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सर सी.वी. रमन की 128 वीं जयंती पर इन दुर्लभ तस्वीरों के जरिये जानें उनकी ज़िन्दगी का सफर 

इन तस्वीरों को नहीं देखा होगा आपने। 

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तिरुचिरापल्ली में हुआ जन्म

तिरुचिरापल्ली में हुआ जन्म

सर सी.वी.का जन्म 7 सितम्बर को दक्षिण भारत के तिरुचिरापल्ली में हुआ था। उन्होंने 1904 में भौतिकी में गोल्ड मैडल के साथ बी.ए. पास किया था। इसके साथ ही उन्होनें विशेष योग्यता के साथ भौतिकी में एम.ए. भी किया था।

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पिता थे शिक्षक

पिता थे शिक्षक
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उनके पिता का नाम चंद्रशेखरन रामनाथन अय्यर था। वे गणित और भौतिकी के प्राध्यापक थे। वे अक्सर ही अपने पिता की किताबों में से पढ़ा करते थे। इससे साफ़ जाहिर होता है कि सर रमन को बचपन से ही घर पर भी पढ़ाई का ही माहौल मिला था।

सी.वी. रमन की माताजी

सी.वी. रमन की माताजी
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सी.वी. रमन की माँ का नाम पार्वती देवी था। उन्हें सर रमन के पिता ने पढ़ना-लिखना सिखाया था।

सर रमन कॉलेज में पढ़ाते हुए 

सर रमन कॉलेज में पढ़ाते हुए 
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सर रमन ने अपने करियर के शुरुआती 10 सालों में सरकारी नौकरी की थी। अपनी सिविल सर्विस के साथ ही वे रिसर्च भी करते रहते थे। फिर 1917 में वे कलकत्ता विश्वविद्यालय में 'पलित प्रोफ़ेसर' के पद पर नियुक्त किये गए। वे रिसर्च प्रोफ़ेसरशिप के साथ ही लेक्चर्स भी दिया करते थे। वे विद्यार्थियों के बीच बहुत लोकप्रिय थे।

रमन प्रभाव ने रचा इतिहास

रमन प्रभाव ने रचा इतिहास
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सर रमन ने अपने जीवनकाल में कई महत्वपूर्ण शोध किए। लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा 'रमन प्रभाव' की खोज के लिए जाना जाता है। 'रमन प्रभाव' कि खोज के स्मरण में हर वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है।

महात्मा गाँधी के साथ सर रमन की दुर्लभ तस्वीर

महात्मा गाँधी के साथ सर रमन की दुर्लभ तस्वीर
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सी.वी. रमन महात्मा गाँधी से बहुत ज्यादा प्रभावित थे। वे चाहते थे कि राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को पूरे देश में विशेष सम्मान दिया जाए।

सी.वी. रमन भौतिक वैज्ञानिक Niels Bohr के साथ

सी.वी. रमन भौतिक वैज्ञानिक Niels Bohr के साथ
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Niels Bohr डेनिश भौतिक वैज्ञानिक थे। उन्होनें क़्वांटम फिजिक्स के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया था। अपनी खोज के लिए उन्हें 1922 में नोबेल पुरस्कार भी मिला था। सी.वी. रमन ने उनसे कुछ मुलाकातें की थी और कहा भी जाता है कि सर रमन को नोबेल पुरस्कार दिलाने में उनका भी योगदान था।

क्या सिर्फ याद करने से ही काम चल जाएगा?

क्या सिर्फ याद करने से ही काम चल जाएगा?
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यह सिर्फ एक दिन की बात नहीं है। ये हर उस दिवस की बात है जो हम किसी न किसी महापुरुष या किसी घटना के स्मरण में मनाते है। हम बातें तो कर लेते हैं, लेकिन कोई कदम नहीं उठाते। यह जरुरी है कि सर रमन की जयंती पर बस उनके बारे में बात न करके विज्ञान के क्षेत्र में विकास के प्रयास किये जायें। बेशक हमारे वैज्ञानिक बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, पर हमें और हमारी सरकार को भी उनका साथ देने की जरुरत है।

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क्या भारत में विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे विकास की स्थिति संतोषजनक है?