हमारे बीच नहीं रहा हिंदी फिल्मों का यह अंग्रेज कलाकार, पहली बार लिया था सचिन तेंदुलकर का इंटरव्यू

300 से ज्यादा फिल्मों में किया था काम।

हमारे बीच नहीं रहा हिंदी फिल्मों का यह अंग्रेज कलाकार, पहली बार लिया था सचिन तेंदुलकर का इंटरव्यू
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सीनियर एक्टर टॉम ऑल्टर एक ऐसे कलाकार थे जिन्हें हिंदी फिल्मों में 'गोरे साहब' (अंग्रेज) के रूप में ही देखा गया। यह और बात है कि वो दिल से पूरी तरह हिंदुस्तानी ही थे। स्किन कैंसर से जूझ रहे ऑल्टर ने 67 साल की उम्र में शुक्रवार (29 सितंबर 17) को दुनिया से विदा ले ली। 

आज हम आपके लिए उन्हीं की ज़िंदगी से जुड़ी कुछ बातें लेकर आए हैं, जिनके बारे में आप शायद ही कुछ जानते होंगे। तकरीबन 40 साल पहले ऑल्टर ने दिलीप कुमार से हुई उनकी पहली मुलाकात में पूछा था कि,"बेहतरीन एक्टर होने का राज क्या है?' दिलीप साहब ने जवाब में कहा था,'शेर-ओ-शायरी'। 

टॉम ने खुद एक इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया था। उन्होंने कहा था कि,"मैं इस जवाब से हैरत में था लेकिन मैं यह जानता था कि जितने भी महान कलाकार हैं, उनकी ज़िंदगी का हिस्सा यही है। और मैं इन तमाम चीजों में बहुत खुशकिस्मत हूँ।" 

टॉम भले ही अँगरेज़ दिखते थे लेकिन उर्दू और हिंदी के बड़े जानकर थे। कम ही लोग जानते होंगे कि पद्मश्री से नवाज़े जा चुके टॉम, उर्दू के उम्दा शायर भी थे। तो जनाब, इस दिवंगत सीनियर एक्टर से जुड़ी ऐसी ही कुछ बातों को जानने के लिए पढ़िए यह स्टोरी।

इस जगह से था ताल्लुक 

इस जगह से था ताल्लुक 

1916 में टॉम ऑल्टर के दादा-दादी अमेरिका से भारत आए थे। इसके बाद वो यहीं बस गए। 22 जून 1950 को मसूरी में टॉम का जन्म हुआ था। 

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एक साल में ही अमेरिका से लौट आए 

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टॉम 18 साल की उम्र में अमेरिका पढ़ने तो गए लेकिन हिंदुस्तान से मोहब्बत ऐसी थी कि अमेरिका में दिल नहीं लगा।वो एक साल बाद ही वापस लौट आए। यहाँ आकर उन्होंने हरियाणा के एक स्कूल में बतौर स्पोर्ट्स टीचर नौकरी की, लेकिन फिर उनकी ज़िंदगी में टर्निंग पॉइंट आया।

इस स्टार के हो चुके थे दीवाने 

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टॉम जहां हरियाणा (जगाधरी) में टीचर थे, वहां इंग्लिश फिल्में नहीं चलती थीं। लेकिन मसूरी में चलती थीं, जहाँ उनका जन्म हुआ था। राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की फिल्म 'आराधना' ने टॉम पर गहरा असर किया। वे राजेश खन्ना की एक्टिंग के कायल हो गए थे। 

ऐसी हुई शुरुआत 

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'आराधना' का टॉम पर ऐसा असर हुआ कि वे पुणे के एक्टिंग इंस्टिट्यूट को ज्वाइन किए बिना नहीं रह पाए। उन्होंने सोचा कि वो राजेश खन्ना से कम हैं क्या? उन्हें हीरो बनना ही था। सफर शुरू हुआ और यही उनकी मुलाकात नसीरुद्दीन शाह और बेंजामिन गिलानी से हुई।

ये बॉलीवुड को ये कहा करते थे 

ये बॉलीवुड को ये कहा करते थे 
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टॉम ऐसे कलाकार थे जो 'बॉलीवुड' को कभी 'बॉलीवुड' नहीं कहा करते थे। उनके लिए या तो ये 'हिंदी फिल्म इंडस्ट्री' होता था या 'बॉम्बे फिल्म इंडस्ट्री' लेकिन 'बॉलीवुड' कभी नहीं था। टॉम अक्सर कहा करते थे कि, 'उनके लिए फिल्म इंडस्ट्री एक परिवार था। जहां दुश्मनियां चलती थीं, लोग जलते भी थे, खुश भी होते थे बावजूद इसके उनके लिए हिंदी फिल्म इंडस्ट्री हमेशा एक परिवार था।'

इस फिल्म में किया था काम 

इस फिल्म में किया था काम 

टॉम की पहली फिल्म 'चरस' थी। फिल्‍मों के अलावा उन्हें खासतौर पर मशहूर टीवी शो 'जुनून' के किरदार 'केशव कल्सी' के लिए भी जाना जाता है। 1990 के दशक में यह टीवी शो लगातार पांच साल तक चला। टॉम ने कला के क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी है। 300 से ज्यादा फिल्मों में अपनी बेहतरीन एक्टिंग से दर्शकों का दिल जीता है। 

ताउम्र कायम थी दोस्ती 

ताउम्र कायम थी दोस्ती 
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टॉम बहुत अच्छे थिएटर आर्टिस्ट भी हुआ करते थे। पुणे के एक्टिंग इंस्टिट्यूट में नसीरुद्दीन शाह के साथ शुरू हुई दोस्ती ताउम्र कायम रही। उन्होंने अपना पहला शो भी नसीरुद्दीन शाह और बेंजामिन गिलानी के साथ ही किया था।

लिया था सचिन का इंटरव्यू 

लिया था सचिन का इंटरव्यू 

टॉम स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट भी रह चुके हैं। साल 1980 से लेकर 1990 तक उन्होंने बतौर स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट काम किया। वो पहले जर्नलिस्ट थे जिन्होंने टीवी पर सचिन तेंडुलकर का इंटरव्यू लिया था। 28 साल पहले सचिन का पहला वीडियो इंटरव्यू किया गया था। इसे लेने वाले टॉम ही थे।

इंटरव्यू आप यहाँ देख सकते हैं।  

ये क्लिप 19 जनवरी 1989 को लिए गए इंटरव्यू की है, जब सचिन केवल 15 साल के थे।

हमेशा रहेंगे याद 

हमेशा रहेंगे याद 
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टॉम ने लगभग तीन दशक हिंदी सिनेमा में काम किया। उनका नाम हिंदी सिनेमा की किताब में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। 29 सितम्बर को टॉम ने 67 की उम्र में दुनिया से विदा ली, लेकिन टॉम अपने काम की वजह से अमर रहेंगे। 

क्या आप मानते हैं कि टॉम अॉल्टर को उनकी प्रतिभा के बराबर सम्मान नहीं मिल पाया है?