क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक गाँव ऐसा भी है, जहाँ हर कोई है बौना?

बौने के इस गाँव के बारे में जानकर आप हैरान रह जाएगें।

क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक गाँव ऐसा भी है, जहाँ हर कोई है बौना?
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वैसे तो हमारी इस दुनिया में कई अजीबो-गरीब चीज़े है जो हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं। यह गाँव भी किसी रहस्य से कम नहीं है। सामान्यतौर पर तो हजारों की जनसँख्या में कोई एक होता है जो बौना होता है।बौने लोगों का प्रतिशत हमारे बीच काफी कम है। क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा गाँव भी है जहाँ की आधी से ज्यादा आबादी बौनी है। इस गाँव के करीब आधे लोगों की लंबाई मात्र 2 फीट 1 इंच से लेकर 3 फीट 10 इंच तक ही है। इतनी अधिक संख्या में लोगों के बौने होने के कारण यह गाँव Dwarf Village के नाम से प्रसिद्ध है।
आइये जानते है इस गाँव की अजीब कहानी। 

जानिए कहाँ है यह गाँव

जानिए कहाँ है यह गाँव

बौनों का यह गाँव चीन के शिचुआन प्रांत के दूर-दराज़ पहाड़ी इलाके में स्थित है। गाँव का नाम यांग्सी है और यह गाँव 'ड्वार्फ विलेज ऑफ़ चाइना' के नाम से फेमस है।

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जानिए किस उम्र के बाद बच्चों की लम्बाई रुक गई

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ज़्यादातर मामलों में बच्चो की लम्बाई 5 से 7 वर्ष के बाद रुक गई।उनका कद अपनी उम्र के साथ नहीं बड़ा, वहीं  कुछ मामलों में बच्चों की लम्बाई सिर्फ 10 वर्ष तक ही बड़ पाई है। इसके बाद उनकी लम्बाई नहीं बड़ी और वो बौनें ही रह गये। 

1951 में आया पहला केस सामने

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गाँव के बुजुर्गो की मानें तो उनकी खुशहाल और सुक़ून भरी ज़िन्दगी कई दशकों पूर्व ही ख़त्म हो चुकी है। जब इस इलाके को एक खतरनाक बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया था। इसके बाद से इस इलाके के लोग कई अजीबो-गरीब हालात गुज़ार रहे हैं।

सिर्फ लम्बाई ही समस्या नहीं है

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यहाँ पर 5 से 7 वर्ष के बाद लम्बाई रुक जाना ही सिर्फ एक समस्या नहीं है। इसके अलावा भी कई स्वास्थ संबंधी समस्याओं से लोग जूंझ रहे हैं।

खबरें तो 1911 से आ रही थी

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इस इलाके में बौनों को देखे जाने की खबरें तो 1911 से आ रही हैं। इसके अलावा 1947 में एक अंग्रेज वैज्ञानिक द्वारा भी यहाँ सैकड़ो बौने देखे जाने की अफवाहे आई थी। लेकिन अधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि 1951 में हुई थी।

60 सालों से है रहस्य बरक़रार

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एकदम से अचानक क्या हुआ कि एक सामान्य कद काठी वाला गाँव, बौनों के गाँव में तब्दील हो गया? यह रहस्य वैज्ञानिक पिछले 60 सालों में भी नहीं सुलझा पाए हैं। वैज्ञानिक इस गाँव की मिटटी, पानी, हवा, वातावरण, अनाज आदि का कई मर्तबा अध्ययन कर चुके हैं। लेकिन फिर भी इस समस्या का कारण खोजने में नाकाम रहे हैं।

1997 में वजह बताई गई थी

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वर्ष 1997 में एक रिसर्च में इस बीमारी की वजह बताते हुए इस गाँव की मिटटी में पारा होने की बात कही गई थी।  इस बात को साबित नहीं किया जा सका और ये रहस्य आज तक बरकरार है।  

कुछ लोग जापान को इसका ज़िम्मेदार ठहराते हैं 

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वहीं कुछ लोगों का मानना है कि इसका कारण वह जहरीली गैसे है जो जापान ने कई दशकों पहले चीन में छोड़ी थी। हालाँकि एक तथ्य यह भी है कि जापान चीन के इस इलाके में कभी पहुँच ही नहीं पाया था। ऐसे ही समय-समय पर कई दाँवे किये गए लेकिन सही जवाब नहीं मिला।  

कुछ लोग भूत-प्रेत होने की वजह बताते हैं  

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गाँव के कुछ लोग इस सब के पीछे किसी बुरी ताकत का प्रभाव मानते हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि ख़राब फेंगशुई के चलते ऐसा हो रहा है। इसके अलावा कुछ लोग यह भी मानते हैं कि सब अपने पूर्वजों को सही तरीके से दफ़न नहीं करने की वजह से भी यह सब भुगत रहे हैं।  

क्या आप भी भूत प्रेत और बुरी शक्तियों में विश्वास करते हैं?