53 साल पहले तबाह हो चुके इस शहर का नाम 'रामायण' से जुड़ा है, जानिए पूरी घटना

भारत के दक्षिणी छोर पर स्थित है धनुषकोड़ी। 

53 साल पहले तबाह हो चुके इस शहर का नाम 'रामायण' से जुड़ा है, जानिए पूरी घटना
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हम जिस शहर में रहते हैं, उससे हमें अलग ही लगाव होता है। जब कोई हमसे हमारे शहर की खासियतें पूछता है तो हम सिर्फ उसके वर्तमान की नहीं बल्कि भूतकाल से जुड़ी बेहतरीन बातें भी बताते हैं। हमारे देश भारत का जिक्र करते हुए भी हम कहते हैं कि भारत पहले 'सोने की चिड़िया' हुआ करता था। 

हर शहर और कस्बे के इतिहास में कई रोचक कहानियां छुपी होती हैं। कुछ शहरों का जिक्र तो रामायण-महाभारत के काल में भी मिलता है। ऐसा ही एक शहर दक्षिण भारत में बसा 'धनुषकोड़ी' है। 'धनुषकोड़ी' का जिक्र भगवान राम के समय से मिलता है। कई सालों तक यह शहर आबाद भी था। लेकिन कुछ साल पहले अचानक से आए एक तूफान ने इसे तबाह कर दिया। कभी पर्यटकों के बीच मशहूर रहे शहर में आज सन्नाटा पसरा है। 

आखिर क्या है इस शहर की कहानी और भगवान राम का इससे क्या नाता है? यह हम जानेंगे इस स्टोरी के जरिए।

तमिलनाडु में है बसा 

तमिलनाडु में है बसा 

धनुषकोड़ी रामेश्वरम जिले के पम्बन द्वीप के दक्षिण-पूर्वी छोर पर स्थित है। रामेश्वरम से इसकी दूरी लगभग 15 किलोमीटर है। श्रीलंका के तलाईमन्नार से इसकी दूरी 29 किलोमीटर है।

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छोटा सा शहर 

छोटा सा शहर 
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यह भारत और श्रीलंका के बीच इकलौती स्थलीय सीमा है। महज 45 मीटर में फैला यह नगर दुनिया के सबसे छोटे स्थानों में से एक है।

22 दिसम्बर 1964 की रात

22 दिसम्बर 1964 की रात
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22 दिसम्बर 1964 की रात यहाँ 270 किलोमीटर/घंटे की गति से एक भयानक चक्रवात आया। इस दौरान समुद्र में करीबन 20 फीट ऊँचाई तक का ज्वार उठा। पम्बन-धनुषकोड़ी पैसेंजर ट्रेन इस ज्वार में फंसकर पानी में बह गई थी। इस हादसे में 115 यात्रियों की मौत हुई थी।

पुल का हश्र 

पुल का हश्र 
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इस दौरान भारत को पम्बन द्वीप से जोड़ने वाला पम्बन पुल भी बह गया। इस प्राकृतिक आपदा में अकेले धनुषकोड़ी में 800 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। यह भयानक चक्रवात धनुषकोड़ी को पूरी तरह से तहस-नहस करता हुआ निकल गया था। 

ऐसा था धनुषकोड़ी 

ऐसा था धनुषकोड़ी 
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इस चक्रवात से पहले धनुषकोड़ी में रेलवे स्टेशन, श्रीलंका के लिए फेरी सेवाएं, मंदिर, धर्मशालाएं, पोस्ट ऑफिस, छोटा अस्पताल जैसी कई सुविधाएं हुआ करती थी।

'घोस्ट टाउन' घोषित

'घोस्ट टाउन' घोषित
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एक ऐसा नगर जो किसी के रहने लायक ना हो। यहाँ सूरज ढलने के बाद कोई नज़र नहीं आता। लेकिन अब भी कुछ शौक़ीन पर्यटक इस जगह को जानने आ जाया करते हैं। मद्रास सरकार ने इस शहर को 'घोस्ट टाउन' घोषित किया था।

रामसेतु का एक किनारा है यह

रामसेतु का एक किनारा है यह
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रामायण के अनुसार भगवान राम ने जब भारत से श्रीलंका जाने के लिए पुल का निर्माण करवाया, तब उन्होंने अपने धनुष से पुल की शुरुआत करने के लिए यहाँ निशान बनाया था। इसी वजह से इसे धनुषकोड़ी नाम भी मिला है। इसका अर्थ होता है 'धनुष का अंत'।

चलती थी ट्रेन

चलती थी ट्रेन
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1964 के चक्रवात से पहले 'बोट मेल एक्सप्रेस', चेन्नई से एग्मोर होते हुए धनुषकोड़ी तक आती थी। लेकिन 1964 में पम्बन से धनुषकोड़ी की मीटर-गेज ब्रांच लाइन तहस-नहस हो गई। 

पुरानी यादें 

पुरानी यादें 
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यदि आज के समय में आप धनुषकोड़ी जाएंगे तो आपको यहाँ खंडहर ही मिलेंगे, लेकिन इस होर्डिंग में यहाँ की कुछ पुरानी तस्वीरें भी हैं। इन तस्वीरों को देखकर आप समझ जाएंगे कि एक समय में यह शहर कितना आबाद हुआ करता था। 

पहुंचने का रास्ता 

पहुंचने का रास्ता 
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कुछ साल पहले तक धनुषकोड़ी पहुंचने के लिए पैदल या जीप से जा सकते थे। फिर 2016 में यहां रोड भी बनकर तैयार हुई। कई सालों से धनुषकोड़ी को रामेश्वरम से जोड़ने के लिए रेलवे लाइन डालने का विचार चल रहा है।

यदि आप घूमने-फिरने के शौकीन है तो आपको यहां का चक्कर जरूर लगाना चाहिए।    

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