'खिलौना नहीं इंसान हैं हम...', आखिर कब समझेगा ये समाज?

एक बार आईने में ज़रा खुदको देखिए। 

'खिलौना नहीं इंसान हैं हम...', आखिर कब समझेगा ये समाज?
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मैं भारत की बेटी हूँ और मैं आपको बताना चाहती हूँ कि मुझे बहुत डर लग रहा है और असुरक्षित महसूस हो रहा है। मेरा ये डर आज का नहीं बल्कि तब से है जब मैं अपनी माँ के गर्भ में थी। मुझे तब भी यही डर लगता था कि दुनिया मुझे मार देगी और आज भी मुझे यही डर है कि दुनिया मुझे नुकसान पहुंचाएगी। 

आज की दुनिया इतनी मॉडर्न हो गई है कि लड़कियां, लड़कों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। लेकिन बेटियों को आज भी सम्मान की नज़रों से नहीं देखा जाता जिनकी वो हकदार हैं। दहेज ना मिलने पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है, अपनी हवस मिटाने के लिए उनका इस्तेमाल किया जाता है और ये समाज कुछ नहीं कर पाता। 

ऐसा मैं अपनी मर्जी से नहीं बल्कि हाल ही में हुए घटनाक्रम से आहत होकर कह रही हूँ। आप ही जवाब दीजिए, क्या गलती थी उस 8 वर्ष की मासूम की। फिर भी उसे शिकार बनाया गया। 

WittyFeed की महिलाओं के साथ-साथ हम सभी WittyFeedians आसिफा के साथ खड़े हैं। 

1. अनन्या सिंघल - इनरवॉइस की थिंकर चीफ  

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"कैसे कोई इतना बेरहम हो सकता है, कैसे कोई किसी की जिंदगी रौंद सकता है,

ये जो खुलेआम घूम रहे हैवान हैं हमारे देश में, कैसे इनको कोई इतनी आजादी दे सकता है,
क्यों ना हम एक जुट होकर उस मासूम बच्ची को इंसाफ दिलाएं,
रौंदे भी जाएं हम तो कोई ग़म नहीं पर सच्चाई के लिए आवाज तो उठाएं।"

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"बेटियां फूलों की तरह होती है इन्हें तोड़ मरोड़ कर मुरझाने के लिए मत छोड़ो...इनका खयाल रखो, इन्हें फूलों की तरह खिलने का मौका तो दो।"

महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए लड़ने में हम सभी को एक साथ आना होगा। 

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क्या आप मानते हैं कि अब इस समस्या से लड़ने के लिए पूरे समाज को एकजुट होना पड़ेगा?