अगर नहीं मिले सैलरी तो आपके पास होते हैं ये 5 अधिकार

कर्मचारियों की मदद करता है कानून।

अगर नहीं मिले सैलरी तो आपके पास होते हैं ये 5 अधिकार
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कई कंपनियां ऐसी होती हैं जो लोगों को जॉब पर तो रख लेती है लेकिन उन्हें समय पर तनख्वाह नहीं देती है। कुछ कंपनी उस समय सैलरी रोक लेती है जब कोई कर्मचारी नौकरी छोड़कर जा रहा होता है। इतना ही नहीं कुछ कंपनियां तो कर्मचारी को बिना किसी वजह के निकाल भी देती है। और तो और सैलरी भी नहीं देती। ऐसे में अधिकांश मौकों पर आदमी खुदको असहाय महसूस करता है। 

बहरहाल यदि आपके या आपके किसी दोस्त के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ है तो निराश मत होइए। सरकार ने कर्मचारियों को कुछ अधिकार दिए हैं, जिनके बूते उनका पैसा हर हाल में सुरक्षित रखा जा सकता है। जरूरत है तो बस थोड़ी सी जागरूकता की। 

हम इसी मामले को समझाती एक स्टोरी लेकर आए हैं आपके पास। गौर से पढ़िए। दोस्तों को भी बताइए यह काम की बात। 

लीगल नोटिस भेजें

लीगल नोटिस भेजें

अगर आपकी कंपनी सैलरी देने से इनकार कर रही है तो आप उसे लीगल नोटिस भेज सकते हैं। इसके लिए आपको एक वकील करना होगा, जो इस तरह के मामले समझता हो। 

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समझौते का रास्ता

समझौते का रास्ता
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लीगल नोटिस भेजने के अलावा कर्मचारी समझौता भी कर सकता है। कर्मचारी को दिए जाने वाले लगभग सभी ऑफर लेटर में एक भाग होता है, जिसमें लिखा होता है कि किसी भी विवाद की स्थिति में मध्यस्थता यानी समझौते का रास्ता अपनाया जा सकता है। इसके अंर्तगत कर्मचारी मध्यस्थता और समझौता अधिनियम 1996 के प्रावधानों के अनुसार मामले को आगे बढ़ा सकता है। मध्यस्थता अदालत के बाहर विवाद को हल करने का एक तरीका है।

लेबर कमिशनर के पास जाएं

लेबर कमिशनर के पास जाएं
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सैलरी न मिलने पर कर्मचारी अपने जिले के श्रम आयोग यानी लेबर कमीशन के पास भी जा सकता है। श्रम आयोग कर्मचारियों के अधिकारों के लिए लड़ती है।

कर सकते हैं केस

कर सकते हैं केस
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यदि लेबर कमिशनर के पास जाने पर भी समस्या का समाधान नहीं होता तो कर्मचारी कोर्ट जा सकते हैं। कोर्ट में वे इंडस्ट्रीयल डिस्प्यूट एक्ट, 1947 के सेक्शन 33 (C) के तहत केस दर्ज कर सकते हैं।

जा सकते हैं सिविल कोर्ट

जा सकते हैं सिविल कोर्ट
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यदि कोई कर्मचारी कंपनी के प्रबंधक या कार्यकारी स्तर के ऊपर के पद पर है तो वह नागरिक प्रक्रिया संहिता 1908 के तहत सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर कर सकता है।

आगे जानिए कंपनी के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने से पहले आपके पास कौन-कौन से दस्तावेज होने चाहिए।

रोजगार कांट्रेक्ट की प्रति

रोजगार कांट्रेक्ट की प्रति
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कंपनी के खिलाफ केस करने के लिए आपके पास इस बात का सबूत होना जरूरी है कि उस कंपनी ने आपको काम पर रखा था। इसके लिए कंपनी द्वारा दिया गया ऑफर लेटर या रोजगार कांट्रेक्ट होना अनिर्वाय है।

बैंक स्टेटमेंट

बैंक स्टेटमेंट
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कंपनी ने आपको सैलरी नहीं दी है, इस बात को साबित करने के लिए अपने बैंक खाते के विवरण की एक प्रति भी जरूरी होती है।

कंपनी पर फ्रॉड का केस

कंपनी पर फ्रॉड का केस
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यदि कोई कंपनी फ्रॉड करती है तो उसके खिलाफ कंपनीज एक्ट 2013 के सेक्शन 447 के तहत केस दर्ज हो सकता है।

कितने सालों की सजा

कितने सालों की सजा
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फ्रॉड साबित होने पर एम्प्लॉयर को 6 माह से 10 साल तक की जेल हो सकती है। एम्प्लॉई इंडियन पैनल कोड के तहत एम्प्लॉयर के खिलाफ आपराधिक केस भी दर्ज करवा सकते हैं।

तो बस कर्मचारी किसी भी स्थिति में खुदको कमजोर न समझे। मगर हां अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी ध्यान रखें। यह स्टोरी पसंद आए तो दोस्तों के साथ भी शेयर करें।

क्या आपको लगता है कि कर्मचारियों को उनके अधिकारों का अंदाजा ही नहीं होता है?