...तो इस वजह से सिकुड़ जाती है उंगलियां और डर के समय छूट जाते हैं पसीने

पसीना आने के पीछे होते हैं ये कारण। 

...तो इस वजह से सिकुड़ जाती है उंगलियां और डर के समय छूट जाते हैं पसीने
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अक्सर घर के बुजुर्गो को आपने ये कहते सुना होगा कि 'Health is Wealth' यानी स्वास्थ्य ही संपत्ति है। आप खुद गौर करें तो जब आप स्वस्थ होते हैं तो आपको हर चीज अच्छी लगती है। वहीं अगर आपकी तबियत खराब हो तो दुनिया की सारी मौज-मस्ती एक तरफ और बिगड़ा स्वास्थ्य एक तरफ। 

असल में हमारा शरीर एक मशीन की तरह काम करता है। जब हम कुछ स्वास्थ्यवर्धक खाते हैं तो उससे हमारे शरीर को फायदा मिलता है। वहीं अगर गलती से हमारे शरीर में कोई गलत चीज की एंट्री हो जाए तो पूरा शरीर उसके प्रति रोग-प्रतिरोधक तंत्र की तरह काम करता है। 

आपने देखा होगा जब हमें ठंड लगती है तो हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। अगर हम देर तक पानी में रहें तो हमारे हाथों की उंगलियां सिकुड़ने लगती हैं। क्या आपने कभी सोचा कि ऐसा क्यों होता है? शायद नहीं। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि ऐसा होने के पीछे क्या कारण है?

उंगली की चमड़ी का सिकुड़ना 

उंगली की चमड़ी का सिकुड़ना 

आपने देखा होगा जब आप बहुत देर तक पानी में रहते हैं या कुछ काम करते हैं तो आपकी उंगलियों की चमड़ी सिकुड़ जाती होगी। असल में ऐसा इसलिए होता है क्योंकि देर तक पानी में रहने पर आपकी स्किन में चिकनाहट आ जाती है और पानी में चीजों पर पकड़ मजबूत करने के लिए स्किन सिकुड़ जाती है। 

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रोंगटे खड़े होना 

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सामान्य तौर पर ऐसा तब होता है जब हमें बहुत ठंड लग रही होती है। ऐसे में जब दिमाग को ये बात पता लगती है कि ठंड का अनुभव हो रहा है तो वो रोंगटे खड़े कर शरीर को गर्माहट पहुंचाने का काम करता है।

पेट में तितलियां उड़ना 

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जब भी हम पहली डेट पर जाते हैं या पहली बार किसी से मिलते हैं। तो हमें हमारे पेट में एक खालीपन का अनुभव होता है।  खास तौर पर ऐसा लगता है जैसे हमारे पेट में अनेक तितलियां घूम रही हो। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि तब हमारे पेट में एंड्रालिन हार्मोन का निकलना तेज हो जाता है, जिससे हमें ऐसा महसूस होने लगता है।

जम्हाई लेना 

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जब भी हम कुछ काम कर रहे होते हैं तो बोरियत की वजह से हम जम्हाई लेने लगते हैं। सामान्य तौर पर ऐसा या तो कम नींद की वजह से होता है या फिर जब हमारी बॉडी को टेम्प्रेचर कम करना होता है, तब ऐसा होता है। 

बॉडी को स्ट्रेच करना 

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आपने शायद कभी गौर ना किया हो। लेकिन जब भी हम सुबह उठते हैं तो उठते ही हम अपनी बॉडी को स्ट्रेच करते हैं। हमारा शरीर ऐसा इसलिए करता है ताकि बॉडी को पूरे दिन की एक्टिविटीज के लिए तैयार किया जा सके।

छींक आना 

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सिर्फ सर्दी-जुकाम ही नहीं बल्कि कई बार ऐसे ही हमें जोरदार छींक का सामना करना पड़ता है। असल में जब हम सांस ले रहे होते हैं तो हमारी सांस के साथ धूल-मिटटी के कण, कचरा, जीवाणु शरीर में प्रवेश करने का प्रयास करते हैं। छींक इन चीजों को प्रवेश करने से रोकती है और उन्हें बाहर निकाल फेंकती है।   

आंसू निकलना 

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जब भी हम दुखी होते हैं या इमोशनल होते हैं, तो हमारी आंखें आंसुओं से भर जाती है। दरअसल आंसू आना तो नेचुरल प्रोसेस है, जिसमें आंखों की सफाई हो जाती है और आंखों को देखने में दिक्क्तों का सामना नहीं करना पड़ता।

पसीना आना 

पसीना आना 
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पसीने को लेकर अलग-अलग तरह के तथ्य हैं। लेकिन सर्वमान्य तथ्य ये है कि जब भी बॉडी का टेम्प्रेचर ज्यादा हो जाता है तब बॉडी खुद को कूल डाउन करने के लिए पसीने का सहारा लेती है और पसीना निकलने पर हमारी बॉडी का टेम्प्रेचर नार्मल हो जाता है।

हिचकियाँ आना 

हिचकियाँ आना 
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हिचकी आने का यूनिवर्सल कारण ये माना जाता है कि जरूर आपको कोई याद कर रहा होगा। लेकिन इसके पीछे का साइंटिफिक कारण यह है कि अगर आप कोई चीज गलत तरीके से या जल्दी-जल्दी खा लेते हैं तो इससे आपकी न्यूमोगैस्ट्रिक नर्व पर दबाव पड़ता है और आपको हिचकियाँ आने लगती है।

आंखें भींचना 

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जब भी आप किसी चीज से चिड़चिड़ाहट महसूस करते हैं या फिर कोशिश करते-करते इतने तंग हो जाते हैं कि आंखें भींचने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आंखें भींचने वाली सिचुएशन कैसे आती है? असल में ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आप उस सिचुएशन के लिए तैयार नहीं रहते और अचानक आपके साथ कुछ ऐसा घटित हो जाता है। इस वजह से दिमाग की इनवॉलेंट्री ग्लेंड पर दबाव पड़ता है और आप स्ट्रेस दूर करने के लिए ऐसा करने लगते हैं।
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