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आईपीएल 2017 पर मंडरा रहे हैं खतरों के बादल, क्या इस साल हो पाएगा सफल आयोजन?

जानें कहाँ आ रही है आईपीएल के सामने दिक्कतें।

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' (BCCI)' 2007 -

पुराने पाप आड़े आते ही हैं

पुराने पाप आड़े आते ही हैं

माना कि आईपीएल आज भी लोगों का चहेता बना हुआ है, लेकिन वक़्त के साथ इसका क्रेज़ कुछ तो कम हुआ ही है। उस पर भी 2013 में हुए आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग काण्ड ने इसकी साख की धज्जियां तो उड़ा ही दी है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड अपने दामन पर लगे इस दाग को अब तक नहीं धो पाया है। इस काण्ड के बाद से ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गयी लोढ़ा कमेटी इसकी जांच कर रही है, और उसने क्रिकेट को साफ़ रखने के लिए कई गाइडलाइन्स भी जारी किये हैं।

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क्या है लोढ़ा कमेटी

क्या है लोढ़ा कमेटी
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सर्वोच्च न्यायालय ने 2015 में आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग में दोषी पाए गए अधिकारियों व् अन्य लोगों के लिए सजा निर्धारित करने और क्रिकेट के उद्धार के लिए देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी। इस समिति ने भारतीय क्रिकेट की दशा सुधारने के लिए बीसीसीआई को कई सुझाव जारी किए थे।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश पड़ रहा है भारी

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हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि जब तक सारे राज्य के संघ लोढ़ा समिति के सुझाव नहीं मान लेते बीसीसीआई उन्हें कोई फण्ड जारी नहीं करे।

कहाँ आ रही है दिक्कत

कहाँ आ रही है दिक्कत
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बीसीसीआई के सचिव अजय शिर्के का इस सम्बन्ध में कहना है कि उन्होंने सभी राज्य संघ को इस आदेश से अवगत करवा दिया है, क्योकि वे बहुमत के बिना किसी भी सुझाव पर अमल नहीं कर सकते हैं। 

समिति को भेजी है एक रिपोर्ट

समिति को भेजी है एक रिपोर्ट
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बीसीसीआई सचिव ने ये भी कहा कि हमें समझ नहीं आ रहा है कि यह कैसे हो सकता है। हमने समिति को पहले ही एक रिपोर्ट भेजकर आईपीएल से सम्बंधित अधूरे कामों की सूची भेज दी हैं। अब हमारे पास बिलकुल समय नहीं बचा है।

यह हैं प्रमुख सुझाव

यह हैं प्रमुख सुझाव
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लोढ़ा समिति के सुझावों में मुख्य रूप से कहा गया है कि एक राज्य में एक ही क्रिकेट संघ हो। जबकि अभी कई राज्यों में दो से तीन संघ काम कर रहे हैं। इसके अलावा सदस्यों की उम्र को लेकर भी प्रावधान हैं।

यह भी है वजह

यह भी है वजह
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राज्यों को फण्ड न देने के अलावा आईपीएल पर एक और संकट यह भी है कि लोढ़ा समिति के सुझावों के अनुसार आईपीएल और अन्य घऱेलू मैचों के बीच 15 दिनों का अंतर होना चाहिए। इस वजह से बीसीसीआई को आईपीएल और उसके बाद होने वाली चैंपियंस लीग में से किसी एक को चुनना होगा।

खर्च की सीमा निर्धारित करने का आदेश भी दिया सुप्रीम कोर्ट ने

खर्च की सीमा निर्धारित करने का आदेश भी दिया सुप्रीम कोर्ट ने
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अपने एक और आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक लोढ़ा समिति के अनुसार बीसीसीआई के खर्चों का सीमा निर्धारण एवं एक स्वत्रन्त्र ऑडिटर की नियुक्ति नहीं हो जाती है तब तक बीसीसीआई कोई भी अनुबंध न करे। इसी वजह से आईपीएल की बोली भी रुकी हुई है।

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क्या लोढ़ा समिति के सुझावों से आप सहमत हैं?