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एक और 'निर्भया कांड' ने फिर देश को झंझोड़ा: दिल्ली अभी भी नहीं है सुरक्षित

आखिर कब तक...

एक और 'निर्भया कांड' ने फिर देश को झंझोड़ा: दिल्ली अभी भी नहीं है सुरक्षित
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आखिर कब सुधरेंगे हम और कब सुधारेंगे हम लोगों की मानसिकता। मुझे याद है भारत माँ की बेटी निर्भया को न्याय दिलाने के लिए लगभग पूरा देश हाथों में मोमबत्ती लिए दिल्ली पहुँच गया था। लोगों की आँखों में उस वक्त बसी आग को देख कर लगा जैसे समाज की सारी गन्दी मानसिकता इसमें जल कर भस्म हो जाएगी। मगर क्या ऐसा हुआ?

आज भी अख़बार बलात्कार की खबरों से भरे पड़े रहते हैं, और हर बार हैवान हैवानियत की हदों कों पार कर जाता है। ऐसा ही कुछ कल रात को फिर दिल्ली में हुआ।

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चलती ट्रेन के लेडीज़ कोच में महिला के साथ बलात्कार 

चलती ट्रेन के लेडीज़ कोच में महिला के साथ बलात्कार 

बीती रात को दिल्ली में एक 32 वर्षीय महिला के साथ ज़्यादती की खबर आई है। नवभारत टाइम्स के अनुसार महिला जिस कोच में सवार थी उसमें चार और महिलाएं भी बैठी हुई थी। चारों महिलाएं शाहदरा स्टेशन पर उतर गईं और पीड़िता कोच में अकेली रह गई। अकेली महिला को देख कर शाहदरा स्टेशन से तीन युवक कोच में चढ़ गए और फिर महिला के साथ मार-पीट और लूट-पाट करने लगे।

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हैवान ने महिला की अस्मिता को रौंदा 

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उन तीन युवकों में से दो युवक तो महिला का बैग छीन कर भाग गए, मगर एक युवक ने महिला के साथ मार-पीट और अश्लील हरकतें करना शुरू कर दिया। महिला खुद को बचाने की हर संभव कोशिश कर रही थी। उसकी चीख दो पुलिस वालों के कानों पर पड़ी, वे चलती ट्रेन में चढ़े और इस भयानक कुकृत्य के साक्षी बने। फिलहाल आरोपी पुलिस की हिरासत में हैं और महिला को अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया है। 

दिल्ली के लिए यह कोई नई बात नहीं है 

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इस खबर से जहाँ पूरा देश सकते में है। वहीं दिल्ली के लिए यह एक आम बात है, वह तो रोज इससे भी कई भयानक किस्से रोज़ सुनती है। यह मैं नहीं बल्कि दिल्ली पुलिस के द्वारा निकाले गए आंकड़े कह रहे हैं, जिनके अनुसार दिल्ली में हर रोज़ औसतन चार लड़कियों का बलात्कार होता है। इसका मतलब हर महीने 120 निर्भया की अस्मिता को रौंदा जाता है।

2015 में हुए 2,199 बलात्कार 

2015 में हुए 2,199 बलात्कार 
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यह चौंका देने वाले आंकड़े दिल्ली पुलिस के ही हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार 2015 में दिल्ली में 2,199 बलात्कार हुए। आंकड़े यक़ीनन चौंका देने वाले हैं। जिस शहर को देश की राजधानी होने का गौरव प्राप्त है, उस शहर में देश की माँ बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं, यह तो पूरे देश के लिए शर्म की बात है।    

इस साल जुलाई तक यह आंकड़ा 1,186 तक पहुँच चुका है 

इस साल जुलाई तक यह आंकड़ा 1,186 तक पहुँच चुका है 
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हाँ यक़ीनन हम प्रगति कर रहे हैं। हर साल दिल्ली में रेप के आंकड़े पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ गए हैं। और हर साल इन आंकड़ों में कई गुना इज़ाफा होता है। क्या यही हमारी प्रगति है? दरअसल हमारा देश तो एक विकासशील राष्ट्र से विकसित राष्ट्र बनने वाला है मगर हमारी मानसिकता संकीर्ण से और ज्यादा संकीर्ण होती जा रही है।     

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पूरे देश की हालत भी लगभग ऐसी ही है 

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ऐसा नहीं है कि सिर्फ दिल्ली ही असुरक्षित है बल्कि पूरे देश के भी आंकड़े कुछ अच्छे नहीं है। अगर आंकड़ों की मानें तो साल 2015 में पूरे देश में 32,077 बलात्कार हुए जिनमें से 1700 मामले सामूहिक बलात्कार के थे। यह तो वे चीखे हैं जो सरकारी दस्तावेजों में कैद हैं, देश में कई चीखें ऐसी भी हैं जो कभी अपना दर्द न सुना सकी।

कुछ कहने की जरुरत ही नहीं है! 

कुछ कहने की जरुरत ही नहीं है! 

आज जब दिल्ली की इस बर्बरता की खबर पढ़ी तो इस बारे में और जानकारी हासिल करने के लिए मैंने गूगल करने का सोचा। गूगल पर जैसे ही "दिल्ली में हुआ रेप" लिखा तो नीचे जो आंकड़े आये उसने मुझे अन्दर तक झंझोड़ दिया। गूगल के पास दिल्ली में हुए रेप के 23 लाख परिणाम हैं। यह मेरी और आपकी शर्मिंदगी बढ़ाने के लिए काफी है।

आखिर कब सुधरेगी लोगों की मानसिकता 

आखिर कब सुधरेगी लोगों की मानसिकता 
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एक दिन आँखों में गुस्सा भर कर या मोमबत्ती जला कर बदलाव नहीं आएगा। अगर सच-मुच बदलाव चाहते हो तो हर पल, हर घड़ी लड़ना होगा। जरा सोचो, जब देश की राजधानी ही स्वतंत्र नहीं है तो बाकी के शहरों का क्या हाल होगा। लाख सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, निर्भया के नाम से कई योजनाएं चलाई गई, मगर क्या उससे फायदा मिला? अगर बदलाव करना है तो हमें ही आगे आना होगा!

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क्या बलात्कार की इन घटनाओं के पीछे की वजह सरकारी इच्छाशक्ति की कमी है?