इस बड़ी सी दुनिया में ऐसी छोटी-छोटी बातें भी होती रहती हैं, यकीन ना हो तो देख लो ये तस्वीरें

आप भी सोचेंगे कि कोई ऐसा कैसे कर सकता है? 

इस बड़ी सी दुनिया में ऐसी छोटी-छोटी बातें भी होती रहती हैं, यकीन ना हो तो देख लो ये तस्वीरें
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जिंदगी में ऐसी बहुत सी चीजें और बातें होती हैं जो हमें समझ ही नहीं आती हैं। लोगों को समझना भी बड़ा मुश्किल काम है। वैसे हम खुद को ही नहीं समझ पाते हैं तो दूसरों को कैसे समझेंगे? कुछ लोग होते हैं, जो अक्सर ऐसी हरकतें कर देते हैं कि घंटों दिमाग खपा देने के बाद भी समझ नहीं आता है कि इसने ऐसा किया क्यों? 

अब हमारे एक दोस्त को ही ले लीजिए। वो जनाब उस दिन कैब से घर आए। मगर जैसे ही वो घर पहुंचे उन्होंने जिद पकड़ ली कि वो तो गाड़ी से उतरेंगे ही नहीं। कोई बच्चा होता तो समझ भी आता, मगर ये तो हट्टे-कट्टे नौजवान थे। ड्राइवर और दोस्तों को इन्हें कैब से बाहर निकालने में पूरा आधा घंटा लगा। अब क्या है ना कि वो नशे में थे इसलिए हम उन्हें माफ कर देते हैं। 

मगर कुछ महान लोग तो पूरे होश में होते हुए भी कई बार ना जाने कैसी हरकतें कर बैठते हैं। आज बात ऐसी ही कुछ हरकतों की।

कबाड़ का सामान 

कबाड़ का सामान 

बहुत से घरों में ऐसे किसी स्थान विशेष पर कबाड़ का सामान रखे हुए आपने भी देखा होगा। मगर इस जगह कार कौन रखता है यार। मगर यहां तो ऐसा ही कुछ किया गया है। 

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ये देखो 

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पहला सवाल तो यह है कि एक पेड़ को यह पहनाने की क्या जरूरत थी? दूसरा जिसने भी किया आखिर किया कैसे?

क्या बोले अब?

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कोई किस करने के लिए इतना उतावला कैसे हो सकता है? नहीं यार, मुझे तो सोचकर ही उल्टी आ रही है। 

हद ही है यार 

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यार मतलब, डर के माहौल में भी किसी के अंदर इतनी ठरक कैसे भरी हो सकती है? समझ नहीं आता।

क्या बैलेंस है?

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एक एयरपोर्ट पर बैगेज क्लेम के कुछ इस तरह बैगेज रखा जाता है। ऐसे तो कोई बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है।

'कचरा पेटी' में ही कचरा डाले 

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आपने लोगों को कई तरह के कचरे फेंकते हुए देखा होगा। मगर ऐसे कार को तो कोई 'बाहुबली' ही उठाकर कचरे के डिब्बे में फेंक सकता है।

अच्छी पार्किंग है 

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बढ़ते ट्रैफिक के चलते पार्किंग को लेकर भी इनोवेशन्स होने लगे हैं। ये भी ऐसा ही एक इनोवेशन होगा।

इसकी क्या जरूरत?

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सिर्फ फोटोशूट करना तो ये बड़ा अच्छा लग रहा है। लेकिन किसी ने इतनी मेहनत की ही क्यों?

ये हुआ कैसे? 

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ये साइकिल शायद बरसों से यहां खड़ी थी। इसलिए पेड़ इसके अंदर से ही निकल आया। कोई इंसान ऐसा कर सकता है क्या?

ये गजब है 

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हम तो उंगली पर कॉपी रखकर ही बैलेंस नहीं कर पाते हैं। यहां पत्थर के ऊपर पत्थर बैलेंस हो रहा है।  

अब ये क्या है?

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इसे देखकर भी मन में एक बड़ा सवाल आ रहा है कि इस टायर को यहां अंदर घुसाया कैसे गया होगा? आपको समझ आए तो बताना जरूर।

खो गए?

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सुना तो था कि प्यार में अक्सर लोग एक-दूसरे में खोए रहते हैं। लेकिन पता नहीं था कि इतना खो जाते हैं कि पता ही नहीं चलता कि नजरें कहां टिकी हुई हैं।

इतनी मेहनत 

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एक कार को पार्क करने के लिए इतनी मेहनत कौन करता है? और तो और लोग भी इतने सारे जुट गए हैं जैसे किसी बड़े मिशन पर निकले हों।

कोई खाना चाहेगा?

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ऐसा तो कोई आलसी व्यक्ति ही कर सकता है। धुली हुई प्लेट मिली नहीं होगी और भूख भी जोरो से लगी होगी तो बस जो मिला उसी में परोस लिया। 

टैलेंट है 

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किसी के मन में आया होगा 'आज कुछ तूफानी करते हैं'। इसलिए उसने इस जगह जाकर कार पार्क कर दी। चलिए ये फिर भी ठीक है। मगर अब वो कार निकालेगा कैसे?

यदि आपको इनमें से किसी भी तस्वीर का लॉजिक समझ आया हो तो हमारे साथ शेयर जरूर कीजिएगा। 

क्या आपने आज से पहले ऐसा कोई वाकया देखा था?