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'शहीद बदलूराम' को समर्पित यह गाना, शहीद होकर भी देशसेवा करता है एक जवान 

'बदलूराम का बदन' के पीछे है बहुत ही रोचक कहानी। 

'शहीद बदलूराम' को समर्पित यह गाना, शहीद होकर भी देशसेवा करता है एक जवान 
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हम सभी जानते है कि जब हम रात में अपने घरों में सुकून की नींद ले रहे होते हैं, तो दूर कहीं कोई उस नींद के लिए अपनी जान पर खेल रहा होता है। मैं हमारे देश के वीर सैनिकों के बारे में बात कर रही हूँ। ये वीर वो होते हैं जो हमे व्यक्तिगत रूप से न जानते हुए भी हमारे लिए अपनी जान न्योछावर कर देते हैं। हम इनका क़र्ज़ तो मानते है लेकिन इनसे और इनकी बहादुरी से जुड़े कई किस्सों को जानने की कोशिश भी नहीं करते हैं। आज मुझे ऐसे ही एक बहुत ही दिलचस्प और दिल को छू लेने वाली कहानी के बारे में पता चला जो मैं आपके साथ साझा करना चाहूंगी।
तो आइये जानते हैं आखिर क्या है ये कहानी। 

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ये कहानी है बदलूराम की 

ये कहानी है बदलूराम की 

अभी कुछ देर पहले ही मैं बात कर रही थी, कैसे ये वीर जवान देश और देशवासिओं के लिए अपनी जान न्योछावर कर देते हैं। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती, कुछ सैनिक ऐसे भी होते हैं जो शहीद होने के बाद भी कई जाने बचा लेते है। बदलूराम भी भारतीय सेना के ऐसे ही एक जवान थे। जो आज से लगभग 75 साल पहले भारतीय सेना के आसाम रेजिमेंट का हिस्सा थे, लेकिन उनका नाम आज भी आसाम रेजिमेंट का हर एक जवान जानता है।  

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दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हुए थे शहीद 

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1939 के करीब द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ गया था, जो लगभग 1945 तक चला। द्वितीय विश्व युद्ध के अंतर्गत ही 1944 में 'कोहिमा की लड़ाई' में भारत जापान के खिलाफ लड़ा था और उस दौरान भारतीय सेना का यह वीर जवान शहीद हो गया था।  

शहीद होने के बाद भी बचाई कई जाने 

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बहादुर बदलूराम को उनकी शहादत के लिए तो याद रखा ही जाता लेकिन उन्होंने शहीद होने के बाद भी कई सैनिकों की जान बचाकर मिसाल कायम कर दी। असल में हुआ यह कि उनके रसद प्रबंधक बदलूराम के शहीद होने के बाद भी उनके नाम का राशन लेते रहे। यह सिलसिला कुछ महीनों तक चलता रहा और जब जापान की सेना ने भारतीय सेना के दस्ते को घेर लिया और राशन आना बंद हो गया तो बदलूराम के नाम से स्टॉक में रखा राशन ही दस्ते के काम आया और कई जवानों की जान बच गई।  

आसाम रेजिमेंट उन्हें अब भी करती है याद 

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किसी का एहसान कोई कैसे चुकाए ये भी हम भारतीय सेना से सिख सकते हैं। मेरे और आपके लिए बदलुराम ने जो किया वो छोटी बात हो सकती है।  लेकिन आसाम रेजिमेंट आज भी उनके सम्मान के एक कार्यक्रम करती है।  इतना ही नहीं उनके नाम पर एक गाना भी बनाया गया है, जिस पर रेजिमेंट के सभी जवान थिरकते भी हैं।   


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बदलूराम का बदन ज़मीन के नीचे हैं 

आपने इन जवानों की जंग की कहानियां सुनी होंगी और इन्हें परेड में कदमताल मिलाते हुए भी देखा होगा। लेकिन इस वीडियो में आप इन्हें एक ताल पर थिरकते हुए देखिये। यक़ीन मानिए आपका दिल खुश हो जाएगा। आसाम रेजिमेंट के युवा उनकी ट्रेनिंग खत्म होने के बाद शिलॉन्ग के रेजिमेंटल सेंटर में कसम परेड के दौरान 'बदलूराम का बदन ज़मीन के नीचे है' गाने पर थिरकते हैं। अगर आप उनका यह डांस देखना चाहते है तो इस विडियो पर नज़र ज़रूर डालें ।

1946 में अस्तित्व में आया 'बदलूराम का बदन' 

1946 में अस्तित्व में आया 'बदलूराम का बदन' 
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'बदलू का बदन' को 1946 में मेजर एम.टी. प्रोक्टर ने कंपोज़ किया था। साथ ही इसका संगीत 'John Brown's Body' से लिया गया है।  

भारतीय सेना को सलाम 

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भारतीय सेना का क़र्ज़ तो हम यूँ भी नहीं चुका सकते हैं। लेकिन उनके बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानने की कोशिश तो कर ही सकते है। हम जितना ज़्यादा उन्हें जानेंगे उतना उनके करीब महसूस करेंगे। इन बहादुरों के बारे में ऐसे कई अविश्वसनीय किस्से है, जिन्हें सुनकर आप देशभक्ति की भावना से ओत -प्रोत हो जाएंगे।
तो आइए साथ मिलकर इन्हें सलाम करते हैं! 

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क्या आपको नहीं लगता कि हम अक्सर देश के सैनिकों को भूल जाया करते हैं?

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