15 दिनों तक इस मंदिर में लड़कियों को एक पुरुष के साथ रखा जाता है टॉपलेस, कारण आपको चौंकाएगा

परिवार वाले अपनी लड़कियों को खुद भेजते हैं।

15 दिनों तक इस मंदिर में लड़कियों को एक पुरुष के साथ रखा जाता है टॉपलेस, कारण आपको चौंकाएगा
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हमारे देश में धर्म और धार्मिक मान्यताओं के नाम पर बहुत सी ऐसी प्रथाएं भी प्रचलन में हैं जिन्हें देखकर कोई भी सोच में पड़ सकता है कि,'यार ये क्या हो रहा है?' दशहरे पर रावण जलाने के बारे में तो आपने सुना ही होगा। लेकिन आंध्रप्रदेश के कुर्नूल जिले के देवरगट्टू मंदिर में दशहरे की रात को धर्मप्रेमी पुरुष इकट्ठा होते हैं और एक-दूसरे के सिर पर मध्य रात्रि तक लट्ठ मारते रहते हैं। आप ही सोचिए क्या यह प्रथा जानलेवा नहीं है? 

खैर, यह तो इस तरह की प्रथाओं का एक उदाहरण मात्र ही था। फिलहाल तो देशभर में नवरात्रि की धूम मची हुई है। माता की आराधना के इन नौ दिनों में महिलाओं और बच्चियों को कुछ ज्यादा ही सम्मान दिया जाता है। खासतौर पर अष्टमी और नवमी के दिन तो बालिकाओं की जमकर आवभगत होती है। नवरात्रि के दौरान बच्चियों को पूजा जाना आम बात है। लेकिन तमिलनाडु के एक शहर में एक मंदिर ऐसा भी है जहाँ बालिकाओं को 15 दिन नग्न अवस्था में रखा जाता है और उनकी पूजा की जाती है। 

आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह भी कोई प्रथा है भला। मगर यही सच है। आइए जानते हैं पूरा मामला विस्तार से।

मदुरै का मंदिर 

मदुरै का मंदिर 

तमिलनाडु के मदुरै के निकट स्थित वेल्लूर गांव का 'Yezaikatha Amman' मंदिर इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है। हालांकि इसका कारण सकारात्मक नहीं है।

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

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कई गांव शामिल 

कई गांव शामिल 

मदुरै के मंदिर में होने वाली यह प्रथा सदियों से चली आ रही है। इस प्रथा में 60 गांवों के लोग हिस्सा लेते हैं। इसके अंतर्गत 7 लड़कियों को चुनकर उन्हें देवी माना जाता हैं और 15 दिनों तक उन्हें कमर के ऊपर कोई कपड़ा नहीं पहनाया जाता है।  

इस प्रथा से जुड़ा अगला तथ्य आपको चौंकाएगा।

ये करते हैं देखभाल 

ये करते हैं देखभाल 
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इन लड़कियों के आधे शरीर पर केवल फूलों की माला और जेवर ही होते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इन सात लड़कियों का चुनाव एक पुरुष पुजारी करता है और 15 दिनों तक वो ही मंदिर में इनकी देखभाल भी करता है।  

यह होती है उम्र 

यह होती है उम्र 

इस प्रथा में सभी गांवों के श्रद्धालु बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इन बच्चियों की उम्र 10-14 वर्ष के आसपास होती हैं।सात बालिकाओं के चुनाव के लिए पहले पुजारी के सामने सभी बच्चियों की परेड होती है। 

जानिए इस संबंध में क्या है यहां के भक्तों का तर्क।

छोटी होती है लड़कियां 

छोटी होती है लड़कियां 

बचपन में इस प्रथा का हिस्सा बनने वाले एक स्थानीय प्रोफेसर ने एक न्यूज पोर्टल को बताया कि,"इस प्रथा के अंतर्गत 6-8 साल की लड़कियों को ही चुना जाता है। ये वो लड़कियां होती हैं जो यौवन तक नहीं पहुंची होती हैं। साथ ही पुजारी भी बूढ़े ही होते हैं। लड़कियां मंदिर के अंदर सोती हैं और पुजारी बाहर।"

यह तो सिर्फ आम नियम है

यह तो सिर्फ आम नियम है
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उनका यह भी कहना है कि,"हिंदू धर्म में आमतौर पर भी जो व्यक्ति मंदिर के अंदर अनुष्ठान आदि कर रहा है वो कमर के ऊपर कपड़े नहीं पहनता है। लड़कियों के साथ इस तरह का बर्ताव सिर्फ इस परंपरा का पालन है।"

आगे जानिए प्रशासन ने उठाए क्या कदम।

कपड़े पहनाने का दिया आदेश

कपड़े पहनाने का दिया आदेश

मदुरै के कलेक्टर के.वीरा. राघव राव के अनुसार,"यह प्रथा बहुत प्राचीन है। पालक अपनी इच्छा से ही बच्चों को यहां भेजते हैं। हमने ग्रामीणों को जानकारी दे दी हैं कि बच्चियों को पूरे कपड़े पहनाए जाए। वो कपड़ों के ऊपर भी जेवर पहन सकती हैं।"

पड़ेगा गलत प्रभाव 

पड़ेगा गलत प्रभाव 
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एक चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट का मानना है कि,"यह इस उम्र में नहीं किया जाना चाहिए। यह उन्हें भविष्य में मानसिक रूप से परेशान करेगा। कुछ इसे भूल जाएंगी और कुछ नहीं भूल पाएंगी। बाल शौषण के इस युग में यह प्रथा होनी चाहिए लेकिन कपड़ों के साथ।" 

आगे देखिए इस प्रथा का वीडियो। 

यहाँ देखें वीडियो 

इस वीडियो में आपने देखा ही होगा कि कैसे प्रथा के नाम पर इन छोटी-छोटी नासमझ बच्चियों से क्या कुछ करवाया जा रहा है। सोचने वाली बात है कि इनके परिजनों को भी इससे कोई समस्या नहीं है। 

लोगों की प्रतिक्रिया 

लोगों की प्रतिक्रिया 
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इस मामले में सोशल मीडिया पर भी जमकर बहस चल रही है। कुछ लोग इसको निजी मामला बता रहे हैं तो कुछ इसका विरोध भी कर रहे हैं। 

धार्मिक मुद्दों को लेकर हमेशा ही बहस चलती रहती है, लेकिन समय के साथ कुछ नियमों और प्रथाओं को बदल लेने में भी कुछ गलत नहीं है।

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क्या आप मानते हैं कि भारत में धर्म लेकर बहुत अंधविश्वास है?