यह भारतीय डिशेज़ दरअसल हैं विदेशी, जानकर भी आप नहीं कर पाएंगे यकीन 

भारत में बनने वाली यह डिशेज़ नहीं हैं भारतीय। 

यह भारतीय डिशेज़ दरअसल हैं विदेशी, जानकर भी आप नहीं कर पाएंगे यकीन 
SPONSORED

भारतीय भोजन या भारतीय खाना अपने भीतर भारत के सभी क्षेत्र व राज्यों के अनेक पकवानों का नाम है। जैसे भारत मे सब कुछ अनेक और विविध है, भारतीय भोजन भी उसी तरह विविध है। पूरब-पश्चिम, उत्तर और दक्षिण भारत का आहार एक दूसरे से बहुत अलग है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिन Indian Dishes को हम बचपन से बड़े चाव के साथ खाते आ रहे हैं वह असल मे भारतीय है ही नहीं। आइये जानते हैं उन्ही Dishes के बारे मे। 

समोसा नहीं है भारत का 

समोसा नहीं है भारत का 

समोसा घर के सभी सदस्यों को बहुत भाता है और हर कोई इसे बहुत चाव से खाता है, पर आपको ये जानकर हैरानी होगी कि समोसा भारत का व्यंजन नही है। समोसा मध्यपूर्व से भारत आया और धीरे-धीरे भारत के रंग में रंग गया। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि दसवीं शताब्दी में मध्य एशिया में समोसा एक व्यंजन के रूप में सामने आया था। 13-14वीं शताब्दी में व्यापारियों के माध्यम से समोसा भारत पहुँचा। और आज ये हर घर की शान बना हुआ है।

RELATED STORIES

गुलाब जामुन भी है पराया 

गुलाब जामुन भी है पराया 
via

यह मिठाई भारत मे बहुत पसंद की जाती है लेकिन यह मिठाई मूल रुप से भूमध्य सागर और फारस से आई है जहां इसे luqmat al qadi के रूप में जाना जाता है। luqmat al qadi को गुलाब जामुन बनाने वाला देश हमारा भारत ही है और यह मिठाई बाकी सभी मिठाईयों से ज्यादा पसंद की जाती है।

 चाय का नाता है चीन से 

 चाय का नाता है चीन से 
via

भारत में अगर चाय न हो तो शायद बहुत से लोगों की सुबह की शुरुआत भी न हो। चाय एक लोकप्रिय पेय है जिसे भारत में बहुत पसंद किया जाता है। लेकिन चाय भारत से संबंधित नही है। ऐसा कहा जाता है कि एक दिन चीन के सम्राट शैन नुंग के रखे गर्म पानी के प्याले में, कुछ सूखी पत्तियाँ आकर गिरीं जिनसे पानी में रंग आया और जब उन्होंने उसकी चुस्की ली तो उन्हें उसका स्वाद बहुत पसंद आया। बस यहीं से शुरू हुआ चाय का सफ़र जो धीरे-धीरे भारत पहुँचा।

टेढ़ी जलेबी भी भारतीय नहीं 

टेढ़ी जलेबी भी भारतीय नहीं 
via

जलेबी केवल भारत में ही नही भारत के बाहर भी बहुत पसंद की जाती है। जलेबी मूल रूप से अरब और फारस से है। कुछ लोगों का मानना है कि जलेबी मूल रूप से अरबी शब्द है और इस मिठाई का असली नाम है जलाबिया। रस से परिपूर्ण होने की वजह से इसे यह नाम मिला। फारसी और अरबी में इसकी शक्ल बदल कर हो गई जलाबिया। उत्तर पश्चिमी भारत और पाकिस्तान में जहाँ इसे जलेबी कहा जाता है वहीं महाराष्ट्र में इसे जिलबी कहा जाता है और बंगाल में इसका उच्चारण जिलपी करते हैं।

 हमारा दाल-भात भी हमारा नहीं 

 हमारा दाल-भात भी हमारा नहीं 
via

दाल भात खाने मे बहुत ही स्वादिष्ट लगती है लेकिन यह भारत से नही है। दाल-भात मूल रुप से नेपाल से है और यह भारत के साथ साथ बांग्लादेश मे भी बहुत प्रसिद्ध है। दाल-भात को बनाना बहुत ही आसान है और यह भारत में लगभग सभी घरों मे बनाया जाता है।

राजमा है मेक्सिको से 

राजमा है मेक्सिको से 
via

राजमा-चावल भारत का प्रसिद्ध भोजन है। राजमा या अंग्रेज़ी में किडनी बीन, को उसके रंग और आकार के कारण गुर्दे का नाम दिया गया है। यह केंद्रीय मेक्सिको और ग्वाटेमाला से भारत लाया गया था। इसे अंग्रेज़ी में रेड बीन भी कहा जाता है। राजमा भारत के खानपान का एक अंग है। इसे यहाँ अधिकतर चावल के संग परोसा जाता है और बहुत पसंद भी किया जाता है।

पुर्तगाल से है शुक्तो

पुर्तगाल से है शुक्तो
via

शुक्तो बंगाली व्यंजन है और इसे बंगाल मे काफी चाव से खाया जाता है, लेकिन यह मूल रुप से पुर्तगाल से है। हमारे भोजन पर पुर्तगाली प्रभाव विशेष रूप से रहा है, खा़सतौर से गोवा के भोजन में। यह प्रभाव धीरे-धीरे बंगाल भी पहुँच गया। भारतीयों ने इसमें और अधिक सब्जियां और दूध जोड़कर इसे और अधिक भारतीय बनाकर भोजन को प्रभावित किया।

 नान भी है पराई 

 नान भी है पराई 
via

नान के बग़ैर बटर चिकन और कढ़ाई पनीर अधूरा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि नान पराठे की जगह नहीं ले सकती, लेकिन इसमें भी दो राय नहीं है कि इसने खाने के शौक़ीन लोगों के ज़ुबान पर अपना ज़ायक़ा लगा दिया है। अब तो अमरीका और यूरोपियन देशों में भी लोग इसे चिकन टिक्के के साथ चटख़ारे लेकर खाते हैं। नान मुग़ल काल में भारत आई थी। हालंकि ख़मीरी रोटी का संबंध ईरान से है लेकिन ये फ़ारसी व्यंजन का ही हिस्सा है।

क्या यह जानकारियां पढ़ने के बाद आप भी हुये हैरान?