मुम्बई इंडियंस का यह खिलाड़ी अपने मजदूर पिता को देने वाला है 1.5 करोड़ का तोहफ़ा

पिता-बेटे की है यह मार्मिक कहानी। 

मुम्बई इंडियंस का यह खिलाड़ी अपने मजदूर पिता को देने वाला है 1.5 करोड़ का तोहफ़ा
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मैं कभी आसमान छू नहीं पाता, अगर पापा ने अपने कन्धों पर मुझे बैठाया न होता।

जब कोई शख़्स कामयाब होता है तो वह सिर्फ अकेला कामयाब नहीं होता, उसके साथ वे लोग भी कामयाब हो जाते हैं जिन लोगों ने उसके सपने पूरे करने के लिए अपने सपनों की आहुति दी हो। कइयों के सपने टूटते हैं जब जा कर किसी एक का सपना मुकम्मल हो पाता है।

और यह बात मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि इस दुनिया में सिर्फ माँ-बाप ही ऐसे हैं जो अपनी आँखों में अपने बच्चों के सपने सजाते हैं। उन्हें पूरा करने की वे हर संभव कोशिश करते हैं। यहाँ तक कि वह अपना सब कुछ अपने बच्चों के सपनें पूरा करने के लिए लगा देते हैं। और जब औलाद के सपने पूरे हो जाता हैं तो वे उन सपनों को बाँहों में भर कर बची हुई जिंदगी गुज़ार देते हैं।
ऐसी ही कहानी है इस आनेवाले स्टारक्रिकेटर नाथू सिंह की भी।          

यह कहानी पिता और बेटे के संघर्ष की कहानी है 

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यूँ तो यह कहानी मुंबई इंडियन और रणजी में राजस्थान के एक्सप्रेस बॉलर 'नाथू सिंह' और उनके 6 हज़ार रूपये प्रति महीने की हाड़तोड़ मजदूरी करने वाले पिता की है। मैं इसे संघर्ष की कहानी का नाम देना ज़्यादा पसंद करूँगा। क्योंकि संघर्षो के सपनों की कहानी ही झोपड़ी नुमा घर में लिखी जाती है।  

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दो साल पहले जूते खरीदने के पैसे नहीं थे 

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इस करोड़पति ख़िलाड़ी की ज़िन्दगी के महज़ दो साल ही अगर हम पीछे जाएँ तो उस वक्त इस ख़िलाड़ी के पास जूते खरीदने के भी पैसे नहीं थे। मगर आँखों में अरमान ज़िंदा थे और जब तेज़ बॉलर बनने के सपने ने नाथू को तड़पाना शुरू किया तो नाथू ने अपना खून पसीना एक कर दिया और आज यह मुकाम हासिल कर लिया।   

इस छोटी सी जगह से निकला है क्रिकेट की दुनिया का आने वाला बड़ा सितारा 

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कहते हैं 'तप-तप कर ही सोना कुंदन बनता है' क्रिकेटर नाथू सिंह ने भी अपने सपनों को इसी छोटे से घर में तपाया। यही वह छोटा सा घर है जिसने सालों इस बड़े सितारे को अपनी गोद में रखा। यही से नाथू, क्रिकेटर नाथू सिंह बने।  

आज भी मजदूरी करते हैं नाथू सिंह के पिता 

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फेक्ट्री में हमेशा की तरह मजदूरी में लगे भरत सिंह बताते हैं- "बेटा उनसे मजदूरी छोड़ने की कई बार गुज़ारिश कर चुका है। वे अपने इस काम को भला कैसे छोड़ पाएंगे, जिसके बूते नाथू को यहां तक लाए हैं। वे हर रोज़ सवेरे अपना टिफिन बांध फैक्ट्री में काम करने निकल जाते हैं।" 

मुंबई इंडियन्स ने तीन करोड़ बीस लाख में ख़रीदा था नाथू सिंह को 

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आई.पी.एल. में मुंबई इंडियंस ने नाथू को तीन करोड़ 20 लाख में खरीदा। यही से ज़िन्दगी ने करवट लेना शुरू किया। यह उनके परिश्रम का ही इनाम है कि सिटी बस में सफर करने वाले नाथू के पास अब बड़ी गाड़ी आ चुकी है। यह उसी टीनशेड वाले घर में खड़ी है।

देने वाले हैं अपने पिता को एक अनोखा तोहफ़ा 

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मुंबई इंडियंस और राजस्थान रणजी टीम के एक्सप्रेस बॉलर नाथूसिंह अपने मां-बाप के लिए डेढ़ करोड़ का आलीशान मकान तैयार करवा रहे हैं। जयपुर में ही ढाई सौ वर्ग गज में तीन मंजिला आलीशान बंगला तैयार हो रहा है। अगले छह महीने में पूरा परिवार नए मकान में चला जाएगा।

जब मुझे लोग नाथू के पिता के नाम से पुकारते है तो मैं गर्वित हो जाता हूँ 

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एक बेटे के लिए इससे बड़ी क्या बात होगी कि उसके पिता उसकी वजह से गर्व महसूस करें। और एक पीता के लिए भी इससे बड़ी बात क्या होगी की वह अपने बेटे के नाम से जाना जाए। इसी सच को नाथू सिंह जी ने भी अपने शब्दों में बयाँ किया "अब बेटे ने इतना दे दिया कि बयां नहीं कर सकता। जब मुझे लोग नाथू के पिता के नाम से पुकारते हैं तो इस बाप का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।" वैसे तो नाथू के पिता चप्पल बनाने की फेक्ट्री में काम करते हैं मगर उन्होंने क्रिकेट जगत को सरताज दे दिया है। 


आपको नहीं लगता कि यदि आज कल के बेटे 'नाथू सिंह' जैसे हो जाए तो दुनिया में वृद्धाश्रम की ज़रूरत ही ना हो?