर्दशी के साथ ही दिवाली और बलिप्रतिपदा के दिन भी होता है।साथ ही इस दौरान फटाके भी फोड़े जाते है

काली चतुर्दशी

काली चतुर्दशी
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नरक चतुर्दशी को काली चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन के बारे में एक मान्यता यह भी है कि इस दिन महाकाली ने रक्तबीज नामक दैत्य का वध किया था।इसी वजह से इस दिन उनके शक्ति स्वरुप की आरधना की जाती है।यह भी माना जाता है कि इस दिन सभी तरह के आलस छोड़कर नवीन ऊर्जा को अपनाना चाहिए।

काली चतुर्दशी से जुड़ा है कला जादू

काली चतुर्दशी से जुड़ा है कला जादू
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काली चतुर्दशी को साल की सबसे खतरनाक रात माना जाता है।इस दिन तांत्रिक और ओझा काला जादू करते हैं। साथ ही इस दिन बुरी आत्माओं को संतुष्ट भी किया जाता हैं। इस दिन पुजारी और अन्य धार्मिक लोग कई तरह के अनुष्ठान भी करते हैं। 

रूप चौदस

रूप चौदस
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नरक चतुर्दशी को रूप चौदस भी कहा जाता है।रूप चौदस मुख्य रूप से उत्तर भारत के राज्यों में मनाई जाती है।इस दिन महिलाएं सजती संवरती है।यह दिन सुंदरता और स्वास्थ्य को समर्पित होता है।यह इसलिए कि मनुष्य को अपने शरीर पर भी ध्यान देना चाहिए।अगर मनुष्य स्वस्थ्य और सुन्दर है तभी वो खुश होगा।यहाँ सुंदरता का मतलब केवल बाहरी नहीं बल्कि मन की सुंदरता से भी है।

जलाया जाता है नरकासुर का पुतला

जलाया जाता है नरकासुर का पुतला
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जिस तरह दशहरे पर जगह-जगह रावण का पुतला जलाया जाता है।उसी तरह "गोवा" में नरक चतुर्दशी के दिन नरकासुर के पुतले जलाए जाते है।लोग बड़े उत्साह के साथ घास, पेपर और पटाखों की मदद से बड़े-बड़े पुतले बनाते हैं और चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले भोर में इसे जलाते हैं और खुशियाँ मनाते हैं।

यहाँ मनती है दीपावली

यहाँ मनती है दीपावली
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हम लोग दिवाली के दिन भगवान राम के रावण वध करके लौटने की ख़ुशी में मनाते हैं।लेकिन दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में भगवान श्री कृष्ण द्वारा नरकासुर का वध करने की ख़ुशी में 'दीपावली' मनाई जाती हैं।जी हाँ दक्षिण भारत में इसे दीपावली ही बोला जाता है। इसी वजह से यहाँ अमावस्या नहीं बल्कि नरक चतुर्दशी को दिवाली मनाई जाती है।

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