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तो ऐसे जीता था लफंगे परिंदे रोहित ने सीधी मगर अकड़ू सी चश्मिश अमायारा का दिल! 

इस स्टोरी को नहीं पढ़ा तो मिया तुमने क्या ख़ाक इश्क किया 

तो ऐसे जीता था लफंगे परिंदे रोहित ने सीधी मगर अकड़ू सी चश्मिश अमायारा का दिल! 
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कोई खामोश है इतना, बहाने भूल आया हूँ।

किसी की इक तरन्नुम में, तराने भूल आया हूँ।

मेरी अब राह मत तकना कभी ए आसमां वालों,

मैं इक चिड़िया की आँखों में, उड़ानें भूल आया हूँ।

प्यार एक एहसास है, जिसे सिर्फ़ महसूस किया जा सकता है, प्यार एक साज़ है जिसे सिर्फ गुनगुनाया जाता है। अगर सिर्फ प्यार पर ही लिखूँ तो मेरे लिए लिखने में जिंदगी बीत जायेगी और आपके लिए पढ़ने में। वैसे भी कहा जाता है, अमृत हो या जहर घूंट-घूंट ले कर ही पीना चाहिए और फिर प्यार तो दोनों ही है।

आपकी फिकर है मुझे, चिंता मत कीजिये आपको प्यार का ओवर डोज़ नहीं दूंगा। बस एक प्यारी सी कहानी सुना रहा हूँ जो एक लफंगे परिंदे रोहित और सीधी मगर अकड़ू सी लड़की अमायरा से जुड़ी हुई है।

जानते हैं कैसे यह दोनों एक हुए और प्यार की एक प्यारी सी मिसाल बन गए।

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उनसे मिली नज़र और हम अपना खुदा बदल बैठे.. 

उनसे मिली नज़र और हम अपना खुदा बदल बैठे.. 

उनसे मिली नज़र और हम अपना खुदा बदल बैठे, पल भर में शहर क़ाज़ी से काफिर बन बैठे।

नहीं-नहीं दोस्तों, में कोई बगावात नहीं कर रहा पर क्या करूँ प्यार की भाषा ही ऐसी है जो रूढ़िवादियों को बगावत ही लगती है। अब देखो न यह इश्क ही तो था जिसने 70 साल के ग़ालिब को भी यह कहने पर मजबूर कर दिया कि "इश्क वो आतिश है ग़ालिब जो लगाए न लगे बुझाये न बुझे।" खैर ग़ालिब को दाद देना छोड़ते हैं और कहानी पर आते हैं।

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रोहित और अमायरा 

रोहित और अमायरा 
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वैसे तो यह कहानी बिंदास लफंगे परिंदे रोहित और एक प्यारी मगर अकड़ू लड़की अमायरा की है। मगर यदि आप भी प्यार करते हैं तो यह कहानी आपको अपनी कहानी सी लगेगी। तो बारिश का मौसम था, शाम का वक्त था। हल्की-हल्की बारिश की बूँदें बरस रही थी, फिज़ाओं में वही सौंधी-सौंधी मिट्टी की खुशबू महक रही थी। मतलब प्यार लिखने और प्यार करने के लिए बिल्कुल परफेक्ट माहौल। 

बारिश का मौसम और हुस्न का इंतज़ार 

बारिश का मौसम और हुस्न का इंतज़ार 
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इसी मौसम को एन्जॉय करते हुए, हर घर की छतों पर झांकता, हुस्न के दीदार के इंतजार में रोहित अपनी छत पर घूम रहा था। साथ ही सालों से बंद पड़े मकान में जल रही लाइट भी रोहित को अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। जो जनाब आज तक मंदिर की सीढ़ी तक नहीं चढ़ा वो आज आँख बंद करके सच्चे दिल से अच्छे पड़ोसी की कामना करने लगा। अब तक तो आप समझ ही गए होंगे रोहित की नज़र में अच्छे पड़ोसी की परिभाषा क्या होती है।

किसी चीज़ को सच्चे दिल से चाहो तो पूरी कायनात उसे मिलाने में लग जाती है 

किसी चीज़ को सच्चे दिल से चाहो तो पूरी कायनात उसे मिलाने में लग जाती है 
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वो शाहरुख़ ने क्या कहा था "इतनी शिद्दत से तुम्हें पाने की कोशिश की है कि हर ज़र्रे ने हमे मिलाने की साजिश की है।" ऐसा ही हुआ रोहित के साथ भी, आँखे खोली ही थी कि एक प्यारी, खूबसूरत सी लड़की आँखों पर मोटा सा चश्मा लगाए हुए कड़ी थी। चश्मा इतना मोटा था मानों दुनिया के सारे बड़े नॉवेल इन्होनें ही लिखे हों। बालों को तो इतना कस के बाँधा हुआ था कि मज़ाल हवा इनके साथ थोड़ी भी शरारत कर ले। 

यह रोहित के टाइप की नहीं थी 

यह रोहित के टाइप की नहीं थी 
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वैसे तो यह रोहित के टाइप की नहीं थी, मगर वह कहते हैं न रेगिस्तान में एक बूंद पानी भी विशाल सागर सा लगता है। वैसे ही रोहित को अमायरा भी स्वर्ग की किसी परी से कम नहीं लग रही थी। वह अमायरा को इस तरह घूर रहा था मानों सालों से भूखा व्यक्ति खाने को घूरता है। आखिर अमायरा की नज़र भी इन पर पड़ ही गई, रोहित ने अपने दिल फेंक आशिक वाले मिजाज़ से अमायरा को एक स्माइल कर दी जो अमायरा को बिलकुल पसंद नहीं आई और वह गुस्से से नीचे चली गई। इधर रोहित भी अपनी आशिकी ख़त्म करके नीचे आ गया।   

सुबह होते ही रोहित छत की ओर चल दिया 

सुबह होते ही रोहित छत की ओर चल दिया 
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जैसे-तैसे रोहित ने रात काटी और सुबह होते ही वह छत की ओर चल दिया। एक तरफ रोहित अमायरा की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतज़ार कर रहा था, वहीं अमायरा सीढ़ियों से ही रोहित को देख कर छत पर ही नहीं आ रही थी। आखिर थक हार कर बुझा चेहरा लिए रोहित भी नीचे चला गया और तैयार होकर कॉलेज के लिए निकल गया। आज रोहित थोड़ा उदास था, मगर जैसे ही वह क्लास में दाखिल हुआ उसका चेहरा खुला का खुला ही रह गया।

जिसको ढूंढा बाहर-बाहर वह बैठा था भीतर छुपके 

जिसको ढूंढा बाहर-बाहर वह बैठा था भीतर छुपके 
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जिस अमायरा का उसने घंटों छत पर इंतज़ार किया उसने उसके ही कॉलेज में उसकी ही क्लास में एडमिशन लिया हुआ था। इधर रोहित फूले नहीं समा रहा था और उधर अमायरा इस बात से चिढ़ रही थी कि इसे यहाँ भी झेलना पड़ेगा। मगर एक क्लास में होने के कारण अमायरा को रोहित के कई किस्से सुनने को मिले जो उसकी नफरत को बढ़ाने के लिए काफी थे। दोस्तों एक बात तो आप सब मानेंगे ही, क्लास की पुरानी लड़कियां नई आई लड़की के कान भरने में कोई कसर नहीं छोड़ती, ख़ासकर क्लास के सबसे क्यूट बन्दे के खिलाफ तो सबसे ज्यादा भड़काती हैं। 

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दिन बीतते गए 

दिन बीतते गए 
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ऐसे ही दिन बीतते चले गए, रोहित अमायरा से बात करने की कोशिश करता मगर अमायरा उसकी हर कोशिश पर पानी फेर देती। ऐसा नहीं था अमायरा रोहित को बिलकुल पसंद नहीं करती थी। वह भी रोहित को पसंद करने लगी थी। मगर वह एक अलग लड़की थी, चेहरा चाहे वह हिटलर जैसा खडूस बनाती हो मगर उसके अन्दर भी एक प्यारा सा स्वीट सा दिल था। उसने कभी सपनें में भी नहीं सोचा था उसका प्रिंस चार्मिंग रोहित जैसा होगा। 

इधर लफंगे परिंदे के भी पर फड़-फड़ाने लगे थे   

इधर लफंगे परिंदे के भी पर फड़-फड़ाने लगे थे   
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इधर लफंगे परिंदे के पर भी फड़-फड़ाने लगे थे, वह भी बदलने लगा था। जिस रोहित को हर चेहरे से प्यार हो जाता था उस रोहित के दिल में अब बस एक ही चेहरा बसने लगा था। अमायरा भी इस बात से अनजान नहीं थी मगर उसने दिल को रोक रखा था। आखिर एक दिन हिम्मत करके शाम के वक्त छत पर रोहित ने अमायरा को अपने दिल की बात बता ही दी। और जवाब वही आता है जो हम सबको पता है 'न'...     

जब अमायरा ने न कहा 

जब अमायरा ने न कहा 
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कहीं न कहीं रोहित भी यह जवाब जानता था मगर फिर भी उसे बहुत बुरा लगा। सचमुच प्यार के सपने जितने सुहावने होते हैं उनके टूट कर बिखर जाने पर दर्द भी उतना ही होता है। बारिश का मौसम था, बादल आ चुके थे, बिजलियाँ चमकने लगी, तेज़ हवाएँ सी चलने लगी, तूफान सा आने लगा मगर जो अभी रोहित के दिल में चल रहा था उसकी तुलना में यह तूफान काफी शांत था। तभी तो वह इन सब की परवाह किये बिना वहीं खड़ा रहा। और अमायरा के घर की तरफ देखता रहा, उसी तरह जिस तरह एक-टक चकोर चाँद को देखता है।

यही हाल अमायरा का भी था 

यही हाल अमायरा का भी था 
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इधर अमायरा भी रात भर नहीं सो पाई थी, दोस्तों किसी को न कहना कितना मुश्किल भरा होता यह उसका मायूस चेहरा और सूजी हुई आँखें बता रही थी। आज अमायरा सुबह जल्दी छत पर आ गई, आज वह बड़ी बैचेन लग रही थी। बार-बार वह रोहित के दरवाजे की ओर देखती मगर रोहित उसे कहीं नहीं दिखता। अमायरा अब अपने आप पर गुस्सा करने लगी थी, साथ ही वह रोहित को भी कोसती रही। दोस्तों किसी बड़े शायर ने कहा है "मोहब्बत में बुरी नियत से कुछ भी सोचा नहीं जाता, कहा जाता है बेवफा मगर समझा नहीं जाता।"

यह इश्क भी अज़ीब बीमारी है 

यह इश्क भी अज़ीब बीमारी है 
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जब बहुत देर हो गई और रोहित नहीं आया तो अमायरा से अब रहा नहीं गया। दीवार के पास रखी चंद ईंटो के ज़रिये वह रोहित के घर की ओर झाँकने की नादान हरकत करने लगी, जैसे ही अमायरा की नज़र छत के कोने पर बेसुध पड़े रोहित पर पड़ी तब वह घबरा गई। वह बिना देर किये दीवार फांद कर रोहित के पास आ गई जहाँ उसका दिल पहले ही आ चुका था। रोहित के गीले कपड़े ठण्ड से ठिठुरता उसका पूरा बदन साफ़ यह गवाही दे रहा था की उसकी रात कैसे बीती थी। अमायरा जैसे-तैसे उसे नीचे ले गई। उसके कपड़े निकाले और उसके सिर पर ठंडे पानी की पट्टी रखने लगी। आख़िरकार अमायरा की मेहनत रंग लाई और रोहित को होश आ गया। इधर रोहित को होश आया ही था और अमायरा ने उसके गालों पर एक जोरदार थप्पड़ मार दिया और कस कर उसे गले लगा लिया।

सचमुच यारों यह प्यार भी बड़ी अज़ीब बीमारी है। आपको यह कहानी कैसी लगी जरुर बताइयेगा।

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क्या आपको कभी किसी से प्यार हुआ है?

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