इंद्र ने छल से किया था 'संभोग', बदले में मिला था ऐसा भयानक 'श्राप' 

एकांतवास में चले गए थे इंद्र। 

इंद्र ने छल से किया था 'संभोग', बदले में मिला था ऐसा भयानक 'श्राप' 
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वैसे तो देवराज इंद्र, देवताओं के राजा है। स्वर्ग पर उनका अधिकार है। उनकी सेना में पवन देव, अग्नि देव, सूर्य देव जैसे देवों के साथ-साथ अनेक अप्सराएं भी शामिल हैं। इंद्र ने कई बार इस सृष्टि के लिए बुरी शक्तियों से लोहा भी लिया है। बावजूद इसके उनकी छवि नकारात्मक तौर पर भी सामने आती है। 

इसका कारण इंद्र का भोग और वासना के प्रति लगाव है। अधिकांश समय अप्सराओं से घिरे रहने वाले इंद्र ने कई बार ऋषियों के तप में खलल डालने की कोशिश की है। इसका जरिया बनती थीं तमाम सुंदर अप्सराएं। एक बार इंद्र वासना के आगे इतने अंधे हो गए कि उन्होंने एक स्त्री के साथ छल से संभोग किया। 

हालांकि इसका परिणाम बहुत ही बुरा हुआ। इंद्र को बड़ी सजा भुगतना पड़ी। आखिर क्या था, यह पूरा मामला। इसे जानने के लिए पढ़िए यह स्टोरी।

ब्रह्मा ने किया अहिल्या का सृजन 

ब्रह्मा ने किया अहिल्या का सृजन 

एक बार ब्रह्मा जी ने उत्सुकतापूर्वक कई सुंदर कन्याओं का सृजन कर दिया। इन कन्याओं में से एक अहिल्या, बला की खूबसूरत थीं। ब्रह्मा जी ने बहुत सोच-विचार करने के बाद गौतम ऋषि को अहिल्या के लालन-पालन का भार सौंपा। गौतम ऋषि बड़े ही बुद्धिमान और चरित्रवान थे।

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अहिल्या को मिला था वरदान 

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जब अहिल्या बड़ी हुई तो ऋषि उसे ब्रह्मा के पास ले आए। अहिल्या को वरदान प्राप्त था कि वे सदैव 16 साल की लड़की के समान जवां रहेंगी। अहिल्या के यौवन पर सभी देवताओं और असुरों का दिल आ गया।

ब्रह्मा ने किया शादी का फैसला 

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चूंकि अहिल्या युवा हो चुकी थीं इसलिए अब ब्रह्मा उसका विवाह करना चाहते थे। उन्होंने घोषणा की कि जो भी व्यक्ति सबसे पहले पूरी पृथ्वी के चक्कर लगाकर उनके पास आएगा। वो उसी से अहिल्या का विवाह करेंगे।

लौट गए गौतम ऋषि 

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गौतम ऋषि को इस शर्त से कोई मतलब नहीं था। वे अपने आश्रम लौट गए। रास्ते में उन्होंने एक गाय को बछड़े को जन्म देते हुए देखा। वो इससे बहुत अभिभूत हो गए और उन्होंने गाय के साथ ही शिवलिंग की भी परिक्रमा कर ली।

ब्रह्मा हुए प्रभावित 

ब्रह्मा हुए प्रभावित 
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ब्रह्मा को गौतम ऋषि के इस कृत्य के बारे में पता चला तो वो बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने ऋषि से कहा कि बच्चे को जन्म दे चुकी गाय पृथ्वी की तरह है। मतलब इस गाय और शिवलिंग की परिक्रमा करना पृथ्वी की परिक्रमा करने के समान ही है।

ब्रह्मा ने गौतम ऋषि को चुना वर 

ब्रह्मा ने गौतम ऋषि को चुना वर 
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ब्रह्मा, गौतम ऋषि के ज्ञान, तपस्या और धैर्य से बहुत प्रभावित हुए और अहिल्या के लिए उनका चुनाव किया। उन्होंने इस जोड़े को 'ब्रह्मगिरि' भी दी। इस विवाह को देखकर अन्य देवता और असुर जल-भून गए।

इंद्र की थी कुछ और मंशा 

इंद्र की थी कुछ और मंशा 
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इंद्र विवाह के बाद भी अहिल्या पर गलत नजर रखता था। वो उसे वासना की नजर से देखने लगा था। उसने गौतम ऋषि की दिनचर्या पर नजर रखना शुरू किया। गौतम ऋषि अलसुबह नदी पर स्नान और प्रार्थना करने जाते थे। 

इंद्र ने किया छल 

इंद्र ने किया छल 
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इंद्र ने चंद्र देव को अपने साथ मिलाकर उन्हें सुबह मुर्गे का रूप लेकर जल्दी बाग देने के लिए मना लिया। एक सुबह चंद्र देव ने ऐसा ही किया। उस दिन गौतम ऋषि समय से पहले ही नदी की ओर निकल पड़े।

इंद्र ने किया छल 

इंद्र ने किया छल 
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ऋषि को जाता देख इंद्र उनका रूप लेकर अहिल्या के पास पहुंच गए। उन्होंने अहिल्या से कहा कि वो उसके साथ संबंध बनाना चाहते हैं। अहिल्या को अपनी दैवीय शक्ति से दिख गया था कि वो उनके पति नहीं बल्कि देवराज इंद्र हैं।

इंद्र ने खेला दाव 

इंद्र ने खेला दाव 
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अहिल्या, इंद्र के इस दुस्साहस से बड़ी प्रभावित हुईं। फिर इंद्र ने मीठी-मीठी बातें करके अहिल्या का मन जीत ही लिया। फिर अहिल्या, इंद्र की बातों में इतना डूब गई कि दोनों के बीच गलती से संभोग हो गया।

फिर हुई ग्लानि 

फिर हुई ग्लानि 
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अहिल्या जब होश में आई तो उसे लगा कि कुछ गलत हो गया है। उसने तुरंत इंद्र को वहां से जाने के लिए कहा। अपनी भूख मिटाने के बाद अब इंद्र को भी गौतम ऋषि का डर सताने लगा। वो भी हड़बड़ाहट में वहां से निकलने लगा। मगर तभी गौतम ऋषि आ गए और सबकुछ देख लिया। 

क्रोधित हुए ऋषि 

क्रोधित हुए ऋषि 
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इंद्र और अहिल्या का यह कृत्य देखकर गौतम ऋषि बहुत क्रोधित हो गए। उन्होंने सबसे पहले चंद्र देव को श्राप दिया। इस श्राप के प्रभाव से ही आज चन्द्रमा पर दाग नजर आते हैं। 

अहिल्या को मिला श्राप 

अहिल्या को मिला श्राप 
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गौतम ऋषि ने अहिल्या से कहा कि, 'तुमने बहुत बड़ी भूल की है।' उन्होंने अहिल्या को श्राप दिया कि, 'तुम्हें जिस रूप का गुरुर है,अब वो नहीं रहेगा। तुम एक शिला(चट्टान) बन जाओगी और केवल हवा पर जीवित रहोगी। केवल भगवन विष्णु ही तुम्हारा उद्धार करेंगे।'

इंद्र को भी मिला श्राप 

इंद्र को भी मिला श्राप 
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ऋषि ने इंद्र को श्राप दिया कि, 'जिस चीज की तुम्हें इतनी लालसा है, वही तुम्हारे शरीर पर होगी। साथ ही तुम उसे भी खो दो जिसकी मदद से तुम इससे जुड़ सके।' इस श्राप की वजह से इंद्र के शरीर पर 1,000 वैजाइना उभर गए। इन्हें बाद में इंद्र ने शिव की कृपा से आंखों में परिवर्तित करवा लिया।

अहिल्या का उद्धार 

अहिल्या का उद्धार 
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भगवान विष्णु, भगवान राम के अवतार में इस कुटिया में पहुंचे थे। उन्होंने अहिल्या रूपी शिला पर पैर रखकर उसे मुक्ति दी थी। 

तो कुछ ऐसी है इंद्र की वासना की कहानी। इसे अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर कीजिएगा। 

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