पानी की किल्लत पहुंच चुकी है चरम सीमा पर, यहाँ नहाने के भी बनाए जा चुके हैं रूल्स

कहीं भारत की भी ना हो जाए ऐसी हालत। 

पानी की किल्लत पहुंच चुकी है चरम सीमा पर, यहाँ नहाने के भी बनाए जा चुके हैं रूल्स
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"जल है तो कल है।"

ये बात हमें पढ़ने और सुनने तो हर कहीं मिल जाती है मगर हम इस बात को किसी बोरिंग टीचर की कही बात की तरह इग्नोर कर देते हैं। जहाँ हाथ धोने के लिए हमें एक लीटर पानी की जरूरत होती है और हम 10 लीटर पानी खर्च कर देते हैं। जितने पानी में हम हाथ धोते हैं, उतने पानी में तो एक इंसान अच्छी तरह से नहा सकता है। मगर हम ऐसी छोटी-मोटी बातों पर ध्यान नहीं देते।

दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में पानी समाप्ति की कगार पर पहुंच चुका है। वहां लोगों के नहाने और शौचालय में फ्लश का इस्तेमाल किये जाने जैसी चीजों पर भी सरकार द्वारा नियम बना दिए गए हैं।

तो चलिए तस्वीरों के जरिये हम आपको कराते हैं केपटाउन की सैर। उम्मीद है वहां के हालात देखकर आप पानी ना बर्बाद करेंगे और ना ही किसी को करने देंगे।

जलवायु परिवर्तन की वजह से पड़ा सूखा

जलवायु परिवर्तन की वजह से पड़ा सूखा

केपटाउन में इस समय पानी लगभग खत्म होने की कगार पर है। वहाँ जलवायु परिवर्तन की वजह से तीन साल से सूखा पड़ रहा है। इसकी वजह से पानी के लिए त्राहिमाम हो रहा है। यहाँ पर एक दिन के लिए 450 मिलियन पानी के इस्तेमाल की सीमा रखी गई है। अगर ये सीमा पार हुई तो 'डे जीरो' लागू कर दिया जाएगा।

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यह है 'डे जीरो'

यह है 'डे जीरो'
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'डे जीरो' में पानी बचाने के इरादे से करीब 75 प्रतिशत घरों में पानी की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। इसकी वजह से करीब 10 लाख से ज्यादा घरों को पानी नहीं मिलेगा। 'डे जीरो' में हॉस्पिटल और स्कूल को छूट देते हुए इनकी पानी की सप्लाई बंद नहीं की जाएगी।

शहर में बनाए जाएंगे वाटर कनेक्शन

शहर में बनाए जाएंगे वाटर कनेक्शन
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इस दौरान शहर में करीब 200 वॉटर कनेक्शन प्वाइंट बनाए जाएंगे। जहाँ से प्रत्येक व्यक्ति को सिर्फ 25 लीटर पानी मिलेगा। कनेक्शन पर पानी के लिए मारा-मारी ना हो इसके लिए वहां पुलिस और सेना के जवान मौजूद रहेंगे। 

पानी इस्तेमाल करने की बनाई सीमा

पानी इस्तेमाल करने की बनाई सीमा
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पानी बचाने के इरादे से यहाँ फरवरी के महीने में प्रति व्यक्ति पानी खर्च करने की सीमा तय कर दी गई है। इसके मुताबिक एक व्यक्ति एक दिन में 87 से 50 लीटर पानी खर्च कर सकता है।

हफ्ते में दो बार नहा सकेंगे लोग

हफ्ते में दो बार नहा सकेंगे लोग
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यहाँ पर अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी है कि वो टॉयलेट में फ्लश करने के लिए टंकी का इस्तेमाल न करें और कम से कम पानी बहाएं। साथ ही साथ उन्होंने लोगों को हफ्ते में दो बार से ज्यादा ना नहाने की सलाह भी दी है।

पिछले तीन सालों में हुई सिर्फ इतनी बारिश

पिछले तीन सालों में हुई सिर्फ इतनी बारिश
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1977 के बाद से केपटाउन में हर साल औसतन 508 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। लेकिन पिछले तीन सालों में यहाँ सिर्फ 153 मिमी, 221 मिमी और 327 मिमी बारिश हुई है।

सिंचाई हुई कम

सिंचाई हुई कम
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बारिश कम होने से यहाँ पिछले पांच सालों में यहाँ सिंचाई का इस्तेमाल बहुत कम हो गया है, जिसका सीधा असर  खेती पर पड़ रहा है।

समुद्र का पानी कर रहे हैं साफ

समुद्र का पानी कर रहे हैं साफ
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यहाँ पानी की इतनी किल्लत हो चुकी है कि समुद्र का पानी फिल्टर किये जाने की कोशिश भी की जाने लगी है। जरा सोचकर देखिये वहां क्या आलम होगा?

हालात हो गए इतने बदतर

हालात हो गए इतने बदतर
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यहाँ पर हालात इतने बदतर हो गए हैं कि यहाँ नालियों के पानी को साफ करने पर भी जोर दिया जा रहा है। 

हमें भी है संभल जाने की जरूरत

हमें भी है संभल जाने की जरूरत
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केपटाउन की हालत देखते हुए हमें संभल जाने की जरूरत है। आने वाले कल में भारत भी केपटाउन बन सकता है। इसलिए पानी बर्बाद न करें। ना किसी और को करने दें। 

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क्या आप मानते हैं कि पानी बचाने को लेकर अधिकांश लोग उदासीन ही हैं?