ये हैं स्कूल स्टूडेंट्स के 6 शानदार अविष्कार, 300 किमी प्रति लीटर का एवरेज देने वाली कार भी है शामिल

बताइए 2017 में लड़कियों ने कर दिया है ऐसा काम।

ये हैं स्कूल स्टूडेंट्स के 6 शानदार अविष्कार, 300 किमी प्रति लीटर का एवरेज देने वाली कार भी है शामिल
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कहते हैं न कि पूत के पाँव पालने में ही दिख जाते हैं। यह बात सौ टका सही है। हम सभी की स्कूल में एक न एक बच्चा ऐसा जरूर होता था जिसका दिमाग और लोगों से अलग चलता था। स्कूल में जब साइंस का प्रोजेक्ट बनाना होता था तो उसका प्रोजेक्ट सबसे बेहतर होता था। उसे क्लास के बाकि बच्चे साइंटिस्ट बुलाया करते थे। ऐसे ही बच्चे आगे जाकर बड़े-बड़े अविष्कार करते हैं। देखते ही देखते महान वैज्ञानिक बन जाते हैं। 

आज कुछ ऐसे ही स्कूली बच्चों से हम आपको रूबरू करवाने जा रहे हैं। इन्होंने 2017 में ऐसे अविष्कार किये जो आम इंसान की कुछ परेशानियों को काफी हद तक कम कर देंगे। इन अविष्कारों को सम्मान भी मिल चुके हैं। बस आप बिना देर किए, एक बार इन्हें देखिए।

6. दृष्टिबाधितों के लिए अनोखा चश्मा

6. दृष्टिबाधितों के लिए अनोखा चश्मा

अरुणाचल प्रदेश के अनंग तदार ने दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए एक ऐसा चश्मा बनाया है, जिसकी मदद से वो बिना किसी सहारे भी आसानी से चल सकेंगे। उन्होंने अपने इस प्रोजेक्ट को G4B (गॉगल फॉर ब्लाइंड) नाम दिया है। अनंग ने इस चश्मे को इस तरह तैयार किया है कि जब भी कोई बड़ी चीज चश्मे के नजदीक आती है तो इसमें लगे पार्किंग सेंसर की मदद से उसमें बीप होने लगती है।

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मिल चुके हैं सम्मान

मिल चुके हैं सम्मान
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अनंग को उनके इस इनोवेशन के लिए Dinanath Pandey Smart Idea Innovation Award से भी सम्मानित किया जा चुका है। 

वीडियो में देखिये किस तरह काम करता है 'गॉगल फॉर ब्लाइंड'

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने अनंग के इस प्रोजेक्ट की तारीफ करते हुए, प्रोटोटाइप बनाने के लिए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। 

5. मधुमक्खियों के लिए रोबोट

5. मधुमक्खियों के लिए रोबोट
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दिल्ली की रहने वाली 12 साल की काव्या विग्नेश ने 'Lightnight McQueen' नाम का एक ऐसा रोबोट बनाया है जो शहद का उत्पादन करने वाली मधुमक्खियों को उनके छत्ते से बिना नुकसान पहुंचाए, सुरक्षित तरीके से हटा देता है। उनके इस रोबोट की मदद से मधुमक्खियों को संरक्षण मिलेगा।

मिल चुके हैं कई अवार्ड्स

मिल चुके हैं कई अवार्ड्स
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काव्या रोबोटिक्स के क्षेत्र में आयोजित दुनिया की प्रतिष्ठित प्रतिस्पर्धा 'फर्स्ट लेगो लीग' के लिए क्वालिफाई करने वाली भारत की सबसे युवा टीम की सदस्य हैं। वो रोबोटिक्स के लिए कई सारे अवार्ड्स भी अपने नाम कर चुकी हैं। 

4. दुनिया का सबसे छोटा सैटेलाइट

4. दुनिया का सबसे छोटा सैटेलाइट
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क्या आप 64 ग्राम के सैटेलाइट की कल्पना कर सकते हैं? इस असंभव इनोवेशन को मुमकिन करके दिखाया है तमिलनाडु के पल्लापत्ती के रहने वाले 18 साल के रिफत शारूक ने। 

भारत के पूर्व राष्ट्रपति के नाम पर रखा अपने प्रोजेक्ट का नाम

भारत के पूर्व राष्ट्रपति के नाम पर रखा अपने प्रोजेक्ट का नाम
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रिफत ने अपने प्रोजेक्ट का नाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को डेडिकेट करते हुए 'कलामसैट' रखा। रिफत के अनुसार उनके सैटेलाइट का मुख्य काम थ्रीडी प्रिंटेड कार्बन फाइबर की क्षमता को डेमोंस्ट्रेट करना है।

नासा ने किया लॉन्च

नासा ने किया लॉन्च
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नासा द्वारा लॉन्च किये गए इस सैटेलाइट को 'क्यूब्स इन स्पेस' नाम के एक कॉम्पिटिशन की मदद से सिलेक्ट किया गया था, जिसे 'नासा' और 'आई डूडल लर्निंग' नाम के एक ऑर्गनाइजेशन ने संयुक्त रूप से आयोजित करवाया था।

3. एनर्जी एफिशिएंट कार

3. एनर्जी एफिशिएंट कार
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अगर हम आपको बताएं कि एक कार ऐसी है जो 300 का एवरेज देती है तो आपको शायद उस पर यकीन न हो। मगर इंदिरा गाँधी टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वुमन की 15 लड़कियों की एक टीम ने इस करिश्मे को सच कर दिखाया है।

इतनी उम्र की हैं ये लड़कियां

इतनी उम्र की हैं ये लड़कियां
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तीन पहिये वाली इस एनर्जी एफिशिएंट कार बनाने वाली इन लड़कियों की टीम में 18 से 21 साल की लड़कियां शामिल हैं।

मिले ये अवार्ड्स

मिले ये अवार्ड्स
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कार बनाने वाली लड़कियों की 'टीम पेंथेरा' को सिंगापुर में आयोजित हुए Shell Eco Marathon में मिले सम्मान सहित कई अवार्ड्स मिल चुके हैं। 

2. साइलेंट हार्ट अटैक का पता लगाने के लिए तकनीक

2. साइलेंट हार्ट अटैक का पता लगाने के लिए तकनीक
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तमिलनाडु के 10वीं क्लास के छात्र आकाश मनोज ने साइलेंट हार्ट अटैक का पता लगाने के लिए तकनीक विकसित की है। उन्होंने अपने इनोवेशन के बारे में बताया कि 'एफएबीपी3 प्रोटीन सबसे छोटे प्रोटीनों में से एक है और यह हमारे शरीर में पाया जा सकता है। यह निगेटिव चार्ज वाला होता है, इसलिए पॉजिटिव चार्ज की ओर तेजी से आकर्षित होता है। उसके इसी गुण का इस्तेमाल करते हुए मैंने यह तकनीक तैयार की है।'

देखिये वीडियो

आकाश को इनोवेशन स्कॉलर्स इन-रेजीडेंस प्रोग्राम के तहत राष्ट्रपति भवन में भी रहने के लिए बुलाया गया था।

1. 3D प्रिंटेड सेनेटरी नैपकिन डिस्पेंसर

1. 3D प्रिंटेड सेनेटरी नैपकिन डिस्पेंसर
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मुंबई के Cathedral and John Connon स्कूल की बारहवीं क्लास की लड़कियों ने अप्रैल में 3D प्रिंटेड सेनेटरी नैपकिन डिस्पेंसर बनाया है जो कॉइल और लाइट सेंसर की मदद से सेनेटरी नैपकिन रिलीज करता है।

देखिये वीडियो

इसे बनाने वाली लड़कियां NGOs की मदद से इसे भारत के पिछड़े इलाकों तक पहुंचाना चाहती हैं। 

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