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बैंगलोर के वाटर टैंकर चालक ने 'मिस्टर एशिया' का खिताब जीतकर देश का नाम किया रोशन

काफी संघर्ष कर पहुँचे इस मुकाम तक। 

बैंगलोर के वाटर टैंकर चालक ने 'मिस्टर एशिया' का खिताब जीतकर देश का नाम किया रोशन
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'मंजिल तो मिल ही जाएगी भटकते हुए ही सही, गुमराह तो वो हैं जो घर से निकले ही नहीं'

मैनें जब यह खबर देखी तो मुझे यह खूबसूरत पंक्ति ही याद आईI मंजिल पर पहुँचना हो तो उसकी ओर चलना तो शुरू करना ही होगाI यह कहानी एक ऐसे ही शख्स की है जिसने मुसीबतों से हारकर रुकने की बजाए चलते रहना उचित समझा और अंत में मंजिल पा ही लीI

हम बात कर रहे हैं बैंगलोर निवासी जी बालाकृष्णा की, जिन्होनें हाल ही में मिस्टर एशिया का ख़िताब अपने नाम किया हैI आइये जानते हैं उनकी पूरी कहानी। 

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Phil-Asia bodybuilding championship में जीता ख़िताब 

Phil-Asia bodybuilding championship में जीता ख़िताब 

हाल ही में फ़िलीपीन्स में 5th Phil-Asia bodybuilding championship का आयोजन हुआ थाI इस चैंपियनशिप में हमारे अपने बॉडीबिल्डर जी बालाकृष्णा ने मिस्टर एशिया का ख़िताब अपने नाम कर लियाI बालाकृष्णा ने यह सफलता बहुत मेहनत और संघर्ष से पाई हैI

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"Arnold Schwarzenegger of Whitefield"

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बालाकृष्णा बैंगलोर के व्हाइटफील्ड उपनगर से हैं। लोग उन्हें प्यार से "Arnold Schwarzenegger of Whitefield" बुलाते हैंI गौरतलब है कि 'द टर्मिनेटर' फेम  Arnold Schwarzenegger भी मशहूर बॉडीबिल्डर रह चुके हैंI

यूँ शुरू हुआ सफर

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बालाकृष्णा अभी 25 वर्ष के हैंI जब वे मात्र 15 वर्ष के थे तभी उनके पिता का निधन हो गया। बस उसी वक़्त से बालाकृष्णा का संघर्ष शुरू हो गया थाI बॉडीबिल्डिंग में अपना करियर बनाने के लिए उन्होंने 2010 में  पानी का टैंकर चलाना शुरू कर दियाI टैंकर बिज़नेस के साथ ही वो जिम इंस्ट्रक्टर भी हैं। 

पहले भी जीते हैं ख़िताब

पहले भी जीते हैं ख़िताब
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इससे पहले भी बालाकृष्णा ने दो बड़े  ख़िताब अपने नाम किए हैंI वे अंडर-24 जूनियर कॉन्टेस्ट केटेगरी में  जर्मनी और एथेन्स में Mr. Universe का टाइटल जीत चुके हैं। 

यह है उनकी डाइट

यह है उनकी डाइट
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बालाकृष्णा अपने काम के साथ ही हर दिन 6 घंटों की कड़ी ट्रेनिंग करते हैंI साथ ही उनकी हर दिन की डाइट में 750 ग्राम चिकन, 25 अंडे, 300 ग्राम चावल, और 200 ग्राम सब्जियां और फल सम्मिलित होते हैंI उनके लिए यह जरुरी होता है कि कॉम्पिटीशन के दौरान उनका वजन 120 से 90 किलोग्राम के बीच रहेI

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इनकी मदद है उनके साथ

इनकी मदद है उनके साथ
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बालाकृष्णा की मेहनत और लगन को देखकर व्हाइटफील्ड सेटलर्स एंड रेसिडेंट्स एसोसिएशन और व्यवसायी कोशी वर्घीस उन्हें आर्थिक रूप से सहायता प्रदान करते हैंI

खुश हैं वो इस उपलब्धि से

खुश हैं वो इस उपलब्धि से
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इस ख़िताब को जीतने पर बालाकृष्णा ने अपनी ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा है कि मुझे अपनी उपलब्धि पर गर्व है और मैं आगे भी थोड़ी आर्थिक मदद के साथ और भी कई बड़े खिताब अपने नाम करना चाहता हूँI

अंतर्राष्ट्रीय कॉम्पिटीशन में जाने के लिए करना पड़ता है संघर्ष

अंतर्राष्ट्रीय कॉम्पिटीशन में जाने के लिए करना पड़ता है संघर्ष
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इतनी अधिक मेहनत करने के बावजूद बालाकृष्णा की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं हैI उन्हें सरकार की तरफ से कोई सहायता नहीं मिलती है और उन्हें फण्ड की कमी पड़ जाती हैI इस वजह से उन्हें विदेशी जमीं पर होने वाली प्रतियोगिताओं में जाने के लिए अब भी संघर्ष करना पड़ता हैI

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