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इंदौरी चच्चा- दंगल का यह गाना सुनकर बचपन याद आगिया भिया, अपने को भी बापू ऐसे ही कूटते थे!      

भिया कसम खा के केरिया हूँ इनका दर्द देख कर अपना दर्द याद आगिया। 

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सरकारी माटसाहब बापू 

सरकारी माटसाहब बापू 

भिया बापू का सबसे भयानक प्रकार होता है सरकारी माटसाहब बापू। जिसके भी बापू गवर्मेंट टीचर है उनका दर्द में अच्छे से समझ सकता हूँ। एक तो इनका बच्चों को कूटने में हाथ गजब का होता है ऊपर से स्कूल के बारे में इनकू सब खबर होती है तो झूठ बोलने से तो रिये। सबसे बड़ी बात अपने स्कूल के टीचर भी इनके दोस्त और उनकू भी ये कह के रखते थे, सर इस्कू दिल खोल के मारना आप तो। बिचारा छोरा ढोल जैसा घर पे भी बजता और स्कूल में भी।   

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स्पोर्ट लवर बापू 

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ऐसे बापू की प्रजाति कम ही पाई जाती है, नी मतलब अपने यां तो ज्यादातर न्यूज़ देखने वाले ही होते हैं। यह तो अब भारत सरकार ने भी घोषित कर दिया है जो बापू न्यूज़ नी देखेंगे उनको बच्चे अपना बापू नी मानेंगे। हमारे यहाँ बापू के ही नहीं सकते की उनको मैच देखना है। वो तरीके से अपने छोरे को केते हैं जो कि पढ़ने का नाटक कर रहा है। क्योंरे मैच नी देख रिया? चल टीवी चालु कर ले स्कोर देख ले, फिर बंद कर देना। दरअसल मैच देखना इनकू है पर बहाना तो चाइये।  

बिजनेसमैन बापू 

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ऐसे बापू प्रायः दो चार दिन में एक बार ही देखे जाते है, क्योंकि इनके पास जादा टाइम नी रेता। मिलते हैं तो भी छोरे को पैसे बनाने के तरीके ही बताते हैं। सबसे बड़ी बात इनके छोरे भी बिलकुल उलटे ही निकलते हैं। कुछ एक ही होते हैं जो अपने बापू के क़दमों पर चलते हैं, बाकी सब तो उलटे ही चलते हैं।  

गवर्मेंट ऑफिसर बापू 

गवर्मेंट ऑफिसर बापू 
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यह वो ही प्रजाति होती है जिनकी गाड़ी की आवाज सुनके बच्चे टीवी बंद करके पढ़ने बैठ जाते हैं। हाँ भिया! वही जिनके घर में अपने बेटे से जादा बगल वाले शर्मा जी के लड़के ने क्या किया उसके चर्चे होते हैं। इनके आने के बाद घर पे भी दफ्तर जैसे ही हालत बन जाते हैं, सब चुप कोई कुछ नी बोलता। अन्दर सबके बहुत कुछ चल रिया होता है। असली टोचन तो इन बापू के घर में होता है।   

कवी बापू 

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यह वाली प्रजाति सबसे सई प्रजाति होती है। वो मेडिकल में जैसा मेंडक का उपयोग किया जाता है ना वैसा ही उपयोग ये अपने छोरे-छोरी का करते हैं। मतलब जोन से भी रस में यह नया एक्स्पिरिमेंट करते हैं उसका सबसे पहले असर अपने बच्चों पे ही करते हैं। अगर सुनने के बाद वे सही सलामत रहे तो ही उसे लोगों को सुनाते हैं।    

पूराने गाने सुनने वाले बापू 

पूराने गाने सुनने वाले बापू 
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भिया खबरदार जो ऐसी प्रजाति के बापू के सामने हनी सिंह का नाम भी ले दिया फिर तो खैर नी है तुम्हारी। भिया मतलब कम से कम 4-5 घंटे का भाषण तो मान ही लो। उसमें आधे-अधूरे गाने भी जिनके बोल इधर से उधर हो जाते हैं। यह यहीं नहीं रुकते जब भी इनको याद आएगा ये तब तुमको सुनाएंगे भिया, कुछ दिनों बाद तो तुम खुद अपने आप को हनी सिंह ही मानने लग जाओगे।     

आँख दिखाने वाले बापू 

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ऐसे बापुओं की प्रजाति जादा बोलती नी है बस उनकी आँख ही काफी है। घर में कोई मेहमान आये और छोरा बहुत ही आग मूत रिया है तो बस इनको एक बार छोरे की तरफ देखना है। छोरा खुद समझ जाता है कि उसको अब चुप-चाप बैठ जाना है। ऐसे बापुओं की जरुरत सबसे जादा मेहमानों के सामने पड़ती है। अच्छा छोरे को भी पता होता है कभी भी तीसरी आँख खुल सकती है पर जब तक नी खुलती तब तक तो किसी के बाप की नी सुनता।   

भिया देखिये पूरा गाना 

भिया अगर मजे आये हो टी फटाफट इंदौरी चच्चा पर क्लीक करो और मजेदार कहानी पढ़ो। 

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भिया आपके क्या विचार है आपके बापू भी है क्या इनमें से किसी एक प्रकार के?