प्यार, इश्क और मोहब्बत  

प्यार की अनोखी कहानी। 

प्यार, इश्क और मोहब्बत  
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'प्यार...' दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज है प्यार। जब कोई प्यार में होता है तो उसका हर पल खूबसूरत होता है। प्यार का नशा ही ऐसा होता है जो न पीने वाले को भी मदहोश कर देता है। जब लोग प्यार में होते हैं तो साथ जीने-मरने की कसमें खाते हैं। अपने प्यार को पाने के लिए किसी भी हद से गुजर जाने की हिम्मत दिखाते हैं। लेकिन प्यार मुक्कमल कब होता है? कभी सोचा? शायद नहीं। 

प्यार वो नहीं जो दुनिया के सामने आपका सिर झुका दे। प्यार तो वो है जो दुनिया से लड़ने की हिम्मत जुटा दे। इस वैलेंटाइन डे के मौके पर हम आपके सामने एक ऐसी ही कहानी बताने जा रहे हैं। इसमें प्यार, इश्क और मोहब्बत की अलग परिभाषाएं बताई गई हैं। 

तो आइये प्यार की नाव में सवार होकर इस खूबसूरत कहानी की ओर चलते हैं।  

विजय - पिताजी, मैं मुक्ता से लव करता हूं। शादी के लिए आपकी इजाजत चाहिए। 

पिता   - प्यार याने क्या? प्यार, इश्क या मोहब्बत?

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विजय - सब एक ही तो है!  

पिता - नहीं, पहले इनमे फर्क जानो और बताओ फिर मैं सोचूंगा।

 

 
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इस तरह पिताजी ने विजय को सोचकर आने के लिए 3 दिन का समय दिया।   

(तीन दिन बाद)

 

 
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रानी हाडा पक्षियों से बेइन्तिहा प्यार करती थीं। उनका महल विभिन्न पक्षियों का बसेरा था। प्यार किसी से भी, बेजान वस्तुओं से भी हो सकता है। 

 

 
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रानी राजा चूडावत से बेपनाह मोहब्बत करती थीं। अगर उस जमाने में किडनी प्लान्टेशन होता और चूडावत को जरूरत होती तो वो खुशी-खुशी अपनी एक किडनी उसे दे देती। मोहब्बत दो लोगों के बीच होती है। मैं आपसे भी मोहब्बत करता हूँ।

 

 
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शादी की मेहंदी सूखी भी नहीं थी कि राजा को युद्ध पर जाना पड़ा था। मोर्चे से जब बार-बार संदेशवाहक आकर रानी का हाल पूछने लगा तो रानी समझ गई कि राजा का पूरा ध्यान रानी पर है, न कि लड़ाई पर।

 

 
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जब तीसरे दिन संदेशवाहक आया और राजा के लिए कोई निशानी मंगवाई तो रानी हाडा ने अपनी तलवार से अपना सर काटकर थाली में ढक कर राजा को भिजवा दिया।

 

 
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राजा उसके बलिदान का मकसद समझ गया। युद्ध में खुलकर औरंगजेब की सेना से खून की होली खेली और राज्य का मान बचाया। रानी को अपने राज्य से इश्क था।

 

 
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पिता - पर तुम मुक्ता को क्या करते हो?

विजय - मोहब्बत। नहीं मिली तो मैं उसके लिए मरूंगा नहीं और न वो मेरे लिए।

पिता - गुड। अगर तुम इश्क कहते तो वो उसके लिए तुम्हारी दीवानगी होती और हम घर में

सेकण्ड क्लास सिटीजन्स बन जाते। मुझे मंजूर है।

नोट - यह स्टोरी विटीफीड के लिए रिटायर्ड कर्नल पी.देवगिरीकर ने लिखी है।

क्या आपने आज से पहले इन बातों को लेकर कोई विचार बनाया था?