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जानिये श्रीराम के आगमन में मनाई जाने वाली दीपावली में क्यों होती है माँ लक्ष्मी की पूजा

दीपावली की यह कहानी नहीं जानते होंगे आप। 

जानिये श्रीराम के आगमन में मनाई जाने वाली दीपावली में क्यों होती है माँ लक्ष्मी की पूजा
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'दीपावली' का अर्थ

'दीपावली' का अर्थ

'दीपावली' का नाम यूँ ही दीपावली नहीं है। इस शब्द का बहुत ही खूबसूरत अर्थ है। दीपावली का संधि विच्छेद होता है- दीप+आवली। जिसका अर्थ होता है दीपों की आवली यानि दीपों की कतार, पंक्ति या लड़ी। यही तो वजह है कि दीपावली के दौरान दीपो को इतना अधिक महत्त्व दिया जाता है

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सिर्फ हिन्दू धर्म का नहीं है यह त्यौहार

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हम अक्सर यही कहते हैं कि दीपावली मुख्य रूप से हिन्दू धर्म का त्यौहार है। पर आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिक्ख और जैन धर्म में भी दीपावली बड़ी धूम-धाम से मनाई जाती है। वैसे बदलते वक़्त के साथ सभी भारतवासी ही यह त्यौहार मानाने लगे हैं, धर्म का कोई भेद नहीं रह गया है।

क्यों की जाती है लक्ष्मी जी की पूजा?

क्यों की जाती है लक्ष्मी जी की पूजा?
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जब कहानी यह है कि दीपावली के दिन भगवान राम वनवास से लौटकर आए थे, तो फिर इस दिन भगवान राम के बजाए लक्ष्मी जी की पूजा क्यों की जाती है। इसकी वजह यह है कि पांच दिनी दीपावली उत्सव के पहले दिन यानि धनतेरस को देवताओं और राक्षसों के बीच समुद्र मंथन के दौरान लक्ष्मी जी भी अवतरित हुई थी। उसके बाद दीपावली के दिन लक्ष्मी जी ने विष्णु जी को अपना पति स्वीकार कर लिया था, और वो उन्हें लेकर वैकुण्ठ धाम चले गए थे। माना जाता है कि इस दिन लक्ष्मी जी प्रसन्न रहती हैं। ऐसे समय में उनकी पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती हैं।

इनकी की भी की जाती है पूजा

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दीपावली के दिन लक्ष्मी जी के साथ ही गणेश जी और सरस्वती जी की भी पूजा की जाती है। गणेश जी तो विघ्नहर्ता हैं और उनकी पूजा हर शुभ कार्य में सबसे पहले की जाती है। वहीं सरस्वती जी विद्या और ज्ञान की देवी हैं और दीपावली अंधकार पर उजाले की जीत का उत्सव है। इसी वजह से अपने मन के अंधकार पर जीत पाने के लिए इस दिन माँ सरस्वती जी की पूजा भी की जाती है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में माँ काली की भी आराधना की जाती है।

अलग-अलग हैं कारण

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हिन्दू धर्म की तरह जैन धर्म में दीपावली का त्यौहार भगवान राम के आगमन की ख़ुशी में नहीं मनाया जाता है। जैन धर्म की मान्यता के अनुसार इस दिन जैन धर्म के चौबीसवें और आखिरी तीर्थंकर भगवान महावीर को मोक्ष की प्रप्ति हुई थी। वहीं सिक्ख लोग इस दिन को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मानते हैं। इस दिन गुरु हरगोबिंद सिंह जी ने अपने साथ 52 राजाओं को मुस्लिम शासक जहांगीर की कैद से मुक्त कराया था और वे सब अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पहुँचे थे। कार्तिक अमावस्या के दिन ही महाभारत काल में पांडव 12 साल के अज्ञातवास से लौटकर आए थे और इसी की ख़ुशी में उनकी प्रजा ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था।

नेपाल में कहा जाता है तिहार

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नेपाल और भारत के कुछ राज्य जैसे कि असम, सिक्किम और दार्जिलिंग में दीपावली को तिहार के नाम से जाना जाता है। देश के अन्य राज्यों की तरह ही यहाँ भी यह त्यौहार पांच दिनों तक मनाया जाता है, और लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। लेकिन यहाँ ख़ासतौर पर गायों और कुत्तों की भी पूजा की जाती है।

यहाँ होता है राष्ट्रीय अवकाश

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दीपावली भारतवर्ष का सबसे बड़ा त्यौहार है तो यहाँ इस दिन राष्ट्रीय अवकाश होना लाज़िमी है। लेकिन दीपावली पर सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि त्रिनिदाद & टोबैगो, म्यांमार, नेपाल, मॉरिशस, गुयाना, सिंगापुर, सूरीनाम, मलेशिया, श्रीलंका और फिजी में भी राष्ट्रीय अवकाश दिया जाता है।

लक्ष्मी जी पधारती हैं द्वार

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दीपावली के दिन शाम को लक्ष्मी पूजन के बाद घर के सभी द्वार खुले रखे जाते है। माना जाता है कि दीपावली के दिन लक्ष्मी जी धरती पर आती है और अपने भक्तों के घर जाती है। इसलिए अगर आप अपने द्वार बंद रखेंगे तो वे लौट जाएंगी। इसके साथ ही घर में कुमकुम से उनके पद्चिन्ह भी  बनाए जाते है। लक्ष्मी जी के स्वागत के लिए दीपक भी लगाए जाते है, रंगोली बनाई जाती है और घर को बिलकुल साफ़ रखा जाता है। आजकल तो तरह-तरह की लइटिंग्स लगाने का भी चलन बढ़ा हैं।

शुभ दीपावली

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आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। आप खूब मजे करिए। पकवान खाइये, नए-नए कपड़े पहनिए और अपने परिवार के साथ अच्छा वक्त बिताइए। आपकी यह दीपावली मंगलमय हो।

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