आज के युवाओं ने नहीं देखा है विज्ञापनों का ऐसा दौर, वो समय तो बेहद अलग हुआ करता था

पुराने समय में आज फिर से झाँक लीजिए। 

आज के युवाओं ने नहीं देखा है विज्ञापनों का ऐसा दौर, वो समय तो बेहद अलग हुआ करता था
SPONSORED

विज्ञापनों की अपनी एक अलग ही दुनिया होती है। कई बार तो विज्ञापनों की यह दुनिया ही अपने आप में इतनी मनोरंजक हो जाती है कि इसमें से बाहर निकलने का मन ही नहीं करता है। उदाहरण के लिए टाटा स्काई की प्रचलित एड सीरीज या कैडबरी के टीवी विज्ञापन देख लीजिए। आज के समय में विज्ञापन मुख्य रूप से वीडियो के रूप में टेलीविजन और सोशल मीडिया में दिखाए जाते हैं। पर आज से कई साल पहले विज्ञापनों के शुरुआती दौर में ऐसा नहीं था। हर जगह प्रिंट एड का ही बोलबाला था। सिंगल पेज में विज्ञापन का मतलब क्रिएटिविटी का अलग ही लेवल। ऐसे में जब विज्ञापन लगते थे तो उनकी बात ही अलग हुआ करती थी। 

आप भले ही वह दौर न देख पाए हों, पर हम आज आपके लिए उस दौर के कुछ चुनिंदा विज्ञापनों का जखीरा जरूर लेकर आए हैं। इन्हें देखकर आप भी उस पुराने समय को जी उठेंगे। तो फिर आइए बिना देर किए इन विज्ञापनों पर एक नज़र डालते हैं।

विज्ञापनों की बात शुरू करने के लिए 'अमूल' चीज़ से अच्छा कुछ भी नहीं। 

विज्ञापनों की बात शुरू करने के लिए 'अमूल' चीज़ से अच्छा कुछ भी नहीं। 

RELATED STORIES

टेलकम पाउडर के विज्ञापनों की शुरुआत कुछ ऐसे हुई थी। 

टेलकम पाउडर के विज्ञापनों की शुरुआत कुछ ऐसे हुई थी। 

आपने शायद कभी 'टाटा-मर्सिडीज़-बेंज' का नाम ही नहीं सुना होगा। 

आपने शायद कभी 'टाटा-मर्सिडीज़-बेंज' का नाम ही नहीं सुना होगा। 

'ईनो' पहले कुछ इस तरह से बिकता था। 

'ईनो' पहले कुछ इस तरह से बिकता था। 

शाहिद व आयशा के पहले 'Bournvita' के एड ऐसे थे। 

शाहिद व आयशा के पहले 'Bournvita' के एड ऐसे थे। 

इतनी सस्ती 'एयर टिकट' अब कहां मुमकिन है। 

इतनी सस्ती 'एयर टिकट' अब कहां मुमकिन है। 

'पॉन्ड्स', तब से अब तक काफी कुछ बदल चुका है। 

'पॉन्ड्स', तब से अब तक काफी कुछ बदल चुका है। 

आह! ताज। 

आह! ताज। 

पहले 'कंप्यूटराइज्ड टिकट' का भी स्वैग था। 

पहले 'कंप्यूटराइज्ड टिकट' का भी स्वैग था। 

अब तो समझ ही गए होंगे कि हमारे मास्टर जी 'लूना' में ही क्यों आते थे। 

अब तो समझ ही गए होंगे कि हमारे मास्टर जी 'लूना' में ही क्यों आते थे। 

ये है 'कंप्यूटर' का शुरुआती दौर। 

ये है 'कंप्यूटर' का शुरुआती दौर। 

पहले डूड्स 'काइनेटिक होंडा' चलाया करते थे। 

पहले डूड्स 'काइनेटिक होंडा' चलाया करते थे। 

जनाब 'गरम' का दौर तो अब आया है। पहले 'पनामा' का राज था। 

जनाब 'गरम' का दौर तो अब आया है। पहले 'पनामा' का राज था। 

'रेक्सोना' था ताजगी का दूसरा नाम। 

'रेक्सोना' था ताजगी का दूसरा नाम। 

आपको शायद अब पता चला होगा कि 'केलॉग्स कॉर्न फ्लैक्स' कितना पुराना है। 

आपको शायद अब पता चला होगा कि 'केलॉग्स कॉर्न फ्लैक्स' कितना पुराना है। 

इट्स 'कैम्पा' टाइम। 

इट्स 'कैम्पा' टाइम। 

'पार्ले' को तो पहचान ही गए होंगे आप। 

'पार्ले' को तो पहचान ही गए होंगे आप। 

'पार्ले ग्लूको' भी पहले लक्ज़री हुआ करती थी। 

'पार्ले ग्लूको' भी पहले लक्ज़री हुआ करती थी। 

Image Source

'सर्फ' का ऐसा विज्ञापन अब किसी को याद नहीं। 

'सर्फ' का ऐसा विज्ञापन अब किसी को याद नहीं। 

ये है असली 'कैलेंडर गर्ल'। 

ये है असली 'कैलेंडर गर्ल'। 

सही पढ़ा आपने, रबर प्रोटेक्टर। 

सही पढ़ा आपने, रबर प्रोटेक्टर। 

'ताज' तब भी बेस्ट था, अब भी है। 

'ताज' तब भी बेस्ट था, अब भी है। 

'एम्बेसडर कार' से तो सभी की यादें जुड़ी हैं। 

'एम्बेसडर कार' से तो सभी की यादें जुड़ी हैं। 

'नेस्कैफे' का दौर भी इस तरह से शुरू हुआ था। 

'नेस्कैफे' का दौर भी इस तरह से शुरू हुआ था। 

भारत के आधे 90's किड तो 'बजाज चेतक' में घूमे ही हैं। 

भारत के आधे 90's किड तो 'बजाज चेतक' में घूमे ही हैं। 

तो ये था भारतीय विज्ञापनों का बीता हुआ वक़्त। इससे आपको भी अपना बचपन याद आ ही गया होगा। 

Image Source

यदि आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे शेयर करना न भूलें। आप यहां क्लिक कर मुझे अपना फीडबैक भेज सकते हैं।