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एक बच्ची जन्मी दो बार, जानें मेडिकल साइंस ने कैसे किया यह चमत्कार  

साइंस नें फिर किया सभी को अचंभित। 

एक बच्ची जन्मी दो बार, जानें मेडिकल साइंस ने कैसे किया यह चमत्कार  
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आवश्यकता अविष्कार की जननी है। मगर कई बार ऐसी आवश्यकता पड़ती है कि विज्ञान कुदरत को भी चकमा दे देता है और तब जिस आवश्यकता से अविष्कार का जन्म होता है उसे चमत्कार कहा जाता है। हम आए दिन ऐसे चमत्कारों के बारे में सुनते हैं जो कुदरत के नियमों के बिलकुल विपरीत है। ऐसा ही एक चमत्कार इन दिनों सोशल मीडिया पर जोरो-शोरों से वायरल हो रहा है। एक बच्ची एक नहीं दो बार जन्मी...  

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Lynlee Boemer है वह बच्ची 

Lynlee Boemer है वह बच्ची 

जी हाँ, सिर मत खुजाइये, ऐसा सच-मुच हुआ है और जिस बच्ची के साथ हुआ है उसका नाम है Lynlee Boemer. दुनिया की शायद यह पहली बच्ची होगी जिसके एक नहीं दो-दो जन्मदिन होंगे।

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प्रेगनेंसी के 16 वे हफ्ते में उसे गर्भ से निकाला गया था 

प्रेगनेंसी के 16 वे हफ्ते में उसे गर्भ से निकाला गया था 
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आप को जान कर काफी हैरानी होगी कि Lynlee Boemer को एक बार पहले लगभग प्रेगनेंसी के 16 वें हफ्ते में गर्भ से निकाला गया था। उसका ऑपरेशन किया गया था और फिर उसे गर्भ में डाल दिया गया था।

बच्ची की Tailbone में ट्यूमर था 

बच्ची की Tailbone में ट्यूमर था 
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एक दिन सामान्य जाँच में बच्ची की माँ, Texas की Margaret Boemer को जब पता चला कि उनके गर्भ में पल रहे बच्चे की Tailbone में ट्यूमर है, जिससे बच्चे की जान को खतरा हो सकता है। मार्गरेट उस वक्त काफी घबरा सी गई थी और उन्हें समझ नहीं आ रहा था उन्हें क्या करना चाहिए।

आखिर क्या है यह ट्यूमर 

आखिर क्या है यह ट्यूमर 
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दरअसल ऐसे ट्यूमर को Sacrococcygeal Teratoma कहा जाता है। यह बीमारी 35000 बच्चों में से एक को होती है।

डॉक्टर ने रखे थे दो उपाय 

डॉक्टर ने रखे थे दो उपाय 
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Margaret Boemer के सामने डॉक्टर्स ने दो विकल्प रखे थे, या तो वो बच्चा गिरा दें क्योंकि अगर वह बच्चा न गिराती तो वह ट्यूमर उन्हें भी नुकसान पहुँचा सकता था या तो दूसरा उपाय यह था कि उसको बाहर निकाल कर ऑपरेशन किया जाये।

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Margaret ने चुना दूसरा विकल्प 

Margaret ने चुना दूसरा विकल्प 
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Margaret ने बहादुरी और सूझ-बूझ से निर्णय लिया कि वह दूसरा विकल्प चुनेंगी। बच्ची के जन्म से 12 हफ़्ते पहले उसे C-Section के जरिए बाहर निकाला गया। यह सब करना डॉक्टर्स के लिए भी आसान नहीं था। उन्हें महज़ 20 मिनट के समय में सर्जरी कर के बच्ची को वापस गर्भ में रखना था।

पहले डॉक्टरों ने बच्ची के दिल की धड़कन कम की 

पहले डॉक्टरों ने बच्ची के दिल की धड़कन कम की 
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यह सब इतना आसन भी नहीं था, पहले डॉक्टरों के एक दल ने बच्ची की धड़कन को धीमा किया और ट्यूमर का ऑपरेशन किया इसके बाद उसे वापस गर्भ में डाल कर बच्चेदानी को सिल दिया।

बच्ची एक दम स्वस्थ्य थी 

बच्ची एक दम स्वस्थ्य थी 
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मगर जब 12 हफ़्तों के बाद बच्ची का C-Section द्वारा जन्म हुआ। बच्ची स्वस्थ थी, लेकिन आठ दिन बाद ट्यूमर का बचा हुआ हिस्सा निकालने के लिए फिर उसका ऑपरेशन किया गया। अब फिर चिंता की लकीरें बच्ची के माँ-बाप के चेहरे पर बिखरी पड़ी थी।

चमत्कार को नमस्कार है 

चमत्कार को नमस्कार है 
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इसे चमत्कार नहीं तो और क्या कहेंगे आप आज बच्ची स्वस्थ है और उसकी माँ खुश है। अगर ट्यूमर नहीं निकाला जाता, तो बच्ची की गर्भ में ही मृत्यु भी हो सकती थी या फिर इस ट्यूमर का प्रभाव उसकी माँ पर भी पड़ सकता था। और जहाँ-जहाँ ऐसे चमत्कार होते रहेंगे, वहाँ-वहाँ हम नमस्कार करते रहेंगे।

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